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एसडीएम, डीएसओ और उनकी टीम के खिलाफ मुकदमा दर्ज, ये हैं आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Sat, 27 Oct 2018 10:58 AM IST
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- फोटो : PTI
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जिला पूर्ति कार्यालय के एक रसूखदार मुलाजिम की छत्रछाया में चल रही राशन की कालाबाजारी के प्रकरण में एसडीएम कोल आईएएस अधिकारी जोगिंदर सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी नीरज सिंह व पूर्ति निरीक्षक समेत छह लोगों के विरुद्ध अदालत में मुकदमा दायर किया गया है। मुकदमा दर्ज कराने वाले ने इन सरकारी मुलाजिमों पर सरकारी पदों का दुरुपयोग करने, डराने व धमकाने के भी आरोप लगाए हैं। अदालत ने आगामी 12 नवंबर तक इस मामले में पुलिस की रिपोर्ट तलब की है।
आवास विकास कॉलोनी जेल रोड निवासी दिनेश पाठक ने अपने वकील अनूप कौशिक के माध्यम से 156 (3) के तहत उक्त वाद दायर किया है। कौशिक के मुताबिक 29 अगस्त को गभाना क्षेत्र के महरावल गांव में राशन के गेहूं की कालाबाजारी की सूचना पर मीडियाकर्मी दिनेश कवरेज करने पहुंचे। यहां मैसर्स विभूति फूड्स प्लोर मिल में सरकारी गेहूं ट्रैक्टर से उतारा जा रहा था। एसडीएम व संबंधित विभाग के अधिकारियों को इसकी तत्काल खबर दी गई मगर कार्रवाई नहीं हुई।
आरोप है कि फ्लोर मिल का लाइसेंस पूर्ति विभाग के लिपिक विपुल प्रताप सिंह की पत्नी शालिनी सिंह के नाम पर है, इसके साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए हैं। बकौल वादी इसमें विभागीय अधिकारियों की हिस्सेदारी तय है।
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एसडीएम कोल को प्रकरण की जानकारी थी लेकिन उन्होंने कार्रवाई नहीं की। चार अक्तूबर को एसएसपी को भी इस पूरे प्रकरण का पत्र लिखा गया था, लेकिन मामला दबा दिया गया। इसीलिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। यही नहीं वादी का आरोप है कि शिकायत वापस लेने के लिए उस पर हर तरफ से दबाव बनाया जा रहा है।
वादी के वकील कौशिक ने बताया कि मामले में एसडीएम कोल ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं आईएएस अधिकारी जोगिंदर सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी नीरज सिंह, पूर्ति निरीक्षक प्रमोद व नवल किशोर, लिपिक विपुल व इनकी पत्नी को आरोपी बनाया गया है। सीजेएम कोर्ट ने प्रकीर्ण वाद दर्ज कर गभाना इंस्पेक्टर से 26 अक्तूबर तक आख्या मांगी है। जिसमें 12 नवंबर की सुनवाई की तारीख तय है।
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आवास विकास कॉलोनी जेल रोड निवासी दिनेश पाठक ने अपने वकील अनूप कौशिक के माध्यम से 156 (3) के तहत उक्त वाद दायर किया है। कौशिक के मुताबिक 29 अगस्त को गभाना क्षेत्र के महरावल गांव में राशन के गेहूं की कालाबाजारी की सूचना पर मीडियाकर्मी दिनेश कवरेज करने पहुंचे। यहां मैसर्स विभूति फूड्स प्लोर मिल में सरकारी गेहूं ट्रैक्टर से उतारा जा रहा था। एसडीएम व संबंधित विभाग के अधिकारियों को इसकी तत्काल खबर दी गई मगर कार्रवाई नहीं हुई।
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आरोप है कि फ्लोर मिल का लाइसेंस पूर्ति विभाग के लिपिक विपुल प्रताप सिंह की पत्नी शालिनी सिंह के नाम पर है, इसके साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए हैं। बकौल वादी इसमें विभागीय अधिकारियों की हिस्सेदारी तय है।
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एसडीएम कोल को प्रकरण की जानकारी थी लेकिन उन्होंने कार्रवाई नहीं की। चार अक्तूबर को एसएसपी को भी इस पूरे प्रकरण का पत्र लिखा गया था, लेकिन मामला दबा दिया गया। इसीलिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। यही नहीं वादी का आरोप है कि शिकायत वापस लेने के लिए उस पर हर तरफ से दबाव बनाया जा रहा है।
वादी के वकील कौशिक ने बताया कि मामले में एसडीएम कोल ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं आईएएस अधिकारी जोगिंदर सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी नीरज सिंह, पूर्ति निरीक्षक प्रमोद व नवल किशोर, लिपिक विपुल व इनकी पत्नी को आरोपी बनाया गया है। सीजेएम कोर्ट ने प्रकीर्ण वाद दर्ज कर गभाना इंस्पेक्टर से 26 अक्तूबर तक आख्या मांगी है। जिसमें 12 नवंबर की सुनवाई की तारीख तय है।