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Lalitpur News: लुटा कर्बला में जिसका घराना, वो मोहम्मद हैं...
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। हजरत बाबा सदनशाह रहमत उल्ला अलैह की सरजमीं पर उर्स मुबारक के दूसरे दिन सुबह तक महफिल-कव्वाली का दौर चला। नामी गिरामी कव्वालों ने कलाम व गजलें पढ़कर खूब वाहवाही लूटी। सुबह तक चली महफिल में श्रोता जमे रहे।
सदनशाह के 106वें उर्स के दूसरे दिन प्रख्यात कव्वालों ने फन पेश किए। उर्स कमेटी के मुख्य संरक्षक राज्य मंत्री मनोहर लाल पंथ ने कव्वालों की खूब सराहना की। सदारत उर्स कमेटी के सदर हाजी बाबू बदरुद्दीन कुरैशी ने की। आफताब हाशिम साबरी ने अपने कलाम से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने सबसे पहले खुदा की शान में हम्द-ए-पाक सुनाई। फिर दौर चला नात-ए-पाक, करे जिक्र जिसका ख़ुदा वो मोहम्मद हैं, जिसे रब ने रहमत बना के भेजा, लुटा कर्बला में जिसका घराना, वो मोहम्मद हैं, इंसान क्या है फरिश्तों ने माना, कहां पा सकेगा ये जमाना, वो मोहम्मद हैं।
मनकवत का दौर आया तो आफताब हाशिम वारसी ने सबसे पहले क़िस्मत में मेरी चैन से जीना लिख दे, डूबे ना कभी मेरा सफ़ीना लिख दे, जन्नत भी गवारा है मगर मेरे लिए, ए कातिब-ए-तकदीर मदीना लिख दे, ताजदार-ए-हरम हो, निगाह-ए-करम, हम गरीबों के दिन भी संवर जाएंगे। हामीं-ए बेकसां क्या कहेगा जहां, आपके दर से खाली अगर जाएंगे, ताजदार-ए-हरम, ताजदार-ए-हरम को लोगों ने खूब सराहा। मुज्तबा नांजा ने ख्वाजा की शान में पंक्तियां पेश कीं, जिनका चेहरा मोहम्मद की तस्वीर है, वो चमकता सितारा है अजमेर में, गम के मारे शकवा-ए-गम न कर, बदनसीबी पे तू अपनी मातम न कर। नायब सदर अब्दुल रहमान कल्ला ने सभी का आभार व्यक्त किया। मंच का संचालन महासचिव मोहम्मद नसीम व शाकिर अली, अरमान कुरैशी ने किया।
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ये रहे मौजूद
विधानसभा मध्य प्रदेश के सचिव शिशिरकांत चौबे, हाजी साबिर अली, रमजानी दादा ,अबरार अली, रिजवान उज्जमा, हाजी अख्तर खान, समीरकांत चौबे, राजू सिंधी, हमीद खां मंसूरी, सरफराज आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
.......
आज रहेंगे ये कव्वाल
हजरत बाबा सदनशाह की दरगाह पर आज तीन अप्रैल को शाकिब अली मेरठ, टीवी सिंगर इंटरनेशनल फेम कव्वाली पेश करेंगे।
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ललितपुर। हजरत बाबा सदनशाह रहमत उल्ला अलैह की सरजमीं पर उर्स मुबारक के दूसरे दिन सुबह तक महफिल-कव्वाली का दौर चला। नामी गिरामी कव्वालों ने कलाम व गजलें पढ़कर खूब वाहवाही लूटी। सुबह तक चली महफिल में श्रोता जमे रहे।
सदनशाह के 106वें उर्स के दूसरे दिन प्रख्यात कव्वालों ने फन पेश किए। उर्स कमेटी के मुख्य संरक्षक राज्य मंत्री मनोहर लाल पंथ ने कव्वालों की खूब सराहना की। सदारत उर्स कमेटी के सदर हाजी बाबू बदरुद्दीन कुरैशी ने की। आफताब हाशिम साबरी ने अपने कलाम से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने सबसे पहले खुदा की शान में हम्द-ए-पाक सुनाई। फिर दौर चला नात-ए-पाक, करे जिक्र जिसका ख़ुदा वो मोहम्मद हैं, जिसे रब ने रहमत बना के भेजा, लुटा कर्बला में जिसका घराना, वो मोहम्मद हैं, इंसान क्या है फरिश्तों ने माना, कहां पा सकेगा ये जमाना, वो मोहम्मद हैं।
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मनकवत का दौर आया तो आफताब हाशिम वारसी ने सबसे पहले क़िस्मत में मेरी चैन से जीना लिख दे, डूबे ना कभी मेरा सफ़ीना लिख दे, जन्नत भी गवारा है मगर मेरे लिए, ए कातिब-ए-तकदीर मदीना लिख दे, ताजदार-ए-हरम हो, निगाह-ए-करम, हम गरीबों के दिन भी संवर जाएंगे। हामीं-ए बेकसां क्या कहेगा जहां, आपके दर से खाली अगर जाएंगे, ताजदार-ए-हरम, ताजदार-ए-हरम को लोगों ने खूब सराहा। मुज्तबा नांजा ने ख्वाजा की शान में पंक्तियां पेश कीं, जिनका चेहरा मोहम्मद की तस्वीर है, वो चमकता सितारा है अजमेर में, गम के मारे शकवा-ए-गम न कर, बदनसीबी पे तू अपनी मातम न कर। नायब सदर अब्दुल रहमान कल्ला ने सभी का आभार व्यक्त किया। मंच का संचालन महासचिव मोहम्मद नसीम व शाकिर अली, अरमान कुरैशी ने किया।
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ये रहे मौजूद
विधानसभा मध्य प्रदेश के सचिव शिशिरकांत चौबे, हाजी साबिर अली, रमजानी दादा ,अबरार अली, रिजवान उज्जमा, हाजी अख्तर खान, समीरकांत चौबे, राजू सिंधी, हमीद खां मंसूरी, सरफराज आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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आज रहेंगे ये कव्वाल
हजरत बाबा सदनशाह की दरगाह पर आज तीन अप्रैल को शाकिब अली मेरठ, टीवी सिंगर इंटरनेशनल फेम कव्वाली पेश करेंगे।