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Lalitpur News: लुप्तप्राय पांच नदियों में गर्मियों में भी बहेगा पानी

Sat, 25 May 2024 01:22 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 25 May 2024 01:22 AM IST
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Water will flow in five endangered rivers even in summer
संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। विलुप्त होकर बरसाती नालों में तब्दील हो चुकीं पांच नदियों को पुनर्जीवित कराया जा रहा है। नदियों का गहरीकरण-चौड़ीकरण करने के साथ चेकडैम और रपटा बनाए जा रहे हैं। मनरेगा विभाग मानसून से पूर्व इन नदियों को पुनर्जीवित कराने की तैयारी में है।
यहां विभिन्न क्षेत्रों में कई नदियां हैं, जिसमें शहजाद, बरुआ नदी, नाॅट नदी, खरखरी नदी, खेड़र नदी भी शामिल है। इन नदियों में कई छोटे-बड़े नाले आकर मिलते हैं। काफी सिल्ट जमा होने के कारण यह नदियां अपना वास्तविक स्वरूप खोकर विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं। इनमें सिर्फ बरसात के दिनों में पानी बहता दिखता था। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने इन नदियों को पुनर्जीवित करने के निर्देश मनरेगा विभाग को दिए थे, जिसके बाद कार्ययोजना तैयार की गई। नाॅट नदी का डीपीआर 1.8 करोड़ का तैयार किया गया, जिसमें अलग-अलग स्थानों पर 2400 मीटर लंबाई में खुदाई का काम प्रस्तावित है। नदी पर एक अमृत सरोवर, दो चेकडैम व एक रपटा निर्माण कार्ययोजना में शामिल किया गया था।
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शहजाद नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 1.1 करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनाई गई, जिसमें 3-4 किलोमीटर लंबाई में अलग-अलग कार्य प्रस्तावित है। बरूआ नदी जोकि 13 किलोमीटर लंबी है और जामनी नदी में मिलती है, इसके उद्गम स्थल पर एक मीटर गहरा व 16 मीटर चौड़ाई में खुदाई और अस्थाई दस चेकडैम बनाया जाएगा। इसकी लागत 27.75 लाख रुपये रखी गई। खरखरी नदी पर 3.01 किलोमीटर लंबाई में कार्य कराने की योजना तैयार की गई। खेड़र नदी पर छह किलोमीटर लंबाई में काम कराया जाना है। मनरेगा जॉबकार्ड धारकों के मस्टर रोल जारी कर काम शुरू कराया गया।
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अब तक नदियों के पुनर्जीवित करने का काम आधे से अधिक हो गया है। मानसून से पूर्व इसे पूरा कराने की कवायद में विभाग जुटा है। अपने पुराने स्वरूप में आने पर नदियों में पानी का प्रवाह गर्मियों के दिनों में भी बना रहेगा। इससे नदी के आसपास स्थित गांव के लोगों को सिंचाई के लिए पानी भी उपलब्ध हो सकेगा।
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नदी के तटबंधों पर होगा पौधरोपण
नदियों के तटबंधों के कटाव को रोकने के लिए इनके दोनों ओर पौधरोपण किया जाएगा। बांस के पौधों की संख्या अधिक रहेगी। इसके साथ अन्य प्रकार के पौधे भी रोपित किए जाएंगे, जिससे बरसात के दिनों में नदियों के किनारे की मिट्टी का कटाव रोका जा सके।

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पांच नदियों को पुराने स्वरूप में लाने के लिए काम कराया जा रहा है। मनरेगा के जॉबकार्ड धारकों को लगाया गया है। पुनर्जीवित करने का काम अधिकांश क्षेत्रों में अंतिम चरणों में पहुंच गया है। मानसून से पूर्व काम पूर्ण करा लिया जाएगा।
रवींद्रवीर यादव, डीसी मनरेगा
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