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पानी, शौचालय व प्रतीक्षालय की कोई व्यवस्था नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Apr 2016 01:30 AM IST
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mandi kchra, lalitpur news
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। जनपद के मुख्यालय पर स्थित नवीन गल्ला मंडी में आने वाले किसानों को दी जाने वाली सुविधाओं की ओर मंडी समिति को कोई ध्यान नहीं है। यहां तक कि गर्मी में किसानों के लिए पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। सार्वजनिक शौचालयों में ताला पड़ा है और किसान प्रतीक्षालय पर समिति के कर्मचारी कब्जा जमाए हुए हैं।
मुख्यालय पर स्थित गल्ला मंडी में करीब 450 पक्की दुकानें व गोदाम बने हुए हैं। मंडी में व्यापारियों के अलावा करीब डेढ़ हजार पल्लेदार व 500 के करीब महिला कर्मचारी काम करते हैं। सीजन पर हजारों की संख्या में प्रतिदिन किसानों की आवक होती है। रबी की फसल की बिक्री शुरू हो जाने से किसान प्रतिदिन गल्ला मंडी में अपना अनाज बेचने के लिए आ रहे हैं, लेकिन मंडी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने के कारण किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी परिसर में पेयजल के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
कुछ वर्ष पूर्व मंडी समिति ने मंडी परिसर में लाखों रुपये की लागत से एक दर्जन के करीब सार्वजनिक प्याऊ बनवाई थीं, लेकिन उक्त प्याऊ पूरी तरह से बंद पड़ी हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी इस गर्मी में किसानों को अपना गला तरने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। मंडी परिसर में लगभग 20 हैंडपंप लगे हैं, इनमें से लगभग एक दर्जन हैंडपंप से पानी नहीं निकल रहा है।
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प्राइवेट प्याऊ बुझा रही किसानों की प्यास
गत वर्ष 2011-12 में भारतीय जैन मिलन ग्रुप द्वारा मंडी समिति कार्यालय के सामने सार्वजनिक महावीर प्याऊ का निर्माण कराया गया था। इसी प्याऊ के निर्माण के समय ही मंडी समिति द्वारा एक दर्जन प्याऊ का निर्माण कराया गया था। लेकिन, सरकारी प्याऊ वर्तमान में बंद पड़ी हुई हैं और प्राईवेट संस्था द्वारा बनाई गई महावीर प्याऊ आज भी चालू हालत में हैं और गर्मी में मंडी आने वाले किसानों व स्थानीय व्यापारियों की प्यास बुझा रही है।
एहसान के बदले एहसान
शीतल पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण गल्ला मंडी में नई व्यवस्था चलाई जा रही है। मंडी में लगे अनाज के ढेर को समेटने का काम करने वाली महिला मजदूर दुुकानों के बाहर पानी से भरे मटके रखे हुए हैं। यह महिलाएं किसानों को मटके का पानी पिलातीं हैं और बदले में उनसे कुछ अनाज ले लेती हैं।
सार्वजनिक शौचालय बदहाल, लटक रहे ताले
गल्ला मंडी परिसर में एक नया व दो पुराने सार्वजनिक शौचालय बने हुए हैं, लेकिन मंडी समिति की उदासीनता के चलते दोनों पुराने शौचालय जर्जर हालत में हैं। विडंबना यह है कि किसानों व स्थानीय व्यापारियों को इनका लाभ भी नहीं मिल सका। मंडी के मुख्य द्वार पर स्थित जर्जर शौचालय को हाल ही में खोला गया है, लेकिन शौचालय उपयोग करने की स्थित में नहीं है। पुरुष व महिला शौचालय के किसी भी कक्ष में दरवाजे नहीं हैं, पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, पानी की टंकी सूखी पड़ी हुई है।
यही स्थित पुलिस चौकी के पीछे बने पुराने शौचालय की है, इसकी भी स्थिति जर्जर हो चुकी है और इसमें ताला लगा हुआ है। मंडी समिति कार्यालय के सामने कृषक विश्राम गृह के पीछे मंडी समिति द्वारा नया व आधुनिक सुलभ शौचालय बनाया गया है, लेकिन इसमें भी ताला लगा हुआ है। इसे विडंबना ही कहेंगे कि सार्वजनिक शौचालयों के होते हुए भी मंडी आने वाले किसानों, स्थानीय व्यापारियों, पल्लेदारों व महिला मजदूरों को मजबूरी में शौच क्रिया के लिए खुले में जाना पड़ रहा है।
बंद शौचालयों को बनाया आवास
मंडी परिसर के मुख्य द्वार पर स्थित पुराने शौचालय भवन में शौचालय कर्मचारी के लिए एक कक्ष की व्यवस्था है। शौचालय पिछले कई वर्षों से बंद चल रहा है, इसलिए इस कक्ष में होमगार्ड सुरक्षा कर्मी अपना आवास बनाए हुए हैं। इसी तरह स्थानीय पुलिस चौकी के पीछे बने पुराने शौचालय में एक सिपाही अपना आवास बनाए हुए है।
प्रतीक्षालय पर कर्मचारी का कब्जा
किसानों को बैठने व आराम करने के लिए गल्ला मंडी परिसर पर मंडी समिति कार्यालय के सामने कृषक विश्राम गृह बना है। किसानों की सुविधा के लिए बनाए गए इस विश्राम गृह पर मंडी समिमि कार्यालय के एक कर्मचारी द्वारा कब्जा कर लिया गया और कृषक विश्राम गृह को अपना आवास बना लिया है। इसके अंदर वह रसोई, बैठक व बेडरूम बनाए हुए है, लेकिन इस पर अधिकारियों द्वारा कोई उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है। मंडी में अनाज बेचने के लिए आने वाले किसानों के लिए प्रतीक्षालय व विश्राम गृह की कोई व्यवस्था नहीं है, इस कारण किसानों को घंटों धूप में खड़ा रहना पड़ता है। गर्मी व धूप के कारण किसानों का बुरा हाल हो रहा है। किसान संगठन कई बार मंडी में किसान प्रतीक्षालय उपलब्ध कराने की मांग कर चुके है, लेकिन कोई फायदा नहीं है।
स्थायी कैंटीन में खुला कार्यालय
कृषक विश्राम गृह की तरह स्थायी कैंटीन हाल का भी यही हाल है। किसानों को खान-पान की सामग्री उपलब्ध कराने के लिए खान-पान गृह के नाम से स्थाई कैंटीन हाल का निर्माण कराया गया था। इस खान-पान गृह में ज्येष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक का कार्यालय स्थापित करा दिया गया है। स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि इस कार्यालय में हमेशा ताला डला रहता है, कार्यालय का कोई उपयोग नहीं होता है।
प्रकाश की भी नहीं है कोई खास व्यवस्था
कई एकड़ क्षेत्र में फैली गल्ला मंडी में प्रकाश के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं है। शाम होते ही मंडी परिसर में अंधेरा छा जाता है। खंभों पर स्ट्रीट लाइट तो लगी है, पर सभी चालू हालत में नहीं है। परिसर में तीन हाई मास्ट लाइट लगाई गई हैं, जिनमें से मात्र एक हाईमास्ट लाइट चालू हालत में है। अंधेरे के कारण किसानों व स्थानीय व्यापारियों को काफी समस्या होती है और आराजकतत्व व चोर अंधेरे का फायदा उठाने से नहीं चूकते हैं।
पेयजल व शौचालय की उच्च व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों व व्यापारियों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। पेयजल के बिना इस भीषण गर्मी में बुरा हाल हो रहा है।
- विनय कुमार जैन
गल्ला व्यापारी
प्रकाश की व्यवस्था नहीं होने के कारण व्यापारी असुरक्षित महसूस करते हैं। आराजकतत्व अंधेरे का फायदा उठाते हैं व चोरी की घटनाओं को अंजाम देते हैं। तीन हाईमास्ट लाइट में से मात्र एक लाइट चालू है।
- रामस्वरुप साहू
गल्ला व्यापारी
प्रतीक्षायल कक्ष में ताला डला होने के कारण किसानों को काफी परेशानी हो रही है। इतनी कड़ी धूप में सभी का बुरा हाल हो रहा है। किसानों को होने वाली समस्या पर प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
- चतुर्भुज पाठक, ग्राम कल्यानपुरा किसान
पानी पीने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, व्यापारियों से होटल वालों से पानी मांगकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
- पंचम, ग्राम निवाहो किसान
जब ठेकेदार मिलेगा तो नया शौचालय शुरू कर दिया जाएगा। अभी पुराने शौचालय से काम चलाया जा रहा है। मंडी परिसर में प्रतीक्षालय नहीं है।
- अनिल कुमार, मंडी संचिव
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मुख्यालय पर स्थित गल्ला मंडी में करीब 450 पक्की दुकानें व गोदाम बने हुए हैं। मंडी में व्यापारियों के अलावा करीब डेढ़ हजार पल्लेदार व 500 के करीब महिला कर्मचारी काम करते हैं। सीजन पर हजारों की संख्या में प्रतिदिन किसानों की आवक होती है। रबी की फसल की बिक्री शुरू हो जाने से किसान प्रतिदिन गल्ला मंडी में अपना अनाज बेचने के लिए आ रहे हैं, लेकिन मंडी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने के कारण किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी परिसर में पेयजल के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
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कुछ वर्ष पूर्व मंडी समिति ने मंडी परिसर में लाखों रुपये की लागत से एक दर्जन के करीब सार्वजनिक प्याऊ बनवाई थीं, लेकिन उक्त प्याऊ पूरी तरह से बंद पड़ी हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी इस गर्मी में किसानों को अपना गला तरने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। मंडी परिसर में लगभग 20 हैंडपंप लगे हैं, इनमें से लगभग एक दर्जन हैंडपंप से पानी नहीं निकल रहा है।
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प्राइवेट प्याऊ बुझा रही किसानों की प्यास
गत वर्ष 2011-12 में भारतीय जैन मिलन ग्रुप द्वारा मंडी समिति कार्यालय के सामने सार्वजनिक महावीर प्याऊ का निर्माण कराया गया था। इसी प्याऊ के निर्माण के समय ही मंडी समिति द्वारा एक दर्जन प्याऊ का निर्माण कराया गया था। लेकिन, सरकारी प्याऊ वर्तमान में बंद पड़ी हुई हैं और प्राईवेट संस्था द्वारा बनाई गई महावीर प्याऊ आज भी चालू हालत में हैं और गर्मी में मंडी आने वाले किसानों व स्थानीय व्यापारियों की प्यास बुझा रही है।
एहसान के बदले एहसान
शीतल पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण गल्ला मंडी में नई व्यवस्था चलाई जा रही है। मंडी में लगे अनाज के ढेर को समेटने का काम करने वाली महिला मजदूर दुुकानों के बाहर पानी से भरे मटके रखे हुए हैं। यह महिलाएं किसानों को मटके का पानी पिलातीं हैं और बदले में उनसे कुछ अनाज ले लेती हैं।
सार्वजनिक शौचालय बदहाल, लटक रहे ताले
गल्ला मंडी परिसर में एक नया व दो पुराने सार्वजनिक शौचालय बने हुए हैं, लेकिन मंडी समिति की उदासीनता के चलते दोनों पुराने शौचालय जर्जर हालत में हैं। विडंबना यह है कि किसानों व स्थानीय व्यापारियों को इनका लाभ भी नहीं मिल सका। मंडी के मुख्य द्वार पर स्थित जर्जर शौचालय को हाल ही में खोला गया है, लेकिन शौचालय उपयोग करने की स्थित में नहीं है। पुरुष व महिला शौचालय के किसी भी कक्ष में दरवाजे नहीं हैं, पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, पानी की टंकी सूखी पड़ी हुई है।
यही स्थित पुलिस चौकी के पीछे बने पुराने शौचालय की है, इसकी भी स्थिति जर्जर हो चुकी है और इसमें ताला लगा हुआ है। मंडी समिति कार्यालय के सामने कृषक विश्राम गृह के पीछे मंडी समिति द्वारा नया व आधुनिक सुलभ शौचालय बनाया गया है, लेकिन इसमें भी ताला लगा हुआ है। इसे विडंबना ही कहेंगे कि सार्वजनिक शौचालयों के होते हुए भी मंडी आने वाले किसानों, स्थानीय व्यापारियों, पल्लेदारों व महिला मजदूरों को मजबूरी में शौच क्रिया के लिए खुले में जाना पड़ रहा है।
बंद शौचालयों को बनाया आवास
मंडी परिसर के मुख्य द्वार पर स्थित पुराने शौचालय भवन में शौचालय कर्मचारी के लिए एक कक्ष की व्यवस्था है। शौचालय पिछले कई वर्षों से बंद चल रहा है, इसलिए इस कक्ष में होमगार्ड सुरक्षा कर्मी अपना आवास बनाए हुए हैं। इसी तरह स्थानीय पुलिस चौकी के पीछे बने पुराने शौचालय में एक सिपाही अपना आवास बनाए हुए है।
प्रतीक्षालय पर कर्मचारी का कब्जा
किसानों को बैठने व आराम करने के लिए गल्ला मंडी परिसर पर मंडी समिति कार्यालय के सामने कृषक विश्राम गृह बना है। किसानों की सुविधा के लिए बनाए गए इस विश्राम गृह पर मंडी समिमि कार्यालय के एक कर्मचारी द्वारा कब्जा कर लिया गया और कृषक विश्राम गृह को अपना आवास बना लिया है। इसके अंदर वह रसोई, बैठक व बेडरूम बनाए हुए है, लेकिन इस पर अधिकारियों द्वारा कोई उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है। मंडी में अनाज बेचने के लिए आने वाले किसानों के लिए प्रतीक्षालय व विश्राम गृह की कोई व्यवस्था नहीं है, इस कारण किसानों को घंटों धूप में खड़ा रहना पड़ता है। गर्मी व धूप के कारण किसानों का बुरा हाल हो रहा है। किसान संगठन कई बार मंडी में किसान प्रतीक्षालय उपलब्ध कराने की मांग कर चुके है, लेकिन कोई फायदा नहीं है।
स्थायी कैंटीन में खुला कार्यालय
कृषक विश्राम गृह की तरह स्थायी कैंटीन हाल का भी यही हाल है। किसानों को खान-पान की सामग्री उपलब्ध कराने के लिए खान-पान गृह के नाम से स्थाई कैंटीन हाल का निर्माण कराया गया था। इस खान-पान गृह में ज्येष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक का कार्यालय स्थापित करा दिया गया है। स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि इस कार्यालय में हमेशा ताला डला रहता है, कार्यालय का कोई उपयोग नहीं होता है।
प्रकाश की भी नहीं है कोई खास व्यवस्था
कई एकड़ क्षेत्र में फैली गल्ला मंडी में प्रकाश के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं है। शाम होते ही मंडी परिसर में अंधेरा छा जाता है। खंभों पर स्ट्रीट लाइट तो लगी है, पर सभी चालू हालत में नहीं है। परिसर में तीन हाई मास्ट लाइट लगाई गई हैं, जिनमें से मात्र एक हाईमास्ट लाइट चालू हालत में है। अंधेरे के कारण किसानों व स्थानीय व्यापारियों को काफी समस्या होती है और आराजकतत्व व चोर अंधेरे का फायदा उठाने से नहीं चूकते हैं।
पेयजल व शौचालय की उच्च व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों व व्यापारियों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। पेयजल के बिना इस भीषण गर्मी में बुरा हाल हो रहा है।
- विनय कुमार जैन
गल्ला व्यापारी
प्रकाश की व्यवस्था नहीं होने के कारण व्यापारी असुरक्षित महसूस करते हैं। आराजकतत्व अंधेरे का फायदा उठाते हैं व चोरी की घटनाओं को अंजाम देते हैं। तीन हाईमास्ट लाइट में से मात्र एक लाइट चालू है।
- रामस्वरुप साहू
गल्ला व्यापारी
प्रतीक्षायल कक्ष में ताला डला होने के कारण किसानों को काफी परेशानी हो रही है। इतनी कड़ी धूप में सभी का बुरा हाल हो रहा है। किसानों को होने वाली समस्या पर प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
- चतुर्भुज पाठक, ग्राम कल्यानपुरा किसान
पानी पीने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, व्यापारियों से होटल वालों से पानी मांगकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
- पंचम, ग्राम निवाहो किसान
जब ठेकेदार मिलेगा तो नया शौचालय शुरू कर दिया जाएगा। अभी पुराने शौचालय से काम चलाया जा रहा है। मंडी परिसर में प्रतीक्षालय नहीं है।
- अनिल कुमार, मंडी संचिव