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पानी के अभ्ााव में सूखे रह गए जखौरा ब्लाक के तालाब
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 26 May 2016 01:29 AM IST
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drought, lalitpur news
- फोटो : demo
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ललितपुर। सूखे से निपटने में मौजूदा हालात प्रशासन के लिए खलनायक साबित हो रहे हैं। शासन ने मवेशियों को पीने के पानी का इंतजाम कराने के मकसद से तालाबों को भरने के निर्देश दिए हैं, लेकिन पानी के अभाव में अधिकांश तालाब भरे नहीं जा सके हैं। जखौरा ब्लाक में 67 में से सिर्फ 16 तालाब ही पानी से भर पाए हैं।
बरसात के सीजन में औसत से कम बारिश होने की वजह से अधिकांश नदी, तालाब व पोखर भर नहीं पाए थे। जो अब पूरी तरह खाली हो गए हैं, जिससे मवेशियों के सामने पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गई है। इसके अलावा मत्स्य पालन को भी झटका लगा है। शासन ने खाली तालाबों को पानी से भरने के निर्देश जारी किए हैं। जिला प्रशासन द्वारा इसके अनुपालन में खाली तालाबों को भरने के प्रयास किए गए। लेकिन, पानी की कमी खल रही है। ब्लाक जखौरा अंतर्गत 67 तालाब हैं, इनमें से 16 तालाबों में पानी का इंतजाम हो पाया है। अवशेष 51 तालाब खाली के खाली रह गए हैं। ब्लाक अंतर्गत 33 ग्राम ऐसे हैं, जिनमें तालाब ही नहीं हैं।
टैंकर जलापूर्ति को सुचारु बनाने में भी कार्यदायी संस्था को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। काफी दूर से टैंकर भरे जा रहे हैं, तब जाकर लोगों की प्यास बुझ पा रही है। इससे जखौरा ब्लाक के हालातों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। जिलाधिकारी डा. रूपेश कुमार ने तालाब भरे व खाली होने की सूचना तलब की है, जिसके क्रम में एडीओ पंचायत सूचना संकलित करने में जुटे हैं।
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13 हजार परिवारों के सामने पेयजल संकट
विकासखंड जखौरा की 72,826 आबादी में से 13,490 परिवार पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। ब्लाक अंतर्गत 846 हैंडपंप लगे हैं, इनमें से 467 हैंडपंप पानी दे रहे हैं। 16 हैंडपंप मरम्मत व 309 हैंडपंप रीबोर की श्रेणी में आ गए हैं। जल निगम ने इस स्थिति से निपटने के लिए 145 हैंडपंप रीबोर कराए हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित गांव
ग्राम करगन में 36 में से 20 हैंडपंप, मैनवारा में 25 में से 15 हैंडपंप, राखपंचमपुर में 28 में से 21 हैंडपंप, छिपाई में 22 में से 20 हैंडपंप, आलापुर में 21 में से 13 हैंडपंप, बांसी में 97 में से 42 हैंडपंप, रायपुर में 26 में से 24 हैंडपंप और रघुनाथपुरा में 39 में से 21 हैंडपंप पानी कम देने लगे हैं। इन ग्रामों में टैंकर से जलापूर्ति हो रही है।
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बरसात के सीजन में औसत से कम बारिश होने की वजह से अधिकांश नदी, तालाब व पोखर भर नहीं पाए थे। जो अब पूरी तरह खाली हो गए हैं, जिससे मवेशियों के सामने पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गई है। इसके अलावा मत्स्य पालन को भी झटका लगा है। शासन ने खाली तालाबों को पानी से भरने के निर्देश जारी किए हैं। जिला प्रशासन द्वारा इसके अनुपालन में खाली तालाबों को भरने के प्रयास किए गए। लेकिन, पानी की कमी खल रही है। ब्लाक जखौरा अंतर्गत 67 तालाब हैं, इनमें से 16 तालाबों में पानी का इंतजाम हो पाया है। अवशेष 51 तालाब खाली के खाली रह गए हैं। ब्लाक अंतर्गत 33 ग्राम ऐसे हैं, जिनमें तालाब ही नहीं हैं।
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टैंकर जलापूर्ति को सुचारु बनाने में भी कार्यदायी संस्था को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। काफी दूर से टैंकर भरे जा रहे हैं, तब जाकर लोगों की प्यास बुझ पा रही है। इससे जखौरा ब्लाक के हालातों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। जिलाधिकारी डा. रूपेश कुमार ने तालाब भरे व खाली होने की सूचना तलब की है, जिसके क्रम में एडीओ पंचायत सूचना संकलित करने में जुटे हैं।
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13 हजार परिवारों के सामने पेयजल संकट
विकासखंड जखौरा की 72,826 आबादी में से 13,490 परिवार पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। ब्लाक अंतर्गत 846 हैंडपंप लगे हैं, इनमें से 467 हैंडपंप पानी दे रहे हैं। 16 हैंडपंप मरम्मत व 309 हैंडपंप रीबोर की श्रेणी में आ गए हैं। जल निगम ने इस स्थिति से निपटने के लिए 145 हैंडपंप रीबोर कराए हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित गांव
ग्राम करगन में 36 में से 20 हैंडपंप, मैनवारा में 25 में से 15 हैंडपंप, राखपंचमपुर में 28 में से 21 हैंडपंप, छिपाई में 22 में से 20 हैंडपंप, आलापुर में 21 में से 13 हैंडपंप, बांसी में 97 में से 42 हैंडपंप, रायपुर में 26 में से 24 हैंडपंप और रघुनाथपुरा में 39 में से 21 हैंडपंप पानी कम देने लगे हैं। इन ग्रामों में टैंकर से जलापूर्ति हो रही है।