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केंद्रीय मंत्री के गांव में चलना दुश्वार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 01 Aug 2016 12:19 AM IST
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village pwa, lalitpur news
- फोटो : amar ujala, lalitpur news
तालबेहट (ललितपुर)। क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री उमा भारती के गोद लिए आदर्श गांव पवा जाने के दोनों रास्तों की काफी बुरी स्थिति है। रास्ताें पर पैदल चलना भी मुसीबत भरा है।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री व क्षेत्रीय सांसद उमा भारती ने विकास खंड तालबेहट के ग्राम पवा को सांसद आदर्श ग्राम के तहत गोद लिया था।
अपने पहले ही दौरे में ग्रामीणों के सामने उन्होंने गांव के विकास का इतना ताना बना सुनाया था कि गांव वालों के मन में विश्वास हो गया था कि कुछ ही समय में उनके गांव में शहरों जैसी सुविधाएं हो जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि आदर्श ग्राम चयनित होने के बाद पवा की हालत पहले से बदतर हो गई।
उन्होंने बताया कि गांव में न तो मॉडल स्कूल खुल सका और न ही शराब बंदी हो सकी। तालाबों को भरने के लिए नहरें बनना तो दूर उसकी कार्ययोजना तक स्वीकृत न हो सकी। गांव में जाने के लिए कड़ेसराकलां और टेकरी के पास से रास्ते है। सबसे अधिक परेशानी ग्रामीणों को आवागमन की झेलना पड़ रही है।
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गांव में सिद्व जैन मंदिर होने के कारण बाहर से लोग आते रहते है। गांव के रास्तों की इतनी बुरी स्थिति है कि उन पर पैदल चलना मुश्किल भरा होता है। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री व क्षेत्रीय सांसद उमा भारती ने विकास खंड तालबेहट के ग्राम पवा को सांसद आदर्श ग्राम के तहत गोद लिया था।
अपने पहले ही दौरे में ग्रामीणों के सामने उन्होंने गांव के विकास का इतना ताना बना सुनाया था कि गांव वालों के मन में विश्वास हो गया था कि कुछ ही समय में उनके गांव में शहरों जैसी सुविधाएं हो जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि आदर्श ग्राम चयनित होने के बाद पवा की हालत पहले से बदतर हो गई।
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उन्होंने बताया कि गांव में न तो मॉडल स्कूल खुल सका और न ही शराब बंदी हो सकी। तालाबों को भरने के लिए नहरें बनना तो दूर उसकी कार्ययोजना तक स्वीकृत न हो सकी। गांव में जाने के लिए कड़ेसराकलां और टेकरी के पास से रास्ते है। सबसे अधिक परेशानी ग्रामीणों को आवागमन की झेलना पड़ रही है।
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गांव में सिद्व जैन मंदिर होने के कारण बाहर से लोग आते रहते है। गांव के रास्तों की इतनी बुरी स्थिति है कि उन पर पैदल चलना मुश्किल भरा होता है। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।