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शाकाहार : सेहत से संवेदना तक, बदल रही है दुनिया की थाली
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ललितपुर। भोजन केवल शरीर की आवश्यकता पूरी करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवन-दृष्टि, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति दृष्टिकोण को भी प्रभावित करता है। जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, असंतुलित खान-पान और पर्यावरणीय चुनौतियों के दौर में शाकाहार पर चर्चा केवल खान-पान की पसंद तक सीमित नहीं रह गई है। स्वस्थ आहार में विविधता, संतुलन, पर्याप्तता और संयम को महत्वपूर्ण माना जाता है। साबुत अनाज, दालें, फल और सब्जियां जैसे पौध-आधारित खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विश्व शाकाहार दिवस पर शाकाहार के स्वास्थ्य, नैतिक, पर्यावरणीय और जीव-संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जैन मुनियों और प्रबुद्ध वर्ग से हुई बातचीत के अंश...
‘शाकाहार से जीवन में आती है सात्विकता’
फोटो-19
भारतीय संस्कृति में शाकाहार को सर्वोत्तम आहार माना गया है। शाकाहार शरीर को निरोग रखने के साथ जीवन को भी श्रेष्ठ बनाता है। इससे मन और बुद्धि निर्मल व पवित्र बनते हैं। जीवन सात्विकता के कारण सरलता और सहजता का पर्याय बन जाता है। शाकाहार नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक उन्नति की ओर प्रवृत्त करता है।”
—मुनि मंगलानंद महाराज, प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़ में चातुर्मासरत
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‘स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक’
फोटो-20
शाकाहार स्वस्थ जीवनशैली प्रदान करता है। यह पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है। आपसी प्रेम और मैत्री भाव बढ़ाने के साथ दूसरे के दुख को समझने की मानवीय प्रवृत्ति का विकास करता है। इससे क्षमा आदि श्रेष्ठ गुणों का विकास होता है। शाकाहार शक्ति, बुद्धि और स्वास्थ्य प्रदान करता है।
—मुनि विकौशल सागर महाराज, महरौनी में चातुर्मासरत
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‘स्वास्थ्य, अहिंसा और पर्यावरण तीनों से जुड़ा’
फोटो-21
शाकाहार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें स्वास्थ्य, अहिंसा और पर्यावरण तीनों विमर्श एक साथ जुड़ते हैं। अमेरिकन डाइटेटिक एसोसिएशन और कनाडा के आहारविदों के अनुसार, अच्छी तरह से योजनाबद्ध शाकाहारी आहार जीवन के सभी चरणों में पर्याप्त पोषक और स्वास्थ्यप्रद हो सकता है तथा कुछ बीमारियों की रोकथाम और उपचार में स्वास्थ्य लाभ दे सकता है।
—डॉ. सुनील जैन ‘संचय’, निदेशक, उत्कर्ष समूह भारत
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जीवों के प्रति संवेदना और सह-अस्तित्व जरूरी
फोटो-22
शाकाहार की चर्चा को केवल मनुष्य के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसका सीधा संबंध जीव-जगत और पर्यावरण के संरक्षण से भी है। पशु-पक्षियों और अन्य जीवों के संरक्षण के लिए केवल कानून और संस्थागत प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समाज में जीवों के प्रति संवेदना, दया और सह-अस्तित्व की भावना विकसित करना भी आवश्यक है।
पुष्पेंद्र सिंह चौहान, अध्यक्ष, मानव ऑर्गेनाइजेशन एवं पर्यावरणविद
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मांसाहार के नुकसान पर भी चर्चा जरूरी
फोटो-23
मांसाहार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इससे शरीर के विभिन्न अंगों और प्रणालियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह मनुष्य में तामसिक प्रवृत्तियां बढ़ाता है। प्रकृति ने मनुष्य को शाकाहारी बनाया है, जो उसकी शारीरिक रचना और पाचन तंत्र से सिद्ध होता है।
—कृष्णकांत रावत, शिक्षक
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संतुलित शाकाहारी आहार में जरूरी पोषक तत्व
फोटो-24
संतुलित शाकाहारी आहार में प्रोटीन, विटामिन और खनिज जैसे आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में लिए जा सकते हैं। सामान्यतः ऐसे आहार में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक तथा संतृप्त वसा कम हो सकती है। उचित संतुलन के साथ शाकाहारी आहार हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे रोगों के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।
—देवीशंकर कुशवाहा, शिक्षक
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‘शाकाहार से जीवन में आती है सात्विकता’
फोटो-19
भारतीय संस्कृति में शाकाहार को सर्वोत्तम आहार माना गया है। शाकाहार शरीर को निरोग रखने के साथ जीवन को भी श्रेष्ठ बनाता है। इससे मन और बुद्धि निर्मल व पवित्र बनते हैं। जीवन सात्विकता के कारण सरलता और सहजता का पर्याय बन जाता है। शाकाहार नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक उन्नति की ओर प्रवृत्त करता है।”
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—मुनि मंगलानंद महाराज, प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़ में चातुर्मासरत
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‘स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक’
फोटो-20
शाकाहार स्वस्थ जीवनशैली प्रदान करता है। यह पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है। आपसी प्रेम और मैत्री भाव बढ़ाने के साथ दूसरे के दुख को समझने की मानवीय प्रवृत्ति का विकास करता है। इससे क्षमा आदि श्रेष्ठ गुणों का विकास होता है। शाकाहार शक्ति, बुद्धि और स्वास्थ्य प्रदान करता है।
—मुनि विकौशल सागर महाराज, महरौनी में चातुर्मासरत
‘स्वास्थ्य, अहिंसा और पर्यावरण तीनों से जुड़ा’
फोटो-21
शाकाहार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें स्वास्थ्य, अहिंसा और पर्यावरण तीनों विमर्श एक साथ जुड़ते हैं। अमेरिकन डाइटेटिक एसोसिएशन और कनाडा के आहारविदों के अनुसार, अच्छी तरह से योजनाबद्ध शाकाहारी आहार जीवन के सभी चरणों में पर्याप्त पोषक और स्वास्थ्यप्रद हो सकता है तथा कुछ बीमारियों की रोकथाम और उपचार में स्वास्थ्य लाभ दे सकता है।
—डॉ. सुनील जैन ‘संचय’, निदेशक, उत्कर्ष समूह भारत
जीवों के प्रति संवेदना और सह-अस्तित्व जरूरी
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शाकाहार की चर्चा को केवल मनुष्य के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसका सीधा संबंध जीव-जगत और पर्यावरण के संरक्षण से भी है। पशु-पक्षियों और अन्य जीवों के संरक्षण के लिए केवल कानून और संस्थागत प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समाज में जीवों के प्रति संवेदना, दया और सह-अस्तित्व की भावना विकसित करना भी आवश्यक है।
पुष्पेंद्र सिंह चौहान, अध्यक्ष, मानव ऑर्गेनाइजेशन एवं पर्यावरणविद
मांसाहार के नुकसान पर भी चर्चा जरूरी
फोटो-23
मांसाहार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इससे शरीर के विभिन्न अंगों और प्रणालियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह मनुष्य में तामसिक प्रवृत्तियां बढ़ाता है। प्रकृति ने मनुष्य को शाकाहारी बनाया है, जो उसकी शारीरिक रचना और पाचन तंत्र से सिद्ध होता है।
—कृष्णकांत रावत, शिक्षक
संतुलित शाकाहारी आहार में जरूरी पोषक तत्व
फोटो-24
संतुलित शाकाहारी आहार में प्रोटीन, विटामिन और खनिज जैसे आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में लिए जा सकते हैं। सामान्यतः ऐसे आहार में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक तथा संतृप्त वसा कम हो सकती है। उचित संतुलन के साथ शाकाहारी आहार हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे रोगों के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।
—देवीशंकर कुशवाहा, शिक्षक