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Lalitpur News: बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण जरूरी
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ललितपुर। विश्व जूनोज़ दिवस पर बुधवार को जूम मीटिंग का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. इम्तियाज अहमद ने जूनोटिक बीमारियां जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, टीबी, स्क्रब टायफस, लेप्टो स्पायरोसिस, रेबीज आदि रोगों की जानकारी दी। साथ ही इन बीमारियों से बचने के उपाय भी बताए। इसके साथ ही चिकित्साधिकारी, सीएचओ, फार्मासिस्ट, स्टॉफ नर्स का संवेदीकरण किया गया।
बताया कि ज्यादातर लोग उक्त बीमारियों की तरफ ध्यान नहीं देते हैं। जिसके चलते सभी को ध्यान में रखकर ब्लॉक स्तरीय चिकित्सा कर्मचारियों के साथ, सीएचओ, स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को जागरूक कर ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार किया जा रहा है। बताया कि जल्द ही पशु चिकित्सा विभाग की तरफ से पशुओं के टीकाकरण के लिए जिले में अभियान चलाया जाएगा। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ आरएन सोनी ने बताया कि टीबी का उन्मूलन 2025 तक करने के शासन से प्राप्त हुए हैं। महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ देशराज ने बताया कि 6 जुलाई 1885 को पहला रेबीज का टीका लगाया गया था।
ये है जूनोटिक रोग
रेबीज, स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू, इबोला, निपाह, सार्स, मंकीपॉक्स आदि जो संक्रमित जानवर से संपर्क में आने से बीमारी फैलती हैं।
ऐसे होगा बचाव
संक्रमित जानवरों के बाड़े की समुचित साफ सफाई, उत्सर्जित मलमूत्र का उचित निस्तारण, दूषित मांस और अन्य उत्पादों के सेवन से परहेज, पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण, पशु चिकित्सकों से पालतू पशुओं की नियमित जांच शामिल है।
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बताया कि ज्यादातर लोग उक्त बीमारियों की तरफ ध्यान नहीं देते हैं। जिसके चलते सभी को ध्यान में रखकर ब्लॉक स्तरीय चिकित्सा कर्मचारियों के साथ, सीएचओ, स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को जागरूक कर ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार किया जा रहा है। बताया कि जल्द ही पशु चिकित्सा विभाग की तरफ से पशुओं के टीकाकरण के लिए जिले में अभियान चलाया जाएगा। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ आरएन सोनी ने बताया कि टीबी का उन्मूलन 2025 तक करने के शासन से प्राप्त हुए हैं। महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ देशराज ने बताया कि 6 जुलाई 1885 को पहला रेबीज का टीका लगाया गया था।
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ये है जूनोटिक रोग
रेबीज, स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू, इबोला, निपाह, सार्स, मंकीपॉक्स आदि जो संक्रमित जानवर से संपर्क में आने से बीमारी फैलती हैं।
ऐसे होगा बचाव
संक्रमित जानवरों के बाड़े की समुचित साफ सफाई, उत्सर्जित मलमूत्र का उचित निस्तारण, दूषित मांस और अन्य उत्पादों के सेवन से परहेज, पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण, पशु चिकित्सकों से पालतू पशुओं की नियमित जांच शामिल है।
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