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परफ्यूम, सेंट और मच्छरमार चीजों का सोच-समझ कर करें इस्तेमाल: डॉ विनीता
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संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट। राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन राजकीय महाविद्यालय में चल रहे राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर में मुख्य वक्ता डॉ. विनीता अहिरवार ने आंतरिक प्रदूषण को मानव जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।
शिवरार्थियों ने आंगनबाड़ी केंद्र में जाकर प्री स्कूल के छात्र छात्राओं को पढ़ाया और गांव में कुपोषित बच्चों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने टोली बनाकर घर-घर जाकर लोगों को संक्रामक बीमारियों एवं उनकी रोकथाम के बारे में बताया। आसपास के वातावरण को साफ सुथरा रखने एवं नियमित विद्यालय भेजने की बात कही। महिलाओं में खून की कमी से होने वाले एनीमिया रोग से निजात के लिए पौष्टिक भोजन करने का आह्वान किया।
इधर, विचार गोष्ठी में प्राचार्या डॉ. रीना वालिया ने कहा कि आज के युग में सौंदर्य सामग्री का उपयोग सोच समझ कर करें, क्योंकि इसमें पाए जाने वाले हानिकारक तत्व मानव शरीर के लिए खतरा हैं। मुख्य वक्ता डॉ. विनीता अहिरवार ने कहा कि घर के अंदर उपयोग में लाई जाने वाली चीजें जैसे परफ्यूम, सेंट, अगरबत्ती, तेल, मच्छरमार दवा आदि से उत्पन्न होने वाली खुशबू में कुछ ऐसी हानिकारक गैसें होती हैं जो मानव के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। हमें अब आंतरिक प्रदूषण से बचना होगा। घरों में विशेष प्रकार के पौधे लगाना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेंद्र कुमार व कार्यक्रम अधिकारी गजेंद्र नाथ ने आभार व्यक्त किया। इस मौके हिमांशु राज, सोनू, काली, दिलीप, नीतेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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तालबेहट। राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन राजकीय महाविद्यालय में चल रहे राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर में मुख्य वक्ता डॉ. विनीता अहिरवार ने आंतरिक प्रदूषण को मानव जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।
शिवरार्थियों ने आंगनबाड़ी केंद्र में जाकर प्री स्कूल के छात्र छात्राओं को पढ़ाया और गांव में कुपोषित बच्चों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने टोली बनाकर घर-घर जाकर लोगों को संक्रामक बीमारियों एवं उनकी रोकथाम के बारे में बताया। आसपास के वातावरण को साफ सुथरा रखने एवं नियमित विद्यालय भेजने की बात कही। महिलाओं में खून की कमी से होने वाले एनीमिया रोग से निजात के लिए पौष्टिक भोजन करने का आह्वान किया।
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इधर, विचार गोष्ठी में प्राचार्या डॉ. रीना वालिया ने कहा कि आज के युग में सौंदर्य सामग्री का उपयोग सोच समझ कर करें, क्योंकि इसमें पाए जाने वाले हानिकारक तत्व मानव शरीर के लिए खतरा हैं। मुख्य वक्ता डॉ. विनीता अहिरवार ने कहा कि घर के अंदर उपयोग में लाई जाने वाली चीजें जैसे परफ्यूम, सेंट, अगरबत्ती, तेल, मच्छरमार दवा आदि से उत्पन्न होने वाली खुशबू में कुछ ऐसी हानिकारक गैसें होती हैं जो मानव के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। हमें अब आंतरिक प्रदूषण से बचना होगा। घरों में विशेष प्रकार के पौधे लगाना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेंद्र कुमार व कार्यक्रम अधिकारी गजेंद्र नाथ ने आभार व्यक्त किया। इस मौके हिमांशु राज, सोनू, काली, दिलीप, नीतेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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