{"_id":"582dffe64f1c1b39298ff692","slug":"two-affidavits-we-are-not-criminals","type":"story","status":"publish","title_hn":"शपथ पत्र दो, हम नहीं हैं अपराधी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शपथ पत्र दो, हम नहीं हैं अपराधी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Nov 2016 12:37 AM IST
विज्ञापन
police, lalitpur news
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेसिक शिक्षा विभाग में अब सभी प्रकार की नियुक्तियों में पुलिस सत्यापन कराया जाएगा। चयनितों को शपथ पत्र देना होगा कि वह अपराधी नहीं हैं।
विभिन्न विभागों की भर्तियों में नियुक्ति से पूर्व चयनित अभ्यर्थियों का पुलिस सत्यापन कराया जाता है पर बेसिक शिक्षा विभाग ऐसा नहीं होता है। जिस कारण शिक्षा जैसे पवित्र पेशे में अपराधी किस्म के व्यक्तियों का प्रवेश होने लगा है। बीते सालों में ऐसा ही एक मामला ललितपुर में उजागर हुआ था। यहां एक शिक्षक जाली दस्तावेज के सहारे सालों काम करता रहा। इसी दौरान उसकी शिकायत हुई लेकिन साक्ष्यों के अभाव में प्रकरण टलता रहा।
तत्कालीन डीएम ने इसमें दिलचस्पी दिखाते हुए जांच कराने के निर्देश दिए। नतीजा यह हुआ था कि जो शिक्षक बना बैठा था, वास्तव में वह प्रमाण पत्र उसके थे ही नहीं। इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग की सभी प्रकार की भर्तियों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने से पुलिस सत्यापन कराने का निर्णय लिया है।
उत्तर प्रदेश के विशेष सचिव देव प्रताप सिंह ने शिक्षा निदेशक बेसिक को लिखे पत्र में कहा कि सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति से पूर्व शपथ पत्र देना होगा कि वह स्वयं पीओसीएसओ अधिनियम 2012 के अंतर्गत अपराधी नहीं हैं। यह आदेश बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सभी प्रकार की नियुक्तियों पर निर्गत होने की तिथि से प्रभावी माना जाएगा। इस कदम से अपराधियों को शिक्षा विभाग की नौकरी पाना आसान नहीं होगा।
विज्ञापन
बाल अधिकारों का हो सकेगा संरक्षण
बच्चों के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए बाल संरक्षण आयोग का गठन किया गया है। जिसके तहत स्कूलों में भयमुक्त वातावरण प्रदान किया जा रहा है पर अपराधी किस्म के व्यक्तियों की भर्ती होने से बाल अधिकारों को प्रभावी तरीके से लागू करना विभाग के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
विज्ञापन
विभिन्न विभागों की भर्तियों में नियुक्ति से पूर्व चयनित अभ्यर्थियों का पुलिस सत्यापन कराया जाता है पर बेसिक शिक्षा विभाग ऐसा नहीं होता है। जिस कारण शिक्षा जैसे पवित्र पेशे में अपराधी किस्म के व्यक्तियों का प्रवेश होने लगा है। बीते सालों में ऐसा ही एक मामला ललितपुर में उजागर हुआ था। यहां एक शिक्षक जाली दस्तावेज के सहारे सालों काम करता रहा। इसी दौरान उसकी शिकायत हुई लेकिन साक्ष्यों के अभाव में प्रकरण टलता रहा।
तत्कालीन डीएम ने इसमें दिलचस्पी दिखाते हुए जांच कराने के निर्देश दिए। नतीजा यह हुआ था कि जो शिक्षक बना बैठा था, वास्तव में वह प्रमाण पत्र उसके थे ही नहीं। इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग की सभी प्रकार की भर्तियों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने से पुलिस सत्यापन कराने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश के विशेष सचिव देव प्रताप सिंह ने शिक्षा निदेशक बेसिक को लिखे पत्र में कहा कि सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति से पूर्व शपथ पत्र देना होगा कि वह स्वयं पीओसीएसओ अधिनियम 2012 के अंतर्गत अपराधी नहीं हैं। यह आदेश बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सभी प्रकार की नियुक्तियों पर निर्गत होने की तिथि से प्रभावी माना जाएगा। इस कदम से अपराधियों को शिक्षा विभाग की नौकरी पाना आसान नहीं होगा।
विज्ञापन
बाल अधिकारों का हो सकेगा संरक्षण
बच्चों के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए बाल संरक्षण आयोग का गठन किया गया है। जिसके तहत स्कूलों में भयमुक्त वातावरण प्रदान किया जा रहा है पर अपराधी किस्म के व्यक्तियों की भर्ती होने से बाल अधिकारों को प्रभावी तरीके से लागू करना विभाग के लिए चुनौती बनता जा रहा है।