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आर्थिक तंगी से जूझ रहे आदिवासी रोजगार की तलाश में कर रहे पलायन
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रोड पर बैठे बस का इंतजार करते आदिवासी लोग
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर/महरौनी। महरौनी ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम करौंदा के एक दर्जन आदिवासी परिवार बच्चों समेत घर छोड़कर परदेश के लिए पलायन करने पर मजबूर हो गए। बता दें कि बृहस्पितवार की शाम करौंदा बस स्टैंड पर आदिवासी परिवार नौनिहाल बच्चों समेत बस में बैठकर रवाना होते हुए देखे गए। पलायन करने का कारण पूछे जाने पर अपनी पीड़ा बताते उनकी आंखे भर आईं। उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी के कारण परिवार का भरण-पोषण करने में उन्हें दिक्कत आ रही थी। कहा कि गांव में रोजगार नहीं मिलने पर दिल्ली व देश के अन्य बड़े शहरों में मजदूरी के लिए निकलना पड़ता है, जिससे परिवार व बच्चों का भरण-पोषण हो जाता है।
चेहरे पर बेबस मायूसी का दर्द झलक रहा था
गरीबी की मार झेल रहे आदिवासी बच्चों-महिलाओं के चेहरे पर बेबस मायूसी का दर्द छलक रहा था। गांव के आदिवासिओं की भोगौलिक स्थिति कागजों में तो तेजी से बदल रही है, लेकिन धरातलीय व्यवस्था कुछ और देखने को मिल रही है। जैसे दर्जनों की संख्या में दो जून की रोटी का बंदोबस्त करने की जुगत में बस में बैठकर पलायन कर गए लोग सारी कहानी बयां करते नजर आए।
ग्राम पंचायत में मनरेगा आर्थिक संकट से निजात नहीं दिला पा रहा है, जिसके चलते गांव के आदिवासी परिवारों को पलायन करना मजबूरी बन गई है -धनीराम सिंह राजपूत करौंदा।
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गांव में रोजगार नहीं मिलने से प्रति वर्ष की भांति इस बार पूरा परिवार दिल्ली के लिए मजदूरी करने चला गया। कोई रोजगार की व्यवस्था नहीं हो रही है। - रामदयाल सहरिया
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चेहरे पर बेबस मायूसी का दर्द झलक रहा था
गरीबी की मार झेल रहे आदिवासी बच्चों-महिलाओं के चेहरे पर बेबस मायूसी का दर्द छलक रहा था। गांव के आदिवासिओं की भोगौलिक स्थिति कागजों में तो तेजी से बदल रही है, लेकिन धरातलीय व्यवस्था कुछ और देखने को मिल रही है। जैसे दर्जनों की संख्या में दो जून की रोटी का बंदोबस्त करने की जुगत में बस में बैठकर पलायन कर गए लोग सारी कहानी बयां करते नजर आए।
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ग्राम पंचायत में मनरेगा आर्थिक संकट से निजात नहीं दिला पा रहा है, जिसके चलते गांव के आदिवासी परिवारों को पलायन करना मजबूरी बन गई है -धनीराम सिंह राजपूत करौंदा।
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गांव में रोजगार नहीं मिलने से प्रति वर्ष की भांति इस बार पूरा परिवार दिल्ली के लिए मजदूरी करने चला गया। कोई रोजगार की व्यवस्था नहीं हो रही है। - रामदयाल सहरिया

बस पर अपना अपना सामान रखते आदिवासी लोग- फोटो : LALITPUR