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Lalitpur News: पानी के अभाव में अटका रोडवेज डिपो का हस्तांतरण
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। रोडवेज डिपो बनकर तैयार है, लेकिन यहां पर्याप्त पानी न होने के कारण इसका हस्तातंरण नहीं किया जा रहा है। छह बोरिंग की गई, लेकिन उनमें पानी नहीं निकला। सातवीं बार जो बोरिंग की गई, उसमें बहुत ही कम पानी निकला, जो डिपो के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में अब पाइप के माध्यम से यहां पानी उपलब्ध कराने की योजना तैयार की जा रही है। इस प्रस्ताव को शासन स्तर पर स्वीकृति के लिए भेजा गया है।
वर्ष 2015 में रोडवेज डिपो की नींव रखी गई थी। उस समय इसकी लागत करीब पांच करोड़ रुपये आंकी जा रही थी। सात एकड़ में बनने वाले इस डिपो को नौ साल बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं किया जा सका। चूंकि यह कार्ययोजना समाजवादी पार्टी सरकार की थी, इसलिए वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार बनने पर अधिकारियों ने इस ओर विशेष ध्यान नहीं दिया और सालों तक इसका कार्य बंद रहा। इसके बाद जब शासन ने इधर ध्यान दिया तो स्टीमेट रिवाइज किया गया। अब इसकी लागत 11 करोड़ 50 लाख रुपये तक पहुंच गई है। यह बनकर तैयार हो गया है, लेकिन पर्याप्त पानी न होने के कारण डिपो को चालू नहीं किया जा रहा है। परिवहन विभाग ने इसे ठेकेदार से अपने अधीन नहीं लिया है। डिपो प्रारंभ न होने से लोगों को दूरस्थ जनपदों में जाने के लिए सीधे बसें नहीं मिलतीं।
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रोडवेज डिपो पर हो चुके हैं ये कार्य
डिपो पर प्रस्तावित मुख्य भवन का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके अलावा कार्यशाला, कैंटीन व टंकी भी तैयार हो चुकी है। पानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण इस डिपो का संचालन नहीं हो पा रहा है।
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ललितपुर डिपो के लिए पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव आया है, जल्द ही कार्ययोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी।
रामसिंह वर्मा, मुख्य परिवहन प्रबंधक।
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ललितपुर। रोडवेज डिपो बनकर तैयार है, लेकिन यहां पर्याप्त पानी न होने के कारण इसका हस्तातंरण नहीं किया जा रहा है। छह बोरिंग की गई, लेकिन उनमें पानी नहीं निकला। सातवीं बार जो बोरिंग की गई, उसमें बहुत ही कम पानी निकला, जो डिपो के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में अब पाइप के माध्यम से यहां पानी उपलब्ध कराने की योजना तैयार की जा रही है। इस प्रस्ताव को शासन स्तर पर स्वीकृति के लिए भेजा गया है।
वर्ष 2015 में रोडवेज डिपो की नींव रखी गई थी। उस समय इसकी लागत करीब पांच करोड़ रुपये आंकी जा रही थी। सात एकड़ में बनने वाले इस डिपो को नौ साल बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं किया जा सका। चूंकि यह कार्ययोजना समाजवादी पार्टी सरकार की थी, इसलिए वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार बनने पर अधिकारियों ने इस ओर विशेष ध्यान नहीं दिया और सालों तक इसका कार्य बंद रहा। इसके बाद जब शासन ने इधर ध्यान दिया तो स्टीमेट रिवाइज किया गया। अब इसकी लागत 11 करोड़ 50 लाख रुपये तक पहुंच गई है। यह बनकर तैयार हो गया है, लेकिन पर्याप्त पानी न होने के कारण डिपो को चालू नहीं किया जा रहा है। परिवहन विभाग ने इसे ठेकेदार से अपने अधीन नहीं लिया है। डिपो प्रारंभ न होने से लोगों को दूरस्थ जनपदों में जाने के लिए सीधे बसें नहीं मिलतीं।
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रोडवेज डिपो पर हो चुके हैं ये कार्य
डिपो पर प्रस्तावित मुख्य भवन का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके अलावा कार्यशाला, कैंटीन व टंकी भी तैयार हो चुकी है। पानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण इस डिपो का संचालन नहीं हो पा रहा है।
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ललितपुर डिपो के लिए पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव आया है, जल्द ही कार्ययोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी।
रामसिंह वर्मा, मुख्य परिवहन प्रबंधक।