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खटारा बसें न बन जाएं हादसे का सबब

Sun, 27 Nov 2016 12:15 AM IST
lalitpur
lalitpur Updated Sun, 27 Nov 2016 12:15 AM IST
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traffic crisis
बस - फोटो : demo pic
यातायात माह के दौरान भी शहर में ट्रैफिक नियम के पालन की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। खटारा बसों में ओवरलोडिंग जोरों पर है। यहां तक कि छत और पायदान पर लटककर भी सफर किया जा रहा है। लेकिन न तो पुलिस को यह सब दिखाई दे रहा हैं और न ही परिवहन विभाग को।
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नवंबर माह को पुलिस महकमा यातायात माह के रूप में मनाता है। जनपद में एसपी ने कार्यक्रम का शुभारंभ कर दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के टिप्स दिए थे। यातायात पुलिस ने भी सुधार का संकल्प लिया था। इन कवायदों के बाद भी कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है। अभी भी नगर सहित ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाली सड़कों पर बसों का मौत का सफर जारी हैं। बसों के भीतर तो खचाखच यात्री भरे ही रहते हैं। साथ ही बस की छत पर यात्रियों को बिठाकर सफर कराया जाता है। नियमानुसार एक बस के भीतर सिर्फ साठ यात्रियों को ही सफर कराया जा सकता है, लेकिन यह संख्या से दूने लोगों को सफर कराया जाता हैं।
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इतना ही नहीं सड़कों पर खटारा बसों को भी आसानी से देखा जा सकता हैं। खिड़कियां टूटी हैं। हेडलाईट तो जलती हैं परंतु बैक लाइटें बंद पड़ी हुई हैं। इंडीकेटर तो नजर भी नहीं आते हैं। अंदर की स्थिति भी इससे जुदा नहीं है। हिलती हुई फटी सीटों पर बैठकर यात्रियों को सफर तय करना होता है। मशीनरी और टायर कब दगा दे जाए, इसका भी कोई भरोसा नहीं होता है। वहीं, दुपहिया वाहनों पर तीन तीन सवारी का बैठना आम है। हेलमेट पर दुपहिया वाहन चालक विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा तिपहिया वाहनों में जमकर ओवरलोडिंग हो रही हैं। निर्धारित तीन के बजाय इससे कहीं अधिक सवारियों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जा रहा हैं। स्कूली ऑटो भी मनमानी पर उतारू हैं। इनमें निर्धारित छह की बजाय दर्जन भर से ज्यादा तक बच्चे ढोये जा रहे हैं। पुलिस महकमे के आला अधिकारियों के साथ सिपाहियों तक को यह नियम मालूम है, बावजूद इसके यातायात नियमों की बेखौफ हो धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
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चकाचौंध से होती हैं दुर्घटनाएं
रात के समय वाहनों की हेडलाइट दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं। वजह हैं हेडलाइटों पर काली पट्टी का नहीं होना। लाइटों पर काली पट्टी नहीं होने से चकाचौंध के चलते वाहन चालकों को रात के समय सड़क पर वाहन चलाने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं। विपरित दिशा से आ रहे वाहनों की हेडलाइट से पड़ने वाली चकाचौंध के चलते वाहन चालक को सामने कुछ दिखाई नहीं देता हैं, जिसके कारण कई बार वाहन चालक सड़क की पटरी से उतर कर या तो गड्ढे में गिर जाते हैं या फिर किसी पेड़ से टकराकर हादसे का शिकार हो जाते हैं।


मार्ग पर बनाए जाएं स्पीड ब्रेकर
सिलावन (ललितपुर)। ललितपुर-महरौनी मार्ग पर निवासरत ग्रामीणों ने मार्ग पर स्पीड ब्रेकर बनवाए जाने की मांग करते हुए बताया कि उक्त मार्ग पर वाहन चालक काफी तेज गति के साथ वाहन चलाते हैं, जिसके चलते लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो गए हैं। कई तो असमय ही मौत के मुुंह में समा चुके हैं। पशुधन की हानि भी उठानी पड़ती हैं। उनका मानना हैं कि मार्ग पर स्थित प्रत्येक गांव में यदि स्पीड ब्रेकर बना दिए जाए तो वाहनों की गति में कुछ कमी आ जाएगी और इससे कुछ हद तक दुर्घटनाओं में कमी आ सकती हैं।


 
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