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Lalitpur News: पर्यटन विकास के लिए आए तीन करोड़ रुपये शासन को वापस
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। तीन पर्यटन विकास योजना के लिए शासन ने तीन करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। ग्राम गंगासागर स्थित सुमेध भूमि बुद्ध बिहार, अमझरा घाटी पर कबीर मंदिर का विकास होना था, लेकिन इनके निजी भूमि पर होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। वहीं, ग्राम बिजरौठा की प्राचीन बैठक की इमारत जीर्णशीर्ण होने के कारण वहां आसपास विकास नहीं किया गया।
यहां पर्यटन विकास के लिए कई योजनाएं शासन स्तर पर भेजी गई थीं, जिसमें कई परियोजनाओं को स्वीकृति मिल गई है। स्वीकृत तीन परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद विभाग ने कार्य कराने से इन्कार कर दिया और शासन को धनराशि वापस करने के लिए पत्राचार किया है। इनमें से दो परियोजनाएं निजी भूमि पर होने के कारण नहीं शुरू हो सकीं, इसमें बुद्ध बिहार व कबीर मंदिर शामिल है।
पुरातत्व विभाग की जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी इमारत के आसपास भी दुर्घटना की आशंका के चलते विकास कार्य न कराने का निर्णय लिया गया। इसके लिए आई धनराशि को वापस भेजते हुए चार नया प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें देवगढ़ स्थित प्राचीन शिव मंदिर, वनखंडी हनुमान मंदिर, कंचन घाट के पर्यटन विकास के साथ प्रमुख स्थानों पर साइनेज लगाने की कार्ययोजना शामिल है।
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निजी भूमि होने के कारण शासन से स्वीकृत धनराशि वापस भेजने के लिए प्रस्ताव किया है। साथ ही इसी धनराशि से चार कार्ययोजनाओं की स्वीकृति मांगी गई है।
हेमलता, जिला पर्यटन अधिकारी।
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ललितपुर। तीन पर्यटन विकास योजना के लिए शासन ने तीन करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। ग्राम गंगासागर स्थित सुमेध भूमि बुद्ध बिहार, अमझरा घाटी पर कबीर मंदिर का विकास होना था, लेकिन इनके निजी भूमि पर होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। वहीं, ग्राम बिजरौठा की प्राचीन बैठक की इमारत जीर्णशीर्ण होने के कारण वहां आसपास विकास नहीं किया गया।
यहां पर्यटन विकास के लिए कई योजनाएं शासन स्तर पर भेजी गई थीं, जिसमें कई परियोजनाओं को स्वीकृति मिल गई है। स्वीकृत तीन परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद विभाग ने कार्य कराने से इन्कार कर दिया और शासन को धनराशि वापस करने के लिए पत्राचार किया है। इनमें से दो परियोजनाएं निजी भूमि पर होने के कारण नहीं शुरू हो सकीं, इसमें बुद्ध बिहार व कबीर मंदिर शामिल है।
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पुरातत्व विभाग की जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी इमारत के आसपास भी दुर्घटना की आशंका के चलते विकास कार्य न कराने का निर्णय लिया गया। इसके लिए आई धनराशि को वापस भेजते हुए चार नया प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें देवगढ़ स्थित प्राचीन शिव मंदिर, वनखंडी हनुमान मंदिर, कंचन घाट के पर्यटन विकास के साथ प्रमुख स्थानों पर साइनेज लगाने की कार्ययोजना शामिल है।
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निजी भूमि होने के कारण शासन से स्वीकृत धनराशि वापस भेजने के लिए प्रस्ताव किया है। साथ ही इसी धनराशि से चार कार्ययोजनाओं की स्वीकृति मांगी गई है।
हेमलता, जिला पर्यटन अधिकारी।