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बस स्टैंड पर बारिश से बचने का नहीं कोई सहारा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 13 Jul 2016 01:50 AM IST
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bus stand , jhansi news
- फोटो : amar ujala, jhansi news
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ललितपुर। अंतरराज्यीय बस स्टैंड का दर्जा प्राप्त शहर के बस स्टैंड पर यात्रियों को बारिश से बचने की कोई व्यवस्था नहीं है। भीगने से खुद को बचाने के लिए लोगों को वहां बनी गुमटियों व खोखों का सहारा लेना पड़ता है।
शहर के बस स्टैंड को भले ही अंतर्राज्जीय बस स्टैंड का दर्जा प्राप्त है, लेकिन यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं का टोटा है। बस स्टैंड के नाम पर नगर पालिका ने यहां केवले सीमेंट का प्लेटफार्म बनवाया है, जहां पर बसें खड़ी होती हैं। इसके अलावा बस स्टैंड पर न तो प्रतीक्षालय है और न ही स्थाई दुकाने हैं। बस स्टेशन से प्रतिदिन 150 से अधिक निजी व सरकारी रोडवेज बसों का संचालन होता है।
वहीं, करीब एक हजार से अधिक यात्री प्रतिदिन यहां आते-जाते हैं। प्रतीक्षालय के अभाव में भीषण गर्मी व बारिश के मौसम में यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे अधिक समस्या महिलाओं व बच्चों को उठानी पड़ती है। बारिश से अपना बचाव करने के लिए वहां बनी गुमटियों व खोखों का सहारा लेना पड़ता है। काफी कोशिश के बावजूद भी वह और उनका सामान भीग ही जाता है।
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शहर का दुर्भाग्य, नहीं बन पा रहा प्रतीक्षालय
इसे शहर का दुर्भाग्य की कहेंगे कि यहां पर दो प्रतीक्षालयों की नींव डाली गई, पर उनका निर्माण पूर्ण नहीं हो सका है। पिछली नगर पालिका बोर्ड के कार्यकाल में इस बस स्टैंड का निर्माण कराया गया था, लेकिन किन्हीं करणों के चलते निर्माणधीन प्रतीक्षालय को अधर में ही छोड़ दिया गया था। इसके बाद वर्तमान वोर्ड द्वारा अपने चार वर्ष के कार्यकाल में बस स्टैंड की दुर्दशा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया और न ही इस मुददे को किसी जन प्रतिनिधि द्वारा सदन में उठाया गया है।
वहीं विगत सात माह पूर्व स्थानीय संसद उमा भारती ने भी नौ लाख रुपए की सांसद निधि से बस स्टैंड पर यात्री प्रतीक्षालय की नींव डाली गई थी और प्लर भी खड़े कर दिए गए थे, लेकिन इसके बाद आर्मी ने अड़ंगा लगा कर निर्माण कार्य रुकवा दिया था।
रक्षा विभाग से चल रहा जमीनी विवाद
बस स्टैंड के निर्माण के समय से ही नगर पालिका और रक्षा विभाग के बीच जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद है चल रहा है। जमीन से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर नगर पालिका उक्त जमीन पर अपने स्मामित्व का दावा करती है, लेकिन यहां पर किसी भी तरह का स्थायी निर्माण कराने के लिए रक्षा विभाग की एनओसी हासिल करना जरुरी है। वहीं, सांसद निधि से बनाए जा रहे प्रतीक्षालय भवन पर रोक लगाते हुए सेना के अफसरों ने भी शासनादेश का हवाला दिया है। शासनादेश में उल्लेख है कि एमईएस की जमीन की परिधि के 75 गज तक कोई निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता है।
सेना द्वारा निर्माण कार्य रुकवा देने के बाद जिलाधिकारी डा.रुपेश कुमार ने नगर पालिका से बस स्टैंड संबंधी कागज तलब करके, सांसद निधि से बनाए जा रहे प्रतीक्षालय के लिए रक्षा विभाग से एनओसी लेने के लिए रक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजा गया था। लेकिन रक्षा विभाग द्वारा अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। यदि प्रतीक्षालय के लिए रक्षा विभाग द्वारा एनओसी दे दी जाती है तो वहां शौचालय निर्माण का भी रास्ता साफ हो जाएगा, क्योकिं इस कार्ययोजना में प्रतीक्षालय, पानी प्याऊ व शौचालय बनाना प्रस्तावित है, प्याऊ का निर्माण पूर्ण हो चुका है।
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शहर के बस स्टैंड को भले ही अंतर्राज्जीय बस स्टैंड का दर्जा प्राप्त है, लेकिन यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं का टोटा है। बस स्टैंड के नाम पर नगर पालिका ने यहां केवले सीमेंट का प्लेटफार्म बनवाया है, जहां पर बसें खड़ी होती हैं। इसके अलावा बस स्टैंड पर न तो प्रतीक्षालय है और न ही स्थाई दुकाने हैं। बस स्टेशन से प्रतिदिन 150 से अधिक निजी व सरकारी रोडवेज बसों का संचालन होता है।
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वहीं, करीब एक हजार से अधिक यात्री प्रतिदिन यहां आते-जाते हैं। प्रतीक्षालय के अभाव में भीषण गर्मी व बारिश के मौसम में यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे अधिक समस्या महिलाओं व बच्चों को उठानी पड़ती है। बारिश से अपना बचाव करने के लिए वहां बनी गुमटियों व खोखों का सहारा लेना पड़ता है। काफी कोशिश के बावजूद भी वह और उनका सामान भीग ही जाता है।
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शहर का दुर्भाग्य, नहीं बन पा रहा प्रतीक्षालय
इसे शहर का दुर्भाग्य की कहेंगे कि यहां पर दो प्रतीक्षालयों की नींव डाली गई, पर उनका निर्माण पूर्ण नहीं हो सका है। पिछली नगर पालिका बोर्ड के कार्यकाल में इस बस स्टैंड का निर्माण कराया गया था, लेकिन किन्हीं करणों के चलते निर्माणधीन प्रतीक्षालय को अधर में ही छोड़ दिया गया था। इसके बाद वर्तमान वोर्ड द्वारा अपने चार वर्ष के कार्यकाल में बस स्टैंड की दुर्दशा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया और न ही इस मुददे को किसी जन प्रतिनिधि द्वारा सदन में उठाया गया है।
वहीं विगत सात माह पूर्व स्थानीय संसद उमा भारती ने भी नौ लाख रुपए की सांसद निधि से बस स्टैंड पर यात्री प्रतीक्षालय की नींव डाली गई थी और प्लर भी खड़े कर दिए गए थे, लेकिन इसके बाद आर्मी ने अड़ंगा लगा कर निर्माण कार्य रुकवा दिया था।
रक्षा विभाग से चल रहा जमीनी विवाद
बस स्टैंड के निर्माण के समय से ही नगर पालिका और रक्षा विभाग के बीच जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद है चल रहा है। जमीन से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर नगर पालिका उक्त जमीन पर अपने स्मामित्व का दावा करती है, लेकिन यहां पर किसी भी तरह का स्थायी निर्माण कराने के लिए रक्षा विभाग की एनओसी हासिल करना जरुरी है। वहीं, सांसद निधि से बनाए जा रहे प्रतीक्षालय भवन पर रोक लगाते हुए सेना के अफसरों ने भी शासनादेश का हवाला दिया है। शासनादेश में उल्लेख है कि एमईएस की जमीन की परिधि के 75 गज तक कोई निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता है।
सेना द्वारा निर्माण कार्य रुकवा देने के बाद जिलाधिकारी डा.रुपेश कुमार ने नगर पालिका से बस स्टैंड संबंधी कागज तलब करके, सांसद निधि से बनाए जा रहे प्रतीक्षालय के लिए रक्षा विभाग से एनओसी लेने के लिए रक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजा गया था। लेकिन रक्षा विभाग द्वारा अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। यदि प्रतीक्षालय के लिए रक्षा विभाग द्वारा एनओसी दे दी जाती है तो वहां शौचालय निर्माण का भी रास्ता साफ हो जाएगा, क्योकिं इस कार्ययोजना में प्रतीक्षालय, पानी प्याऊ व शौचालय बनाना प्रस्तावित है, प्याऊ का निर्माण पूर्ण हो चुका है।