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Lalitpur News: कुटुंब न्यायालय के भरण पोषण के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने माना सही

Fri, 13 Feb 2026 12:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 13 Feb 2026 12:03 AM IST
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The Supreme Court upheld the family court's maintenance decision.
संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। कुटुंब न्यायालय में पीड़िता ने पति से तलाक लेते हुए भरण पोषण दिलाए जाने की मांग उठाई थी। प्रधान न्यायाधीश नंदप्रताप ओझा ने 15 हजार रुपये की धनराशि प्रतिमाह देने का पति को आदेश जारी किया था। ऐसे में उसका पति इस आदेश के खिलाफ पहले हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट गया, दोनों ही जगह से अपील को खारिज कर दिया गया।

शहर के मोहल्ला सिविल लाइंस निवासी नाजिश बेगम ने एक प्रार्थनापत्र प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय के यहां 02 दिसंबर 2020 को दिया था। जिसमें उसने अपने पति सीहोर निवासी मुजफ्फरयार खां से भरण-पोषण की धनराशि की मांग उठाई थी। साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के पश्चात व आवेदिका की आर्थिक परिस्थिति को देखते हुए न्यायालय ने पति को सेवानिवृत्त के पहले वेतन का 25 प्रतिशत 20 हजार रुपये व 31 अक्तूबर 2024 से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन से 15 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता अदा करने का फैसला विगत दो जून 2025 को सुनाया था। कुटुंब न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ पति मुजफ्फयार खां ने हाईकोर्ट प्रयागराज में अपील की, लेकिन हाईकोर्ट ने पति की अपील को खारिज कर दिया। इसके बाद पति ने सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां पर कुटुंब न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। दोनों उच्च न्यायालय के निर्णय से पीड़िता को राहत मिली है। अब उसे घर चलाने के संघर्ष नहीं करना पड़ेगा।
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