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Lalitpur News: गोविंदसागर बांध की बाईं नहर नाले में तब्दील, गंदगी से निकलना मुश्किल
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। गोविंद सागर बांध से निकली बाईं नहर नाले में तब्दील हो गई है। यह नहर शहर के बीच में करीब तीन किलोमीटर तक फैली है। लोगों ने इसमें अपने घरों से निकलने वाले गंदे पानी के पाइप भी डाल दिए हैं। इससे शहर के बीचों बीच गंदगी फैल रही है।
यह नहर आजादपुरा व तुवन मोहल्ले से होकर गुजरती है। मोहल्ले वाले इसी नहर में कचरा भी डालते हैं। इससे गंदगी व बदबू के कारण राहगीरों को खासी परेशानी होती है। बरसात के दिनों में यह नहर उफना जाती है, जिससे इसका पानी घरों में घुस जाता है। प्रतिवर्ष इसकी सफाई में सिंचाई विभाग हजारों रुपये खर्च करता है, लेकिन इसकी हालत जस की तस बनी है। यही नहीं नहर की भूमि पर कई लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। सिंचाई विभाग इन कब्जों को हटवाने में रुचि नहीं दिखा रहा है। इस कारण नहर की दूसरी ओर की सड़क ही गायब हो गई है।
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बच्चों और जानवरों के गिरने का रहता खतरा
खुली नहर के किनारे रहने वाले परिवारों के बच्चों अथवा सड़क पर घूम रहे बच्चों के गिरने का खतरा बना रहता है। नहर गहरी होने के कारण यदि कोई बच्चा इसमें गिर गया तो उसे निकालना मुश्किल हो जाएगा। नहर किनारे एक परिषदीय स्कूल भी है, जिसमें छोटे बच्चे पढ़ने आते हैं।
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सिंचाई विभाग के प्रस्ताव को नहीं मिली शासन से मंजूरी
वर्ष 2019 में तीन किलोमीटर तक नहर को आरसीसी से ढंकने के लिए दो करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन शासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इसके पूर्व वर्ष 2015 में भी सिंचाई विभाग ने शहर में नहर की जगह पाइप लाइन बिछाने की कार्ययोजना तैयार करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन विभाग ने उसे भी मंजूरी नहीं दी।
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गोविंदसागर बांध की बाईं नहर को ढंकने व सौंदर्यीकरण की योजना तैयार करने के निर्देश सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दिए गए हैं। कार्ययोजना को शासन के पास भेजा जाएगा, जल्द नहर की बदली हुई तस्वीर दिखाई देगी।
अक्षय त्रिपाठी, जिलाधिकारी।
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ललितपुर। गोविंद सागर बांध से निकली बाईं नहर नाले में तब्दील हो गई है। यह नहर शहर के बीच में करीब तीन किलोमीटर तक फैली है। लोगों ने इसमें अपने घरों से निकलने वाले गंदे पानी के पाइप भी डाल दिए हैं। इससे शहर के बीचों बीच गंदगी फैल रही है।
यह नहर आजादपुरा व तुवन मोहल्ले से होकर गुजरती है। मोहल्ले वाले इसी नहर में कचरा भी डालते हैं। इससे गंदगी व बदबू के कारण राहगीरों को खासी परेशानी होती है। बरसात के दिनों में यह नहर उफना जाती है, जिससे इसका पानी घरों में घुस जाता है। प्रतिवर्ष इसकी सफाई में सिंचाई विभाग हजारों रुपये खर्च करता है, लेकिन इसकी हालत जस की तस बनी है। यही नहीं नहर की भूमि पर कई लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। सिंचाई विभाग इन कब्जों को हटवाने में रुचि नहीं दिखा रहा है। इस कारण नहर की दूसरी ओर की सड़क ही गायब हो गई है।
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बच्चों और जानवरों के गिरने का रहता खतरा
खुली नहर के किनारे रहने वाले परिवारों के बच्चों अथवा सड़क पर घूम रहे बच्चों के गिरने का खतरा बना रहता है। नहर गहरी होने के कारण यदि कोई बच्चा इसमें गिर गया तो उसे निकालना मुश्किल हो जाएगा। नहर किनारे एक परिषदीय स्कूल भी है, जिसमें छोटे बच्चे पढ़ने आते हैं।
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सिंचाई विभाग के प्रस्ताव को नहीं मिली शासन से मंजूरी
वर्ष 2019 में तीन किलोमीटर तक नहर को आरसीसी से ढंकने के लिए दो करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन शासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इसके पूर्व वर्ष 2015 में भी सिंचाई विभाग ने शहर में नहर की जगह पाइप लाइन बिछाने की कार्ययोजना तैयार करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन विभाग ने उसे भी मंजूरी नहीं दी।
गोविंदसागर बांध की बाईं नहर को ढंकने व सौंदर्यीकरण की योजना तैयार करने के निर्देश सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दिए गए हैं। कार्ययोजना को शासन के पास भेजा जाएगा, जल्द नहर की बदली हुई तस्वीर दिखाई देगी।
अक्षय त्रिपाठी, जिलाधिकारी।