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प्रशिक्षुयों को बताये तनावमुक्त रहने के उपाय
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डायट में हार्टफुलनेस ध्यान कार्यशाला में मौजूद प्रशिक्षु
- फोटो : LALITPUR
तनावरहित शिक्षण के लिए प्रशिक्षित किया
ललितपुर। जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में शिक्षक का प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षु छात्र-छात्राओं को आने वाले समय में बच्चों को पढ़ाने के दौरान तनाव न झेलना पड़े, इसके लिए ‘हार्टफुलनेस ध्यान’ कार्यशाला में प्रशिक्षण दिया गया। बताया गया कि ध्यान के अभ्यास से व्यवहार व सोच में स्थायी बदलाव आता है। यह बहुत सरल, आसान और प्रभावशाली तरीका है, जिसे आराम से अपने घर में बैठकर किया जा सकता है। विशेषज्ञ डॉ. जीएस त्रिपाठी ने बताया कि ध्यान करने से प्रशिक्षु अपने मन को एकाग्रचित्त करके पढ़ाई कर सकेंगे और तनावमुक्त होकर जीवन जी सकेंगे। कार्यशाला में डॉ. जीएस त्रिपाठी, अविनाश शुक्ला, स्मृति शुक्ला, एके शर्मा, गोपाल नारायण शुक्ला, रीतेश मिश्रा विशेषज्ञों की टीम ने डीएलएड प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया एवं उन्हें तनावमुक्त रहने के लिए ध्यान का महत्व बताया।
डायट प्राचार्य महाराज स्वामी ने कहा की युवाओं के लिए इस कार्यक्रम से आत्मिक ऊर्जा प्राप्त होगी और एकाग्रचित्त होने की क्षमता का विकास होगा। जो अध्ययनशील व्यक्ति, छात्र व शिक्षक के लिए आवश्यक है। मन की एकाग्रता और सकारात्मक विचार ही मन में जागृत हों तो व्यक्ति जीवन में अवश्य सफल होगा। मेडिटेशन का कार्यक्रम छात्र अध्यापकों के जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगा। तीन दिवसीय ध्यान कार्यशाला के समापन पर प्रभारी वरिष्ठ प्रवक्ता कीर्ति शुक्ला, प्रवक्ता संतोष कुमार सिंह, दीपक भारती, विवेक तिवारी सहित डीएलएड के प्रशिक्षु उपस्थित रहे।
क्या है हार्टफुलनेस ?
हार्टफुलनेस का अर्थ है कि अपनी वास्तविक प्रकृति की प्रसन्न और पुुलकित अवस्था को महसूस करना और उसे अपने ह्दय में अनुभव करना। जब हम अपने दिल की आवाज सुनकर अपनी अन्त:प्रेरणा का अनुसरण करते हैं तो अपने जीवन पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लेते हैं। ह्रदय पर ध्यान करके हम ‘मन और ह्रदय’ के बीच एकरूपता लाने का अभ्यास करते हैं।
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हार्टफुलनेस से तनावमुक्ति के उपाय
आराम से बैठ जाएं और हल्के से अपनी आंखें बंद कर लें। पैरों की अंगुलियों को घुमाएं। महसूस करें कि वे ढीली और तनावमुक्त हो रहीं हैं। टखनों और पंजों को ढीला छोड़ दें। महसूस करें कि धरती से ऊर्जा ऊपर की ओर जा रही है। पंजों से ऊपर घुटनों की ओर एवं पैरों को आराम पहुंचा रही हैं। जांघों का ढीला छोड़ दें। अब ऊर्जा घुटनों से ऊपर की ओर जा रही है। शांत भाव से बैठे रहें और धीरे से स्वयं में तल्लीन हो जाएं। जितनी देर आपका दिल चाहे, तल्लीनता की इस अवस्था में रमे रहें।
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ललितपुर। जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में शिक्षक का प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षु छात्र-छात्राओं को आने वाले समय में बच्चों को पढ़ाने के दौरान तनाव न झेलना पड़े, इसके लिए ‘हार्टफुलनेस ध्यान’ कार्यशाला में प्रशिक्षण दिया गया। बताया गया कि ध्यान के अभ्यास से व्यवहार व सोच में स्थायी बदलाव आता है। यह बहुत सरल, आसान और प्रभावशाली तरीका है, जिसे आराम से अपने घर में बैठकर किया जा सकता है। विशेषज्ञ डॉ. जीएस त्रिपाठी ने बताया कि ध्यान करने से प्रशिक्षु अपने मन को एकाग्रचित्त करके पढ़ाई कर सकेंगे और तनावमुक्त होकर जीवन जी सकेंगे। कार्यशाला में डॉ. जीएस त्रिपाठी, अविनाश शुक्ला, स्मृति शुक्ला, एके शर्मा, गोपाल नारायण शुक्ला, रीतेश मिश्रा विशेषज्ञों की टीम ने डीएलएड प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया एवं उन्हें तनावमुक्त रहने के लिए ध्यान का महत्व बताया।
डायट प्राचार्य महाराज स्वामी ने कहा की युवाओं के लिए इस कार्यक्रम से आत्मिक ऊर्जा प्राप्त होगी और एकाग्रचित्त होने की क्षमता का विकास होगा। जो अध्ययनशील व्यक्ति, छात्र व शिक्षक के लिए आवश्यक है। मन की एकाग्रता और सकारात्मक विचार ही मन में जागृत हों तो व्यक्ति जीवन में अवश्य सफल होगा। मेडिटेशन का कार्यक्रम छात्र अध्यापकों के जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगा। तीन दिवसीय ध्यान कार्यशाला के समापन पर प्रभारी वरिष्ठ प्रवक्ता कीर्ति शुक्ला, प्रवक्ता संतोष कुमार सिंह, दीपक भारती, विवेक तिवारी सहित डीएलएड के प्रशिक्षु उपस्थित रहे।
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क्या है हार्टफुलनेस ?
हार्टफुलनेस का अर्थ है कि अपनी वास्तविक प्रकृति की प्रसन्न और पुुलकित अवस्था को महसूस करना और उसे अपने ह्दय में अनुभव करना। जब हम अपने दिल की आवाज सुनकर अपनी अन्त:प्रेरणा का अनुसरण करते हैं तो अपने जीवन पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लेते हैं। ह्रदय पर ध्यान करके हम ‘मन और ह्रदय’ के बीच एकरूपता लाने का अभ्यास करते हैं।
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हार्टफुलनेस से तनावमुक्ति के उपाय
आराम से बैठ जाएं और हल्के से अपनी आंखें बंद कर लें। पैरों की अंगुलियों को घुमाएं। महसूस करें कि वे ढीली और तनावमुक्त हो रहीं हैं। टखनों और पंजों को ढीला छोड़ दें। महसूस करें कि धरती से ऊर्जा ऊपर की ओर जा रही है। पंजों से ऊपर घुटनों की ओर एवं पैरों को आराम पहुंचा रही हैं। जांघों का ढीला छोड़ दें। अब ऊर्जा घुटनों से ऊपर की ओर जा रही है। शांत भाव से बैठे रहें और धीरे से स्वयं में तल्लीन हो जाएं। जितनी देर आपका दिल चाहे, तल्लीनता की इस अवस्था में रमे रहें।