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अभियान के तीन माह बीते, कोई ध्यान नहीं
lalitpur
Updated Thu, 21 Jul 2016 01:20 AM IST
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तबेला
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। शहरी क्षेत्र में अवैध तरीके से संचालित हो रही दूध डेयरियों को शहर सीमा से बाहर करने के लिए शासन ने नगर पालिका के साथ जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को तीन माह की मोहलत दी थी, लेकिन इनको बाहर करना तो दूर सूची तक नहीं बन पाई है। सड़कों पर खुलेआम भैंसें बांधकर डेयरी संचालित की जा रही हैं।
नगर में एक हजार से अधिक आवारा घूमने वाले पशुओं ने स्थानीय लोगों व राहगीरों की नाक में दम करके रख दिया है। इन पशुओं के कारण वाहनों की टूट-फूट व राहगीरों का चोटिल होना आम बात हो गई है। यह आवारा पशु कई बार इंसानी मौत का भी कारण बन चुके हैं। आम तौर पर देखा गया है कि शहरी क्षेत्र में पशुपालन करने वाले लोग ही अपने पशुओं का दूध निकालकर उनको सड़कों पर आवारा छोड़ देते हैं। इन पशुओं में सबसे ज्यादा संख्या गायों की है। पशु तस्करों के भय से भैंसों को तबेले में सुरक्षित रखा जाता है।
नागरिकों को होने वाली इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव ने 20 अप्रैल को शासनादेश जारी कर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को तीन माह के भीतर शहर में आवारा घूम रहे पशुओं व डेयरियों को शहरी क्षेत्र से हटाने के निर्देश दिए थे। मंगवार को तीन माह का समय बीतने के बाद भी अब तक शहर में संचालित अवैध दूध डेयरियों व आवारा पशुओं के खिलाफ अभियान की शुरुआत तक नहीं की गई है। शहर में संचालित दूध डेयरियों व पशु पालकों का ब्यौरा जुटाने की जिम्मेदारी नगर पालिका को दी गई थी, लेकिन नगर पालिका द्वारा अब तक एक भी डेयरी व पशुपालकों को चिह्नित नहीं किया गया है। शासनादेश में कहा गया था कि यदि तीन माह के बाद शहर में एक भी आवारा पशु व अवैध डेयरी पाई जाती है प्रशासनिक अधिकारियों को दोषी माना जाएगा।
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समय सीमा समाप्त
इस अभियान को पूरा करने के लिए शासन द्वारा दी गई तीन माह की मोहलत तो समाप्त हो गई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते अब तक अभियान का श्रीगणेश नहीं हो सका है। शासनादेश के मुताबिक जिलाधिकारी को जांच अधिकारी समिति का गठन करना था। इस समिति का अध्यक्ष अपर जिलाधिकारी को व सदस्य अपर पुलिस अधीक्षक, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी व नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को नामित किया जाना था। उक्त जांच अधिकारी समिति द्वारा तीन माह तक चलाए जाने वाली अभियान की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जानी थी, लेकिन इस समिति का कोई अता-पता नहीं है। अभियान में सदर कोतवाल समेत अन्य पुलिस कर्मियों को भी अपने स्तर पर पूरा सहयोग करना था।
जांच अधिकारी समिति का गठन नहीं किया गया है। दूध डेयरियों की सूची बनाने की जिम्मेदारी संबंधित स्वास्थ्य नायकों को सौंपी गई थी। स्वास्थ्य नायकों पर पेंशन योजना व स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए जा रहे घरेलू शौचालयों के भौतिक सत्यापन का भी कार्य है, इसके बावजूद कुछ डेयरियों व पशुपालकों की सूची तैयार कर ली गई है। बाकी काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
राकेश कुमार
-नगर पालिका अधिशासी अधिकारी
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नगर में एक हजार से अधिक आवारा घूमने वाले पशुओं ने स्थानीय लोगों व राहगीरों की नाक में दम करके रख दिया है। इन पशुओं के कारण वाहनों की टूट-फूट व राहगीरों का चोटिल होना आम बात हो गई है। यह आवारा पशु कई बार इंसानी मौत का भी कारण बन चुके हैं। आम तौर पर देखा गया है कि शहरी क्षेत्र में पशुपालन करने वाले लोग ही अपने पशुओं का दूध निकालकर उनको सड़कों पर आवारा छोड़ देते हैं। इन पशुओं में सबसे ज्यादा संख्या गायों की है। पशु तस्करों के भय से भैंसों को तबेले में सुरक्षित रखा जाता है।
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नागरिकों को होने वाली इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव ने 20 अप्रैल को शासनादेश जारी कर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को तीन माह के भीतर शहर में आवारा घूम रहे पशुओं व डेयरियों को शहरी क्षेत्र से हटाने के निर्देश दिए थे। मंगवार को तीन माह का समय बीतने के बाद भी अब तक शहर में संचालित अवैध दूध डेयरियों व आवारा पशुओं के खिलाफ अभियान की शुरुआत तक नहीं की गई है। शहर में संचालित दूध डेयरियों व पशु पालकों का ब्यौरा जुटाने की जिम्मेदारी नगर पालिका को दी गई थी, लेकिन नगर पालिका द्वारा अब तक एक भी डेयरी व पशुपालकों को चिह्नित नहीं किया गया है। शासनादेश में कहा गया था कि यदि तीन माह के बाद शहर में एक भी आवारा पशु व अवैध डेयरी पाई जाती है प्रशासनिक अधिकारियों को दोषी माना जाएगा।
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इस अभियान को पूरा करने के लिए शासन द्वारा दी गई तीन माह की मोहलत तो समाप्त हो गई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते अब तक अभियान का श्रीगणेश नहीं हो सका है। शासनादेश के मुताबिक जिलाधिकारी को जांच अधिकारी समिति का गठन करना था। इस समिति का अध्यक्ष अपर जिलाधिकारी को व सदस्य अपर पुलिस अधीक्षक, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी व नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को नामित किया जाना था। उक्त जांच अधिकारी समिति द्वारा तीन माह तक चलाए जाने वाली अभियान की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जानी थी, लेकिन इस समिति का कोई अता-पता नहीं है। अभियान में सदर कोतवाल समेत अन्य पुलिस कर्मियों को भी अपने स्तर पर पूरा सहयोग करना था।
जांच अधिकारी समिति का गठन नहीं किया गया है। दूध डेयरियों की सूची बनाने की जिम्मेदारी संबंधित स्वास्थ्य नायकों को सौंपी गई थी। स्वास्थ्य नायकों पर पेंशन योजना व स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए जा रहे घरेलू शौचालयों के भौतिक सत्यापन का भी कार्य है, इसके बावजूद कुछ डेयरियों व पशुपालकों की सूची तैयार कर ली गई है। बाकी काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
राकेश कुमार
-नगर पालिका अधिशासी अधिकारी