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हाईवे पर काल बनकर घूम रहे आवारा पशु
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Aug 2016 01:02 AM IST
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avara animal, lalitpur news
- फोटो : demo
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ललितपुर। बुंदेलखंड में सूखे से हुए चारे के अभाव में परेशान पशुपालकों द्वारा छोड़े गए जानवर झांसी-सागर नेशनल हाईवे पर काल बनकर घूम रहे हैं। सड़क पर इनके जहां तहां बैठने से आए दिन वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। वहीं, पशुओं की भी मौत हो रही है। दिन हो या रात इनके विचरण ने राहगीरों की मुसीबत बढ़ा रखी है। यह हाल सिर्फ हाईवे पर ही नहीं महानगर की सड़कों और गलियों में भी बना हुआ है। कमोबेश यही हालात ग्रामीण क्षेत्रों में भी हैं।
जिला प्रशासन जानकारी होने के बावजूद मामले में चुप्पी साधे है। जबकि, नगर पालिका कैटिल कैचिंग वाहन और उपकरण उपलब्ध न होने का बहाना बना रहा है। ऐसे में हाईवे पर कभी भी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
पिछले कई वर्षों से लगातार बुंदेलखंड में पड़ रहे सूखे ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कुछ समय पूर्व खेतों के सूखे होने और खलिहान में चारा न होने से परेशान होकर किसानों को अपनी गायों और सांडों को आवारा छोड़ना पड़ा। अब यह आवारा पशु शाम होते ही नेशनल हाइवे पर जुटने लगते हैं। मौसम ठंडा होने पर यह सड़क पर जहां तहां झुंड में बैठ जाते हैं। ऐसे में राहगीरों को अपने वाहन निकालने में परेशानी होती है। कई बार तो यह जाम का कारण भी बनते हैं। पिछले कुछ दिनों में पशुओं के कारण कई लोग असमय काल के गाल में समा चुके हैं। वहीं, रोजाना वाहनों की चपेट में आने से इन पशुओं की भी मौत हो रही है।
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लोगों की शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन इन्हें पकड़ने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है। वहीं, नगर पालिका के सभी दावे हवा-हवाई साबित हुए हैं। कैटिल कैचिंग वाहन और उपकरण न होने की बात कहके नगर पालिका अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है। जबकि लाखों रुपए की लागत से कैटिल कैचिंग उपकरण का 27 जून को उद्घाटन किया गया है और उपकरण पालिका परिसर की शोभा बढ़ा रहा है।
वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी ने 21 जुलाई को गौ-रक्षा दलों व विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक करके निर्णय लिया था, कि नगर पालिका 22 जुलाई से आवारा पशुओं को खदेड़कर शहर सीमा के बाहर सिद्धनपुरा के आगे बुढ़वार मार्ग पर छोड़ा जाएगा। लेकिन योजना अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।
कैटिल कैचिंग मशीन ठीक होकर आ गई है, लेकिन पकड़े गए पशुओं को रखने की उचित व्यवस्था नहीं है। आवारा पशुओं को शहर सीमा से बाहर खदेड़ने के लिए एक सप्ताह तक अभियान चलाया जाना था, लेकिन सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से अभियान नहीं चलाया जा सका। कर्मचारियों के साथ बैठक करके जल्द ही अभियान शुरू किया जाएगा। कांजी हाउस के निर्माण के लिए शासन द्वारा संचालित कान्हा पशु आश्रय योजना के तहत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। जिलाधिकारी के साथ मिलकर जमीन की तलाश जारी है। जमीन मिलते ही प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
- राकेश कुमार, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका
अमरपुर की जमीन पर कांजी हाउस बनाने की मांगी मंजूरी
जनपद में कांजी हाउस न होने से आवारा पशुओं को रखने की व्यवस्था नहीं है। जिला मुख्यालय से करीब सात-आठ किलोमीटर दूर स्थित ग्राम अमरपुर में ग्राम सभा की कुछ जमीन खाली पड़ी है। कांजी हाउस के निर्माण के लिए नगर पालिका ने जिलाधिकारी से उक्त जमीन की संस्तुति मांगी है। यदि जिला प्रशासन अमरपुर की जमीन को आवंटित कर देता है, तो कांजी हाउस निर्माण की परेशानी खत्म हो जाएगी। वहीं, ग्रामीण इलाकों में आवंटित गौचर भूमि पर स्थानीय लोगों द्वारा कब्जा कर लेने से पशुओं को रखने की समस्या खड़ी हो गई है।
आए दिन बन रही विवाद की स्थिति
रात होते ही आवारा पशुओं से छुटकारा पाने के लिए ग्रामीण गांव की सीमा से दूर खदेड़ते हैं। अंधेरे का फायदा उठाकर लोग पशुओं के झुंड को सड़कों पर ही छोड़कर चले जाते हैं। अपने क्षेत्र से गायों के झुंड को गुजरता देख उस गांव के ग्रामीण लाठी-डंडा लेकर सड़कों पर आ जाते हैं, ताकि खदेड़ने वाले लोग इन पशुओं को यहीं छोड़कर न चले जाऐं। इससे कई जगह विवाद की स्थिति भी बन रही है।
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जिला प्रशासन जानकारी होने के बावजूद मामले में चुप्पी साधे है। जबकि, नगर पालिका कैटिल कैचिंग वाहन और उपकरण उपलब्ध न होने का बहाना बना रहा है। ऐसे में हाईवे पर कभी भी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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पिछले कई वर्षों से लगातार बुंदेलखंड में पड़ रहे सूखे ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कुछ समय पूर्व खेतों के सूखे होने और खलिहान में चारा न होने से परेशान होकर किसानों को अपनी गायों और सांडों को आवारा छोड़ना पड़ा। अब यह आवारा पशु शाम होते ही नेशनल हाइवे पर जुटने लगते हैं। मौसम ठंडा होने पर यह सड़क पर जहां तहां झुंड में बैठ जाते हैं। ऐसे में राहगीरों को अपने वाहन निकालने में परेशानी होती है। कई बार तो यह जाम का कारण भी बनते हैं। पिछले कुछ दिनों में पशुओं के कारण कई लोग असमय काल के गाल में समा चुके हैं। वहीं, रोजाना वाहनों की चपेट में आने से इन पशुओं की भी मौत हो रही है।
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लोगों की शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन इन्हें पकड़ने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है। वहीं, नगर पालिका के सभी दावे हवा-हवाई साबित हुए हैं। कैटिल कैचिंग वाहन और उपकरण न होने की बात कहके नगर पालिका अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है। जबकि लाखों रुपए की लागत से कैटिल कैचिंग उपकरण का 27 जून को उद्घाटन किया गया है और उपकरण पालिका परिसर की शोभा बढ़ा रहा है।
वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी ने 21 जुलाई को गौ-रक्षा दलों व विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक करके निर्णय लिया था, कि नगर पालिका 22 जुलाई से आवारा पशुओं को खदेड़कर शहर सीमा के बाहर सिद्धनपुरा के आगे बुढ़वार मार्ग पर छोड़ा जाएगा। लेकिन योजना अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।
कैटिल कैचिंग मशीन ठीक होकर आ गई है, लेकिन पकड़े गए पशुओं को रखने की उचित व्यवस्था नहीं है। आवारा पशुओं को शहर सीमा से बाहर खदेड़ने के लिए एक सप्ताह तक अभियान चलाया जाना था, लेकिन सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से अभियान नहीं चलाया जा सका। कर्मचारियों के साथ बैठक करके जल्द ही अभियान शुरू किया जाएगा। कांजी हाउस के निर्माण के लिए शासन द्वारा संचालित कान्हा पशु आश्रय योजना के तहत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। जिलाधिकारी के साथ मिलकर जमीन की तलाश जारी है। जमीन मिलते ही प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
- राकेश कुमार, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका
अमरपुर की जमीन पर कांजी हाउस बनाने की मांगी मंजूरी
जनपद में कांजी हाउस न होने से आवारा पशुओं को रखने की व्यवस्था नहीं है। जिला मुख्यालय से करीब सात-आठ किलोमीटर दूर स्थित ग्राम अमरपुर में ग्राम सभा की कुछ जमीन खाली पड़ी है। कांजी हाउस के निर्माण के लिए नगर पालिका ने जिलाधिकारी से उक्त जमीन की संस्तुति मांगी है। यदि जिला प्रशासन अमरपुर की जमीन को आवंटित कर देता है, तो कांजी हाउस निर्माण की परेशानी खत्म हो जाएगी। वहीं, ग्रामीण इलाकों में आवंटित गौचर भूमि पर स्थानीय लोगों द्वारा कब्जा कर लेने से पशुओं को रखने की समस्या खड़ी हो गई है।
आए दिन बन रही विवाद की स्थिति
रात होते ही आवारा पशुओं से छुटकारा पाने के लिए ग्रामीण गांव की सीमा से दूर खदेड़ते हैं। अंधेरे का फायदा उठाकर लोग पशुओं के झुंड को सड़कों पर ही छोड़कर चले जाते हैं। अपने क्षेत्र से गायों के झुंड को गुजरता देख उस गांव के ग्रामीण लाठी-डंडा लेकर सड़कों पर आ जाते हैं, ताकि खदेड़ने वाले लोग इन पशुओं को यहीं छोड़कर न चले जाऐं। इससे कई जगह विवाद की स्थिति भी बन रही है।