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Lalitpur News: एक से शुरू होकर आठ गांवों में लागू हुई शराब बंदी
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ललितपुर। एक गांव से शुरू हुई शराबबंदी की अनोखी व्यवस्था आधा दर्जन से अधिक गांवों तक पहुंच गई है और यह मुहिम बढ़ती ही जा रही है। नशामुक्ति अभियान केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि अब ग्रामीण खुद आगे आकर शराब बंदी लागू कर रहे हैं। ब्लॉक मड़ावरा के ग्राम सौंरई, सतवांसा, मानिकपुर, हंसरा, साढूमल, सीरोंन और ब्लाॅक महरौनी के नैनवारा व दरौना गांव इसकी मिसाल बने हैं। हजारों की आबादी वाले इन गांव में लोगों ने पंचायत कर शराबबंदी का संकल्प लिया और जुर्माने का नियम लागू कर दिया।
25 अगस्त को ब्लाॅक मड़ावरा के ग्राम सीरोंन में लोगों ने पंचायत की। निर्णय लिया कि गांव में कोई भी व्यक्ति शराब पीकर गाली-गलौज करेगा तो उस पर 5100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। अगर कोई गांव में अवैध शराब बेचता पकड़ा गया तो उसे 51,000 रुपये का दंड भरना होगा। साथ ही उसे समाज से बहिष्कृत भी किया जाएगा। इसके बाद 28 अगस्त को ग्राम साढूमल में शराब बंदी का फैसला हुआ। शराब व गांजा बेचते हुए पकड़े जाने पर 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का निर्णय हुआ। तीन दिन के अंदर दो गांवों में शराब बंदी को लेकर पंचायत होने की बात आसपास के गांवाें में फैल गई। नतीजा यह हुआ कि एक गांव से शुरू हुई शराबबंदी की अनोखी व्यवस्था अब तक आठ गांवों तक पहुंच गई है।
29 अगस्त को ब्लॉक मड़ावरा के ग्राम हंसरा, 30 को मानिकपुर में, दो सितंबर को सोंरई में, 5 सितंबर को ब्लॉक महरौनी के ग्राम नैनवारा और दरौना में लोगों ने पंचायत कर शराब बंदी का फैसला किया। लोग अब अपने गांवों में भी इस प्रकार की पंचायत करने के लिए एक दूसरे से चर्चा करने लगे हैं।
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युवा से बुजुर्ग तक निभा रहे जिम्मेदारी
खास बात यह कि अभियान केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है। गांव का हर व्यक्ति इस नियम को गंभीरता से ले रहा है और शराब बंदी के फैसले को बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। यही कारण है कि आसपास के गांव भी इनसे प्रेरणा लेकर शराब बंद करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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फैसले ने कस दी नकेल
इन गांव के लोग बताते हैं कि शराब की दुकान थोड़ी दूरी पर संचालित होती हैं, लेकिन शराबबंदी के फैसले ने शराब पीने वालों पर नकेल कस दी है। इससे न केवल घरों में विवाद कम होने लगे हैं, बल्कि ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति भी सुधरी है। जो रुपये पहले शराब में खर्च होता था, अब लोग उसे अपने घर परिवार और बच्चों पर खर्च करेंगे।
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गांवों में शराबबंदी का यह निर्णय काफी सराहनीय है। इससे लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर तो होगी ही, विवाद भी कम होंगे। इन गांवों से प्रेरणा लेकर अन्य में भी शराब बंदी की जा रही है।
केके मिश्रा, क्षेत्राधिकारी मड़ावरा
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25 अगस्त को ब्लाॅक मड़ावरा के ग्राम सीरोंन में लोगों ने पंचायत की। निर्णय लिया कि गांव में कोई भी व्यक्ति शराब पीकर गाली-गलौज करेगा तो उस पर 5100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। अगर कोई गांव में अवैध शराब बेचता पकड़ा गया तो उसे 51,000 रुपये का दंड भरना होगा। साथ ही उसे समाज से बहिष्कृत भी किया जाएगा। इसके बाद 28 अगस्त को ग्राम साढूमल में शराब बंदी का फैसला हुआ। शराब व गांजा बेचते हुए पकड़े जाने पर 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का निर्णय हुआ। तीन दिन के अंदर दो गांवों में शराब बंदी को लेकर पंचायत होने की बात आसपास के गांवाें में फैल गई। नतीजा यह हुआ कि एक गांव से शुरू हुई शराबबंदी की अनोखी व्यवस्था अब तक आठ गांवों तक पहुंच गई है।
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29 अगस्त को ब्लॉक मड़ावरा के ग्राम हंसरा, 30 को मानिकपुर में, दो सितंबर को सोंरई में, 5 सितंबर को ब्लॉक महरौनी के ग्राम नैनवारा और दरौना में लोगों ने पंचायत कर शराब बंदी का फैसला किया। लोग अब अपने गांवों में भी इस प्रकार की पंचायत करने के लिए एक दूसरे से चर्चा करने लगे हैं।
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युवा से बुजुर्ग तक निभा रहे जिम्मेदारी
खास बात यह कि अभियान केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है। गांव का हर व्यक्ति इस नियम को गंभीरता से ले रहा है और शराब बंदी के फैसले को बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। यही कारण है कि आसपास के गांव भी इनसे प्रेरणा लेकर शराब बंद करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
फैसले ने कस दी नकेल
इन गांव के लोग बताते हैं कि शराब की दुकान थोड़ी दूरी पर संचालित होती हैं, लेकिन शराबबंदी के फैसले ने शराब पीने वालों पर नकेल कस दी है। इससे न केवल घरों में विवाद कम होने लगे हैं, बल्कि ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति भी सुधरी है। जो रुपये पहले शराब में खर्च होता था, अब लोग उसे अपने घर परिवार और बच्चों पर खर्च करेंगे।
गांवों में शराबबंदी का यह निर्णय काफी सराहनीय है। इससे लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर तो होगी ही, विवाद भी कम होंगे। इन गांवों से प्रेरणा लेकर अन्य में भी शराब बंदी की जा रही है।
केके मिश्रा, क्षेत्राधिकारी मड़ावरा