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चार साल बाद सोनम के चेहरे पर लौटी खुशी, अपने हाथों से कर सकेंगी काम
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सोनम राजपूत के साथ शिक्षिका रिचा अग्रवाल (बाएं) और सुधा सचान (दाएं)।
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। जखौरा ब्लाक के जामुनधाना खुर्द गांव की 13 वर्षीय किशोरी सोनम के दोनों हाथ चार वर्ष पूर्व करंट से झुलस गए थे। ठीक नहीं हुए तो चिकित्सकों को उसके दोनों हाथ काट देना पड़े थे। सोनम तो स्वस्थ हो गई लेकिन हाथ के अभाव में उसने हिम्मत नहीं हारी और कटे हुए दोनों हाथों के बीच ब्रश और पेंसिंल रबर फंसाकर स्केचिंग और पेंटिंग का अभ्यास करती रही। एक संस्था के प्रयास से अब उसके हाथ लग गए हैं। एक सप्ताह तक तो उसे दिक्कत हुई लेकिन अब वह कृत्रिम हाथों से कागज आदि उठाने के साथ ही अपना काम करने का अभ्यास कर रही है। हाथ लग जाने से उसका आत्मबल बढ़ा है और उसके चेहरे पर खुशी झलकने लगी हैं।
जामुनधाना खुर्द निवासी सुखनंदन राजपूत और प्रभा देवी की तीन संतानों में सोनम सबसे बड़ी है। वर्ष 2017 में नौ वर्ष की उम्र में जब वह ललितपुर के सुधा सागर स्कूल में कक्षा चार में थी तो उसके हाथ करंट से झुलस गए थे। परिवार के लोग उपचार के लिए भोपाल ले गए जहां हाथों में मवाद इकट्ठा होने के कारण चिकित्सकों ने उसे बचाने के लिए उसके दोनों हाथ काट दिए। सोनम इसके बाद स्वस्थ तो हो गई लेकिन हाथ की कमी से मायूस हो गई थी। खाना तक उसकी मां उसे खिलाती थीं। कक्षा पांचवीं तक वह सुधा सागर स्कूल में पढ़ी। इसके बाद पिता ने उसका नाम उच्च प्राथमिक विद्यालय घटवार में लिखवा दिया, जहां वह वर्तमान समय में कक्षा सात की छात्रा है। सोनम ने कक्षा तीन तक की पढ़ाई गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में की। स्कूल में उसकी रुचि पढाई से ज्यादा चित्रकला में देख विद्यालय की शिक्षिका सुधा सचान ने उसे पेंटिंग आदि बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इससे उसका आत्मबल बढ़ा और उसने कुछ पेटिंग्स बनाई। सुधा ने उसे प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उसकी पेटिंग्स की वीडियो क्लिप बनाकर वाट्सएप ग्रुप में डाली। उसकी पेंटिग्स को शिक्षकों ने सराहा और सभी उसे प्रोत्साहित करने लगे। मार्च 2021 में अमेरिका की संस्था ‘सत्यमेव जयते’ ने दिव्यांग बच्चों के लिए ‘आशा की किरण’ प्रतियोगिता आयोजित की थी, जिसमें दिव्यांग बच्चों के हुनर की दो मिनट की वीडियो क्लिप भेजनी थी। राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका रिचा अग्रवाल ने सोनम के यहां पहुंचकर उसकी पेंटिग्स की वीडियो क्लिप बनाकर संस्था को भेज दी। ‘सत्यमेव जयते’ के संस्थापक ओम वर्मा ने सोनम की पेटिंग्स को पुुरस्कार के लिए चुना और होली के दिन 29 मार्च को फोन पर सोनम के पिता को इसकी जानकारी दी। पुरस्कार में उसे दो गिफ्ट मिले और पांच हजार रुपये उसकी पढ़ाई और इलाज के लिए देने की घोषणा की। पिता ने इसका श्रेय शिक्षिका रिचा अग्रवाल और सुधा सचान को दिया और कहा कि उनकी बदौलत ही सोनम को यह पुरस्कार मिला है।
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पांच अप्रैल को बना सोनम का दिव्यांग प्रमाण पत्र
पिता सुखनंदन राजपूत ने बताया कि सोनम का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए हम लोगों ने काफी प्रयास किए लेकिन उसे सरकारी महकमे से कोई मदद नहीं मिली। अमर उजाला की पहल पर सीएमओ डा. डीके गर्ग ने सोनम को पांच अप्रैल को अपने कार्यालय बुलाया और उसी दिन उसका सौ प्रतिशत का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर दे दिया।
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‘सत्यमेव जयते’ संस्था द्वारा मिले पैसे से रिचा अग्रवाल ने निजी प्रयास से उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान से संपर्क कर उसे 10 अप्रैल को उदयपुर भेजा। जहां पर बात नहीं बनीं। इसके बाद उसे महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर भेजा जहां उसे तत्काल कृत्रिम हाथ प्रदान किए गए। वह 13 अप्रैल की रात वह अपने घर पहुंची तो गांव वालों ने उसे खूब बधाई दी।
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10 दिन अभ्यास के बाद हाथ करने लगे हैं काम
सोनम ने बताया कि शुरू में तो उसे दिक्कत हुई, लेकिन दस दिनों तक अभ्यास के बाद अब वह हाथ से दैनिक कार्यों को कर रही है।
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शिक्षिका रिचा अग्रवाल ने बताया कि सोनम का उत्साहवर्धन कर उन्हें काफी प्रसन्नता है और भविष्य में उसकी जो संभव मदद होगी करेंगी।
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जामुनधाना खुर्द निवासी सुखनंदन राजपूत और प्रभा देवी की तीन संतानों में सोनम सबसे बड़ी है। वर्ष 2017 में नौ वर्ष की उम्र में जब वह ललितपुर के सुधा सागर स्कूल में कक्षा चार में थी तो उसके हाथ करंट से झुलस गए थे। परिवार के लोग उपचार के लिए भोपाल ले गए जहां हाथों में मवाद इकट्ठा होने के कारण चिकित्सकों ने उसे बचाने के लिए उसके दोनों हाथ काट दिए। सोनम इसके बाद स्वस्थ तो हो गई लेकिन हाथ की कमी से मायूस हो गई थी। खाना तक उसकी मां उसे खिलाती थीं। कक्षा पांचवीं तक वह सुधा सागर स्कूल में पढ़ी। इसके बाद पिता ने उसका नाम उच्च प्राथमिक विद्यालय घटवार में लिखवा दिया, जहां वह वर्तमान समय में कक्षा सात की छात्रा है। सोनम ने कक्षा तीन तक की पढ़ाई गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में की। स्कूल में उसकी रुचि पढाई से ज्यादा चित्रकला में देख विद्यालय की शिक्षिका सुधा सचान ने उसे पेंटिंग आदि बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इससे उसका आत्मबल बढ़ा और उसने कुछ पेटिंग्स बनाई। सुधा ने उसे प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उसकी पेटिंग्स की वीडियो क्लिप बनाकर वाट्सएप ग्रुप में डाली। उसकी पेंटिग्स को शिक्षकों ने सराहा और सभी उसे प्रोत्साहित करने लगे। मार्च 2021 में अमेरिका की संस्था ‘सत्यमेव जयते’ ने दिव्यांग बच्चों के लिए ‘आशा की किरण’ प्रतियोगिता आयोजित की थी, जिसमें दिव्यांग बच्चों के हुनर की दो मिनट की वीडियो क्लिप भेजनी थी। राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका रिचा अग्रवाल ने सोनम के यहां पहुंचकर उसकी पेंटिग्स की वीडियो क्लिप बनाकर संस्था को भेज दी। ‘सत्यमेव जयते’ के संस्थापक ओम वर्मा ने सोनम की पेटिंग्स को पुुरस्कार के लिए चुना और होली के दिन 29 मार्च को फोन पर सोनम के पिता को इसकी जानकारी दी। पुरस्कार में उसे दो गिफ्ट मिले और पांच हजार रुपये उसकी पढ़ाई और इलाज के लिए देने की घोषणा की। पिता ने इसका श्रेय शिक्षिका रिचा अग्रवाल और सुधा सचान को दिया और कहा कि उनकी बदौलत ही सोनम को यह पुरस्कार मिला है।
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पांच अप्रैल को बना सोनम का दिव्यांग प्रमाण पत्र
पिता सुखनंदन राजपूत ने बताया कि सोनम का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए हम लोगों ने काफी प्रयास किए लेकिन उसे सरकारी महकमे से कोई मदद नहीं मिली। अमर उजाला की पहल पर सीएमओ डा. डीके गर्ग ने सोनम को पांच अप्रैल को अपने कार्यालय बुलाया और उसी दिन उसका सौ प्रतिशत का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर दे दिया।
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‘सत्यमेव जयते’ संस्था द्वारा मिले पैसे से रिचा अग्रवाल ने निजी प्रयास से उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान से संपर्क कर उसे 10 अप्रैल को उदयपुर भेजा। जहां पर बात नहीं बनीं। इसके बाद उसे महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर भेजा जहां उसे तत्काल कृत्रिम हाथ प्रदान किए गए। वह 13 अप्रैल की रात वह अपने घर पहुंची तो गांव वालों ने उसे खूब बधाई दी।
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10 दिन अभ्यास के बाद हाथ करने लगे हैं काम
सोनम ने बताया कि शुरू में तो उसे दिक्कत हुई, लेकिन दस दिनों तक अभ्यास के बाद अब वह हाथ से दैनिक कार्यों को कर रही है।
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शिक्षिका रिचा अग्रवाल ने बताया कि सोनम का उत्साहवर्धन कर उन्हें काफी प्रसन्नता है और भविष्य में उसकी जो संभव मदद होगी करेंगी।

कृत्रिम दाहिने हाथ में कागज पकड़े सोनम राजपूत।- फोटो : LALITPUR