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बाल यौन अपराध के दोषी को सात वर्ष की सजा
lalitpur
Updated Thu, 28 Sep 2017 01:01 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
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ललितपुर। थाना बार अंतर्गत ग्राम गहराव निवासी एक व्यक्ति को बाल यौन अपराध में दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम हरीश कुमार यादव की अदालत ने अभियुक्त को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यही नहीं पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा से भी दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने की स्थित में अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
थाना बार क्षेत्र अंतर्गत एक गांव के निवासी एक व्यक्ति ने दो वर्ष पूर्व थाना बार पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि वह और उसकी पत्नी खेत पर काम करने जाते हैं। उसकी चौदह वर्षीय पुत्री देखरेख के अभाव में घर पर ही अकेली रहती थी, करीब दो माह पूर्व दिन में उसकी पुत्री को अकेला पाकर पड़ोस में ही रहने वाले युवक मुकेश अहिरवार ने उसकी पुत्री के साथ बलात्कार किया। पुत्री के विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी । 15 जुलाई 2015 को जब वह घर पर थी कि दोपहर के तीन बजे दिन में अभियुक्त ने पीड़िता के साथ बलात्कार किया। पीड़िता के हाव भाव देखकर उसकी मां ने पूछा तो उसने पूरी घटना बताई। यह जानकर उसने अभियुक्त और उसके परिवार वालों से इस घटना के बारे में कहा तो उनके द्वारा धमकी दी गई कि यदि कार्रवाई की तो वह उन्हें जान से मार देंगे और किसी झूठे मुकदमे में फंसा देंगे। पुलिस अधीक्षक के आदेश पर थाना बार पुलिस ने मामला पंजीकृत किया और पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण करवाकर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। मंगलवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त मुकेश अहिरवार को जान से मारने की धमकी देने, यौन अपराध शिशु संरक्षण अधिनियम और बलात्कार के अपराध में दोषी पाते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया गया। अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को पांच माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। अर्थदंड की धनराशि वसूलने की स्थिति में तीन हजार रुपए प्रतिकर स्वरुप पीड़िता को दिलाने के आदेश भी दिए। उक्त मामले में पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी ने की।
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थाना बार क्षेत्र अंतर्गत एक गांव के निवासी एक व्यक्ति ने दो वर्ष पूर्व थाना बार पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि वह और उसकी पत्नी खेत पर काम करने जाते हैं। उसकी चौदह वर्षीय पुत्री देखरेख के अभाव में घर पर ही अकेली रहती थी, करीब दो माह पूर्व दिन में उसकी पुत्री को अकेला पाकर पड़ोस में ही रहने वाले युवक मुकेश अहिरवार ने उसकी पुत्री के साथ बलात्कार किया। पुत्री के विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी । 15 जुलाई 2015 को जब वह घर पर थी कि दोपहर के तीन बजे दिन में अभियुक्त ने पीड़िता के साथ बलात्कार किया। पीड़िता के हाव भाव देखकर उसकी मां ने पूछा तो उसने पूरी घटना बताई। यह जानकर उसने अभियुक्त और उसके परिवार वालों से इस घटना के बारे में कहा तो उनके द्वारा धमकी दी गई कि यदि कार्रवाई की तो वह उन्हें जान से मार देंगे और किसी झूठे मुकदमे में फंसा देंगे। पुलिस अधीक्षक के आदेश पर थाना बार पुलिस ने मामला पंजीकृत किया और पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण करवाकर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। मंगलवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त मुकेश अहिरवार को जान से मारने की धमकी देने, यौन अपराध शिशु संरक्षण अधिनियम और बलात्कार के अपराध में दोषी पाते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया गया। अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को पांच माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। अर्थदंड की धनराशि वसूलने की स्थिति में तीन हजार रुपए प्रतिकर स्वरुप पीड़िता को दिलाने के आदेश भी दिए। उक्त मामले में पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी ने की।
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