{"_id":"65cfe2b124143b12c6090c24","slug":"satsang-is-available-only-by-the-grace-of-god-saint-vijay-kaushal-lalitpur-news-c-131-1-ltp1001-110512-2024-02-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रभु की कृपा से ही मिलता है सत्संग: संत विजय कौशल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रभु की कृपा से ही मिलता है सत्संग: संत विजय कौशल
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने कहा कि विवेक जाग्रत तभी होगा जब जीवन में सत्संग आएगा। बिना सत्संग के हमारे जीवन में यथार्थ विवेक नहीं आता। गुरु के चरणों में बैठकर धार्मिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक चर्चा सत्संग है। जीवन नीयत से चलता है, इसे साफ रखिए। साफ नीयत का विवेक वंदनीय बन जाता है। उन्होंने कहा कि मानव को सत्संग प्रभु कृपा से ही मिलता है। वह शुक्रवार को तुवन मंदिर प्रांगण में श्रीरामकथा का वर्णन कर रहे थे।
धनुष यज्ञ के बाद भगवान परशुराम व लक्ष्मण के चुटीले संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि यहां भगवान श्रीराम स्वयं को कर्ता भाव से मुक्त रखते हैं। यह जीवन का सूत्र है कि स्वयं को कर्ता न मानें, सभी कार्य प्रभु इच्छा से ही होते हैं। कर्ता भाव का अहंकार हमारे विवेक को नष्ट कर देता है। जब भगवान परशुराम को यह ज्ञान होता है कि श्रीराम पूर्णावतार हैं तो वे क्षमा मांगकर प्रस्थान कर जाते हैं। परशुराम जी के जाने के उपरांत अयोध्या संदेश भेजा जाता है। यह समाचार पाकर महाराजा दशरथ गुरुजनों, मंत्रियों व संबंधियों सहित बरात लेकर जनकपुर पहुचंते हैं। जनकपुरी की शोभा अद्भुत है। बरातियों की सेवा के सारे साधन जुटाए जाते हैं। जनक जी का वैभव देखकर बराती जन आश्चर्यचकित होते हैं।
मिथिलावासी भी बरात की शोभा देखकर अभिभूत हो रहे हैं। राजा जनक एवं रानी सुनैना द्वारा कन्यादान किया गया। मांग भरने की रस्म हुई। उन्होंने कहा कि हमारे यहां वैवाहिक सस्कांरों मे मांग भराई का अर्थ यह है कि जीवन की सभी मांगें पूर्ण करने का दायित्व पति पर हो जाता है। भावर के बाद कोहलर लीला संपन्न होती है। चारों दूल्हे एवं दुल्हनें कोहलर लीला के बाद जेवनार को जाते हैं। जेवनार में जनकपुर की नारियां मधुर एवं व्यंग्य बाणों से मिश्रित गालियां गाती हैं। कथा से पहले मुख्य यजमान सरदार वीके सिंह, राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ, अनुजकांत दीक्षित, कैलाशनायक, अजय नायक आशीष लिटौरिया ने पूजन संपन्न कराया। पं. प्रदीप चौबे, सुभाष जायसवाल, आनंद कुमार दीक्षित, राजीव बबेले, महेंद्र शुक्ला, भोला शंकर पस्तोर आदि ने मंगल आरती उतारी। संचालन डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री जी ने किया।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -
भक्तों की मानसिक पिपासा शांत करती है कथा
अखिल भारतीय चतुर संप्रदाय के महंत फूलडोल विहारी दाय महाराज ने कहा कि वस्तुतः कथा आनंद का उत्सव होता है, जो भक्तजनों की मानसिक पिपासा शांत करता है। हृदय में सद्गुणों की ओर जाने की अकुलाहट बढ़ती है। श्री तुवन मंदिर के महंत ने जो आनंद उत्सव आयोजित किया, वह प्रशंसनीय है। आज मथुरा वृंदावन के दर्शनों का लाभ भी भक्तजनों को प्राप्त हुआ।
-- -- -- -- -- -हनुमान चालीसा का संपुटित हवन हुआ
संत विजय कौशल महाराज ने श्री हनुमान चालीसा का संपुटित हवन किया। श्री तुवन मंदिर की यज्ञशाला में पं. आनंद कुमार दीक्षित, पं. अनुजकांत दीक्षित, पं. कैलाश नायक, पं. अजय नायक, पं. आशीष लिटौरिया प्रमुख रहे। व्यवस्थाओं में पं. अभिषेक पांडेय, धर्मेंद्र रावत, नरेश शेखावत, धर्मेंद्र जडिया, हेमंत, पम्मी, मनोज गुप्ता, राकेश तिवारी, सुनील जैन, दिनेश पांडेय, शुभम तिवारी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
ललितपुर। संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने कहा कि विवेक जाग्रत तभी होगा जब जीवन में सत्संग आएगा। बिना सत्संग के हमारे जीवन में यथार्थ विवेक नहीं आता। गुरु के चरणों में बैठकर धार्मिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक चर्चा सत्संग है। जीवन नीयत से चलता है, इसे साफ रखिए। साफ नीयत का विवेक वंदनीय बन जाता है। उन्होंने कहा कि मानव को सत्संग प्रभु कृपा से ही मिलता है। वह शुक्रवार को तुवन मंदिर प्रांगण में श्रीरामकथा का वर्णन कर रहे थे।
धनुष यज्ञ के बाद भगवान परशुराम व लक्ष्मण के चुटीले संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि यहां भगवान श्रीराम स्वयं को कर्ता भाव से मुक्त रखते हैं। यह जीवन का सूत्र है कि स्वयं को कर्ता न मानें, सभी कार्य प्रभु इच्छा से ही होते हैं। कर्ता भाव का अहंकार हमारे विवेक को नष्ट कर देता है। जब भगवान परशुराम को यह ज्ञान होता है कि श्रीराम पूर्णावतार हैं तो वे क्षमा मांगकर प्रस्थान कर जाते हैं। परशुराम जी के जाने के उपरांत अयोध्या संदेश भेजा जाता है। यह समाचार पाकर महाराजा दशरथ गुरुजनों, मंत्रियों व संबंधियों सहित बरात लेकर जनकपुर पहुचंते हैं। जनकपुरी की शोभा अद्भुत है। बरातियों की सेवा के सारे साधन जुटाए जाते हैं। जनक जी का वैभव देखकर बराती जन आश्चर्यचकित होते हैं।
विज्ञापन
मिथिलावासी भी बरात की शोभा देखकर अभिभूत हो रहे हैं। राजा जनक एवं रानी सुनैना द्वारा कन्यादान किया गया। मांग भरने की रस्म हुई। उन्होंने कहा कि हमारे यहां वैवाहिक सस्कांरों मे मांग भराई का अर्थ यह है कि जीवन की सभी मांगें पूर्ण करने का दायित्व पति पर हो जाता है। भावर के बाद कोहलर लीला संपन्न होती है। चारों दूल्हे एवं दुल्हनें कोहलर लीला के बाद जेवनार को जाते हैं। जेवनार में जनकपुर की नारियां मधुर एवं व्यंग्य बाणों से मिश्रित गालियां गाती हैं। कथा से पहले मुख्य यजमान सरदार वीके सिंह, राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ, अनुजकांत दीक्षित, कैलाशनायक, अजय नायक आशीष लिटौरिया ने पूजन संपन्न कराया। पं. प्रदीप चौबे, सुभाष जायसवाल, आनंद कुमार दीक्षित, राजीव बबेले, महेंद्र शुक्ला, भोला शंकर पस्तोर आदि ने मंगल आरती उतारी। संचालन डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री जी ने किया।
विज्ञापन
भक्तों की मानसिक पिपासा शांत करती है कथा
अखिल भारतीय चतुर संप्रदाय के महंत फूलडोल विहारी दाय महाराज ने कहा कि वस्तुतः कथा आनंद का उत्सव होता है, जो भक्तजनों की मानसिक पिपासा शांत करता है। हृदय में सद्गुणों की ओर जाने की अकुलाहट बढ़ती है। श्री तुवन मंदिर के महंत ने जो आनंद उत्सव आयोजित किया, वह प्रशंसनीय है। आज मथुरा वृंदावन के दर्शनों का लाभ भी भक्तजनों को प्राप्त हुआ।
संत विजय कौशल महाराज ने श्री हनुमान चालीसा का संपुटित हवन किया। श्री तुवन मंदिर की यज्ञशाला में पं. आनंद कुमार दीक्षित, पं. अनुजकांत दीक्षित, पं. कैलाश नायक, पं. अजय नायक, पं. आशीष लिटौरिया प्रमुख रहे। व्यवस्थाओं में पं. अभिषेक पांडेय, धर्मेंद्र रावत, नरेश शेखावत, धर्मेंद्र जडिया, हेमंत, पम्मी, मनोज गुप्ता, राकेश तिवारी, सुनील जैन, दिनेश पांडेय, शुभम तिवारी आदि मौजूद रहे।