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हक के लिए एक दिन का वेतन पाने की चाह नहीं
lalitpur
Updated Sat, 03 Sep 2016 12:52 AM IST
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ललितपुर। श्रम संगठनों की हड़ताल होने से जनपद में जहां आम लोगों को परेेशान होना पड़ा, वहीं अपने हक की लड़ाई लड़ रहे श्रम संगठनों के कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन के दौरान गरजते कहा कि उन्हें अपना हक लेने के लिए एक दिन के वेतन की चाह नहीं है। एक दिवसीय हड़ताल से जनपद में बैंक, बीमा, डाकघर में कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा। हालांकि, हड़ताल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शामिल नहीं हुआ। एक दिन की हड़ताल से बैंकों में करीब दो सौ करोड़ रुपए का टर्न ओवर प्रभावित हुआ है।
ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन और ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के आह्वान पर शुक्रवार को जनपद में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को छोड़कर अन्य सभी बैंक, बीमा, व डाकघर के श्रम संगठनों द्वारा उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देने और श्रम कानून में श्रमिक विरोधी बदलाव के खिलाफ एक दिवसीय हड़ताल की। इन संगठनों में इंटक, एटक, एचएससीटू, एआईटीयूसी, एआईसीसीटीयू, टीयूसीसी, राज्य कर्मचारी महासंघ यूपी, कर्मचारी संयुक्त परिषद यूपी, यूपी बैंक इम्प्लाइज यूनियन समेत ग्यारह श्रम संगठनों समेत बैंकिंग संबंधी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया कि शासन द्वारा उनकी 12 सूत्रीय मांगें पूरी नहीं की जा रही हैं। इन मांगों में न्यूनतम वेतन अठारह हजार रुपए करने, ठेका प्रथा बंद करने, बोनस/पीएफ परिसीमन बंद करने, सभी के लिए पेंशन व केंद्र एवं राज्य कर्मियों की पुरानी पेंशन बहाल करने, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा के लिए सामाजिक कोष बनाने, कामगार विरोधी श्रम सुधारों को रोके जाने, जन विरोधी बैंकिंग सुधारों को रोके जाने, एसबीआई के साथ सहयोगी बैंकों के विलय को रोके जाने, कार्पोरेट ऋण बकाएदारों द्वारा जनता के धन की लूट रोकी जाने, बैंक कार्यों की आउटसोर्सिंग रोकने संबंधी मांगें प्रमुख रूप से उठाई गईं। कर्मचारियों ने मांगों को पूरा किए जाने और श्रम विरोधी कानून के खिलाफ शुक्रवार को विभिन्न स्थलों पर धरना प्रदर्शन व हड़ताल की। संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि उन्हें हक के लिए एक दिन की हड़ताल से एक दिन का वेतन नहीं मिलता है तो उन्हें अपने हक की आवाज उठाने के लिए एक दिन के वेतन की चाह नहीं है। जनपद में बैंकों के अंतर्गत पीएनबी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, एचडीएफसी, यूनियन बैंक, विजया बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, ओरिएंटल बैंक, देना बैंक के अलावा एलआईसी बीमा क्षेत्र से जुड़े बैंक के कर्मचारी भी हड़ताल पर रहे। इससे लेन-देन पूरी तरह से प्रभावित रहा।
डाक सेवा रही ठप
श्रम संगठनों की हड़ताल में जनपद का डाक विभाग भी शामिल रहा। जिससे जनपद की विभिन्न ब्रांच व उपडाकघर की शाखाओं की सेवाएं पूरी तरह से ठप रहीं। डाकघर कर्मियों की हड़ताल होने से डाक विभाग में पूरे जनपद से करीब डेढ़ करोड़ रुपए का टर्न ओवर प्रभावित होना बताया गया है। ऑल इंडिया डाक कर्मचारी संघ के सचिव जिनेंद्र कुमार जैन, राष्ट्रीय डाक कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष विवेक सिंह, अखिल भारतीय ग्रामीण डाक सेवक संघ के अध्यक्ष दशरथ अहिरवार, श्याम सुंदर, हेमेंद्र सिंह सचान, तेज प्रताप सिंह, जयराम, सिम्मी जैन, संतोष कुमार, महेंद्र कुमार, कपिल कुमार सेन, रहीश, रवींद्र कुमार, सुजान सिंह आदि मौजूद रहे।
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न मिली खतौनी, न हुआ काम
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के तत्वावधान में 23 अगस्त से विभिन्न मांगों के लिए जनपद के लेखपालों द्वारा लगातार हड़ताल जारी है, जिससे तहसील व कचहरी के कार्य ठप पड़े हैं। शुक्रवार को भी नवीन तहसील परिसर में लेखपालों ने अपनी बुलंद आवाज में शासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वह अपने हक के लिए लड़ाई को मजबूूर होंगे। लेखपाल संगठनों की हड़ताल से सभी तहसीलों में आय जाति, निवास के कामकाज ठप पड़े हैं, वहीं खतौनी व खसरा की नकलें भी लोगों को नहीं मिल रही हैं। वृद्धावस्था, विधवा व राष्ट्रीय पारिवारिक पेंशन, कृषकों की फसल क्षति का आकलन, प्रार्थना पत्रों की जांच कार्य ठप हैं। शुक्रवार को संघ के जिलाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह बुंदेला, जिला मंत्री देवशरण उपाध्याय, पूर्व जिलाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, लक्ष्मीप्रसाद यादव, मोहनलाल चंदेल, सूरज श्रीवास्तव, मुन्नीलाल, राजेंद्र मिश्रा, विवेक गोस्वामी, जगदीश नारायण पुरोहित, दीनदयाल मिश्रा, बृजकिशोर गुप्ता, अरुण प्रताप, शिवनारायण तिवारी, अरविंद ताम्रकार, संतोष सेन समेत जनपद के सभी लेखपाल कर्मचारी उपस्थित रहे।
रोडवेज परिवहन हुआ बाधित
श्रम संगठनों की मांग पर रोडवेज परिवहन के कर्मचारियों ने भी हड़ताल कर रोडवेज परिवहन दोपहर तक बाधित रखा। ललितपुर व झांसी से आने व जाने वाली रोडवेज व लोहिया बसें शुक्रवार को रात तीन बजे से सुबह ग्यारह बजे तक नहीं चलाई गईं। हालांकि, सुबह ग्यारह बजे लोहिया बसों का संचालन तो सुचारु हो गया, लेकिन जनपदवासी रोडवेज परिवहन कर्मियों की हड़ताल की पूर्व के चलते परेशान रहे और अन्य साधनों से यात्रा की।
सरकारी कार्यालयों में नहीं दिखा असर
शुक्रवार को एक दिवसीय हड़ताल का तहसील को छोड़कर कोई विशेष असर नहीं दिखा। जबकि, शुक्रवार को नगर के सरकारी कार्यालयों में रोज की तरह ही कामकाज होता दिखा।
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ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन और ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के आह्वान पर शुक्रवार को जनपद में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को छोड़कर अन्य सभी बैंक, बीमा, व डाकघर के श्रम संगठनों द्वारा उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देने और श्रम कानून में श्रमिक विरोधी बदलाव के खिलाफ एक दिवसीय हड़ताल की। इन संगठनों में इंटक, एटक, एचएससीटू, एआईटीयूसी, एआईसीसीटीयू, टीयूसीसी, राज्य कर्मचारी महासंघ यूपी, कर्मचारी संयुक्त परिषद यूपी, यूपी बैंक इम्प्लाइज यूनियन समेत ग्यारह श्रम संगठनों समेत बैंकिंग संबंधी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया कि शासन द्वारा उनकी 12 सूत्रीय मांगें पूरी नहीं की जा रही हैं। इन मांगों में न्यूनतम वेतन अठारह हजार रुपए करने, ठेका प्रथा बंद करने, बोनस/पीएफ परिसीमन बंद करने, सभी के लिए पेंशन व केंद्र एवं राज्य कर्मियों की पुरानी पेंशन बहाल करने, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा के लिए सामाजिक कोष बनाने, कामगार विरोधी श्रम सुधारों को रोके जाने, जन विरोधी बैंकिंग सुधारों को रोके जाने, एसबीआई के साथ सहयोगी बैंकों के विलय को रोके जाने, कार्पोरेट ऋण बकाएदारों द्वारा जनता के धन की लूट रोकी जाने, बैंक कार्यों की आउटसोर्सिंग रोकने संबंधी मांगें प्रमुख रूप से उठाई गईं। कर्मचारियों ने मांगों को पूरा किए जाने और श्रम विरोधी कानून के खिलाफ शुक्रवार को विभिन्न स्थलों पर धरना प्रदर्शन व हड़ताल की। संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि उन्हें हक के लिए एक दिन की हड़ताल से एक दिन का वेतन नहीं मिलता है तो उन्हें अपने हक की आवाज उठाने के लिए एक दिन के वेतन की चाह नहीं है। जनपद में बैंकों के अंतर्गत पीएनबी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, एचडीएफसी, यूनियन बैंक, विजया बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, ओरिएंटल बैंक, देना बैंक के अलावा एलआईसी बीमा क्षेत्र से जुड़े बैंक के कर्मचारी भी हड़ताल पर रहे। इससे लेन-देन पूरी तरह से प्रभावित रहा।
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डाक सेवा रही ठप
श्रम संगठनों की हड़ताल में जनपद का डाक विभाग भी शामिल रहा। जिससे जनपद की विभिन्न ब्रांच व उपडाकघर की शाखाओं की सेवाएं पूरी तरह से ठप रहीं। डाकघर कर्मियों की हड़ताल होने से डाक विभाग में पूरे जनपद से करीब डेढ़ करोड़ रुपए का टर्न ओवर प्रभावित होना बताया गया है। ऑल इंडिया डाक कर्मचारी संघ के सचिव जिनेंद्र कुमार जैन, राष्ट्रीय डाक कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष विवेक सिंह, अखिल भारतीय ग्रामीण डाक सेवक संघ के अध्यक्ष दशरथ अहिरवार, श्याम सुंदर, हेमेंद्र सिंह सचान, तेज प्रताप सिंह, जयराम, सिम्मी जैन, संतोष कुमार, महेंद्र कुमार, कपिल कुमार सेन, रहीश, रवींद्र कुमार, सुजान सिंह आदि मौजूद रहे।
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न मिली खतौनी, न हुआ काम
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के तत्वावधान में 23 अगस्त से विभिन्न मांगों के लिए जनपद के लेखपालों द्वारा लगातार हड़ताल जारी है, जिससे तहसील व कचहरी के कार्य ठप पड़े हैं। शुक्रवार को भी नवीन तहसील परिसर में लेखपालों ने अपनी बुलंद आवाज में शासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वह अपने हक के लिए लड़ाई को मजबूूर होंगे। लेखपाल संगठनों की हड़ताल से सभी तहसीलों में आय जाति, निवास के कामकाज ठप पड़े हैं, वहीं खतौनी व खसरा की नकलें भी लोगों को नहीं मिल रही हैं। वृद्धावस्था, विधवा व राष्ट्रीय पारिवारिक पेंशन, कृषकों की फसल क्षति का आकलन, प्रार्थना पत्रों की जांच कार्य ठप हैं। शुक्रवार को संघ के जिलाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह बुंदेला, जिला मंत्री देवशरण उपाध्याय, पूर्व जिलाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, लक्ष्मीप्रसाद यादव, मोहनलाल चंदेल, सूरज श्रीवास्तव, मुन्नीलाल, राजेंद्र मिश्रा, विवेक गोस्वामी, जगदीश नारायण पुरोहित, दीनदयाल मिश्रा, बृजकिशोर गुप्ता, अरुण प्रताप, शिवनारायण तिवारी, अरविंद ताम्रकार, संतोष सेन समेत जनपद के सभी लेखपाल कर्मचारी उपस्थित रहे।
रोडवेज परिवहन हुआ बाधित
श्रम संगठनों की मांग पर रोडवेज परिवहन के कर्मचारियों ने भी हड़ताल कर रोडवेज परिवहन दोपहर तक बाधित रखा। ललितपुर व झांसी से आने व जाने वाली रोडवेज व लोहिया बसें शुक्रवार को रात तीन बजे से सुबह ग्यारह बजे तक नहीं चलाई गईं। हालांकि, सुबह ग्यारह बजे लोहिया बसों का संचालन तो सुचारु हो गया, लेकिन जनपदवासी रोडवेज परिवहन कर्मियों की हड़ताल की पूर्व के चलते परेशान रहे और अन्य साधनों से यात्रा की।
सरकारी कार्यालयों में नहीं दिखा असर
शुक्रवार को एक दिवसीय हड़ताल का तहसील को छोड़कर कोई विशेष असर नहीं दिखा। जबकि, शुक्रवार को नगर के सरकारी कार्यालयों में रोज की तरह ही कामकाज होता दिखा।