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मुफ्त अनाज पाने की कतार में सरकारी कर्मचारी
lalitpur
Updated Mon, 30 May 2016 12:32 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
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ललितपुर। प्रदेश सरकार ने भले ही राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत गरीबों को मुफ्त में अनाज देने की घोषणा कर दी हो, लेकिन इस योजना का लाभ निर्धन परिवारों तक पहुंचना मुश्किल दिखाई दे रहा है। इसकी वजह पात्र गृहस्थियों में सरकारी कर्मचारी व धनाढ्यों की मौजूदगी बनी हुई है।
बुंदेलखंड सूखा से कराह रहा है। इस विषम स्थिति से निपटने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। पहले भूखे से होने वाली मौतों को रोकने के मकसद से राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लागू किया गया। इस योजना में एक अप्रैल से पात्र गृहस्थियों को दो रुपये किलो गेहूं व तीन रुपये किलो चावल मुहैया कराया जा रहा है। सूूबे की सरकार ने बुंदेलखंड की बदहाली को देखते हुए निर्धन परिवारों के लिए जून माह से अनाज मुफ्त में देने की घोषणा कर दी है। लेकिन, सरकार की मंशा फलीभूत होती दिखाई नहीं दे रही है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की पात्रता सूची में सरकारी कर्मचारी एवं धनाढ्यों की उपस्थिति बड़े पैमाने पर बनी हुई है। जिला पूर्ति कार्यालय मई माह के अंत तक सूची को दुरुस्त नहीं कर पाया है। शायद ही नगर की ऐसी कोई राशन की दुकान हो, जिस पर अपात्र गृहस्थी न जुड़ी हो। इसके बाद भी विभागीय अफसर सूची को दुरुस्त बता रहे हैं। यही वजह है कि जिले में सैकड़ों की संख्या में वास्तविक निर्धन परिवार पात्रता सूची से बाहर बने हुए हैं।
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गत दिवस मंडलायुक्त के राममोहन राव के समक्ष भी ऐसा ही एक मामला आया था। ब्लाक बार के अंतर्गत ग्राम मथुराडांग के सहरियों ने उन्हें किसी तरह का लाभ नहीं मिलने की शिकायत कर हैरत में डाल दिया था। लेकिन, अकेले मथुरा डांग की यह स्थिति नहीं है, बल्कि इस तरह की स्थिति नगर के विभिन्न वार्डों में बनी हुई है। नगर कांग्रेस कमेटी ने पात्रों को शामिल करने के लिए कुछ दिनों तक आंदोलन चलाया, जो बिना किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका।
आवेदक व पिता/पति के नाम एक जैसे
दुकानदार रमेश विश्वकर्मा की दुकान पर पात्र आवेदक चिरोंजाबाई, पिता/पति का नाम चिरोंजाबाई, आवेदक नवाब बक्स पिता/ पति का नाम नवाब बक्स, आवेदक साबरा पिता/पति का नाम साबरा, दुकानदार वीरेंद्र जैन की दुकान पर आवेदक प्रभा देवी पिता/पति का नाम प्रभा देवी, आवेदक शंकर पिता/ पति शंकर, एक जैसे अनेक नाम हैं। इसके बाद भी सूची दुरुस्त नहीं की गई है।
यह हैं सरकारी कर्मचारी
पात्र गृहस्थी की सूची में या तो राशन कार्डधारक सीधे सरकारी सेवा में है या फिर उसके पिता/पति सरकारी सेवा में है। इनमें राजीव शर्मा, कविता पांडेय, हेमंत तिवारी, अनंत तिवारी, मो. अजमल खान, सुुनील सोलोमन, संजीव गिदरौनिया, मनोज भारती आदि शामिल हैं। कई सेवानिवृत्त कर्मचारी सूचीबद्ध हैं, जिनके परिवार के सदस्य सरकारी सेवा में हैं।
नेेता भी शामिल
पात्र गृहस्थियों में भले ही निर्धन परिवारों को जगह नहीं मिल पाई हो, लेकिन राजनीतिक दलों के नेता अपना नाम शामिल कराने में पीछे नहीं रहे हैं। इसमें कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के लोग शामिल हैं।
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बुंदेलखंड सूखा से कराह रहा है। इस विषम स्थिति से निपटने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। पहले भूखे से होने वाली मौतों को रोकने के मकसद से राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लागू किया गया। इस योजना में एक अप्रैल से पात्र गृहस्थियों को दो रुपये किलो गेहूं व तीन रुपये किलो चावल मुहैया कराया जा रहा है। सूूबे की सरकार ने बुंदेलखंड की बदहाली को देखते हुए निर्धन परिवारों के लिए जून माह से अनाज मुफ्त में देने की घोषणा कर दी है। लेकिन, सरकार की मंशा फलीभूत होती दिखाई नहीं दे रही है।
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की पात्रता सूची में सरकारी कर्मचारी एवं धनाढ्यों की उपस्थिति बड़े पैमाने पर बनी हुई है। जिला पूर्ति कार्यालय मई माह के अंत तक सूची को दुरुस्त नहीं कर पाया है। शायद ही नगर की ऐसी कोई राशन की दुकान हो, जिस पर अपात्र गृहस्थी न जुड़ी हो। इसके बाद भी विभागीय अफसर सूची को दुरुस्त बता रहे हैं। यही वजह है कि जिले में सैकड़ों की संख्या में वास्तविक निर्धन परिवार पात्रता सूची से बाहर बने हुए हैं।
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गत दिवस मंडलायुक्त के राममोहन राव के समक्ष भी ऐसा ही एक मामला आया था। ब्लाक बार के अंतर्गत ग्राम मथुराडांग के सहरियों ने उन्हें किसी तरह का लाभ नहीं मिलने की शिकायत कर हैरत में डाल दिया था। लेकिन, अकेले मथुरा डांग की यह स्थिति नहीं है, बल्कि इस तरह की स्थिति नगर के विभिन्न वार्डों में बनी हुई है। नगर कांग्रेस कमेटी ने पात्रों को शामिल करने के लिए कुछ दिनों तक आंदोलन चलाया, जो बिना किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका।
आवेदक व पिता/पति के नाम एक जैसे
दुकानदार रमेश विश्वकर्मा की दुकान पर पात्र आवेदक चिरोंजाबाई, पिता/पति का नाम चिरोंजाबाई, आवेदक नवाब बक्स पिता/ पति का नाम नवाब बक्स, आवेदक साबरा पिता/पति का नाम साबरा, दुकानदार वीरेंद्र जैन की दुकान पर आवेदक प्रभा देवी पिता/पति का नाम प्रभा देवी, आवेदक शंकर पिता/ पति शंकर, एक जैसे अनेक नाम हैं। इसके बाद भी सूची दुरुस्त नहीं की गई है।
यह हैं सरकारी कर्मचारी
पात्र गृहस्थी की सूची में या तो राशन कार्डधारक सीधे सरकारी सेवा में है या फिर उसके पिता/पति सरकारी सेवा में है। इनमें राजीव शर्मा, कविता पांडेय, हेमंत तिवारी, अनंत तिवारी, मो. अजमल खान, सुुनील सोलोमन, संजीव गिदरौनिया, मनोज भारती आदि शामिल हैं। कई सेवानिवृत्त कर्मचारी सूचीबद्ध हैं, जिनके परिवार के सदस्य सरकारी सेवा में हैं।
नेेता भी शामिल
पात्र गृहस्थियों में भले ही निर्धन परिवारों को जगह नहीं मिल पाई हो, लेकिन राजनीतिक दलों के नेता अपना नाम शामिल कराने में पीछे नहीं रहे हैं। इसमें कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के लोग शामिल हैं।