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मंथरा ने भरे कान, कैकेयी ने मांगे दो वरदान
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महरौनी में राम लीला का मंचन करते कलाकार
- फोटो : LALITPUR
महरौनी (ललितपुर)। श्री रामयश कीर्तन मंडली के तत्वावधान में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव के सातवें दिन श्रीराम वनगमन की लीला का मंचन हुआ, जिसे देखकर दर्शक भावविभोर हो गए। लीला मंचन में मंथरा-कैकेयी संवाद, कोप भवन में रानी कैकेयी का राजा दशरथ से दो वर मांगना और फिर श्रीराम लक्ष्मण और सीता के वनगमन की लीला में मंडली के कलाकारों का जीवंत अभिनय सराहनीय रहा। इसके पूर्व नितिंजय सिसौदिया शिक्षक ने भगवान की आरती उतारी।
तत्पश्चात लीला मंचन में राजा दशरथ सभी सभासदों के समक्ष श्रीराम को युवराज पद देने का प्रस्ताव रखते हैं और सभी उस पर अपनी सहमति देते हैं। धूमधाम से राम के राजतिलक की तैयारियां चलती हैं इसी बीच दासी मंथरा जाकर रानी कैकेयी के कान भरती है। तब रानी अपनी दासी मंथरा की बातों में आकर आभूषण आदि त्यागकर कोप भवन में चली जाती हैं। यह समाचार पाकर राजा दशरथ वहां जाते हैं और रानी से इसका कारण पूंछते हैं। रानी कैकेयी तब राजा को पूर्व में दिए गए दो वर मांगने का वचन याद दिलाती हैं। राम की शपथ दिलाकर राजा से दो वर भरत को राजगद्दी और राम को वनवास मांगती हैं। यह सुनकर राजा हतप्रभ रह जाते हैं और दुखी मन से रानी के सामने अनुनय विनय करते हैं लेकिन रानी की हठ के आगे उनकी एक नहीं चलती। अंतत: वह असहनीय कष्ट के चलते मूर्छित हो जाते हैं। जब यह समाचार राम को मिलता है तो वह अपने पिता की आज्ञा से सहर्ष ही वन जाने को तैयार हो जाते हैं। वहीं सीताजी और लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने की हठ करते हैं। बल्कल वस्त्र धारणकर राम लक्ष्मण और सीता अपने पिता से अनुमति लेने जाते हैं और पुत्र वियोग में राजा दशरथ हृदय विदीर्ण करने वाला विलाप करते हैं। राम अपने पिता के वचन का मान रखने के लिए राजा दशरथ को बिलखता हुआ महल में छोड़कर वन के लिए रवाना होते हैं।
लीला मंचन में प्रखर मिश्रा, सूर्या नायक, हरिहर मोहन तिवारी, सूर्यकांत त्रिपाठी, बाबूलाल नायक, श्याम स्वरूप पालीवाल, अशोक रिछारिया, रामेश्वर रिछारिया, आशाराम तिवारी, महेंद्र सिंह, कुलदीप खरे, संजय पांडेय, भागचंद्र जैन, रामेश्वर सोनी, कृष्णस्वरूप पटैरिया, जानकी पेंटर, हृदेश गोस्वामी, आनंद त्रिपाठी, मुकेश नायक, सोनू पाठक, रामू तिवारी, सुरेंद्र तिवारी, सौरभ राजा, रजनीश रिछारिया, अमित नायक, मनोज भौंडेले, सतेंद्र भर्ता, डब्बू तिवारी, पवन तिवारी, राजू सेन, सुरेश श्रीवास्तव, शैलेंद्र नायक, शंकर सिंह, महेंद्र सिंह, दिनेश राय, बलराम राय, नीतिंजय सिसौदिया, मानवेंद्र, अभय दुबे, दीपक तिवारी, कृष्णकांत नायक, अखिलेश सोनी, राजबहादुर खरे, सौरभ राजा, शैलेश चतुर्वेदी, अनुज भौंडेले, विक्रम राय, राजू पेंटर, विनीत पुरोहित, कल्लू राजा, विनोद कुशवाहा, हल्लू, धंतू आशुतोष रिछारिया, महिपाल सिंह आदि का सराहनीय सहयोग रहा।
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तत्पश्चात लीला मंचन में राजा दशरथ सभी सभासदों के समक्ष श्रीराम को युवराज पद देने का प्रस्ताव रखते हैं और सभी उस पर अपनी सहमति देते हैं। धूमधाम से राम के राजतिलक की तैयारियां चलती हैं इसी बीच दासी मंथरा जाकर रानी कैकेयी के कान भरती है। तब रानी अपनी दासी मंथरा की बातों में आकर आभूषण आदि त्यागकर कोप भवन में चली जाती हैं। यह समाचार पाकर राजा दशरथ वहां जाते हैं और रानी से इसका कारण पूंछते हैं। रानी कैकेयी तब राजा को पूर्व में दिए गए दो वर मांगने का वचन याद दिलाती हैं। राम की शपथ दिलाकर राजा से दो वर भरत को राजगद्दी और राम को वनवास मांगती हैं। यह सुनकर राजा हतप्रभ रह जाते हैं और दुखी मन से रानी के सामने अनुनय विनय करते हैं लेकिन रानी की हठ के आगे उनकी एक नहीं चलती। अंतत: वह असहनीय कष्ट के चलते मूर्छित हो जाते हैं। जब यह समाचार राम को मिलता है तो वह अपने पिता की आज्ञा से सहर्ष ही वन जाने को तैयार हो जाते हैं। वहीं सीताजी और लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने की हठ करते हैं। बल्कल वस्त्र धारणकर राम लक्ष्मण और सीता अपने पिता से अनुमति लेने जाते हैं और पुत्र वियोग में राजा दशरथ हृदय विदीर्ण करने वाला विलाप करते हैं। राम अपने पिता के वचन का मान रखने के लिए राजा दशरथ को बिलखता हुआ महल में छोड़कर वन के लिए रवाना होते हैं।
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लीला मंचन में प्रखर मिश्रा, सूर्या नायक, हरिहर मोहन तिवारी, सूर्यकांत त्रिपाठी, बाबूलाल नायक, श्याम स्वरूप पालीवाल, अशोक रिछारिया, रामेश्वर रिछारिया, आशाराम तिवारी, महेंद्र सिंह, कुलदीप खरे, संजय पांडेय, भागचंद्र जैन, रामेश्वर सोनी, कृष्णस्वरूप पटैरिया, जानकी पेंटर, हृदेश गोस्वामी, आनंद त्रिपाठी, मुकेश नायक, सोनू पाठक, रामू तिवारी, सुरेंद्र तिवारी, सौरभ राजा, रजनीश रिछारिया, अमित नायक, मनोज भौंडेले, सतेंद्र भर्ता, डब्बू तिवारी, पवन तिवारी, राजू सेन, सुरेश श्रीवास्तव, शैलेंद्र नायक, शंकर सिंह, महेंद्र सिंह, दिनेश राय, बलराम राय, नीतिंजय सिसौदिया, मानवेंद्र, अभय दुबे, दीपक तिवारी, कृष्णकांत नायक, अखिलेश सोनी, राजबहादुर खरे, सौरभ राजा, शैलेश चतुर्वेदी, अनुज भौंडेले, विक्रम राय, राजू पेंटर, विनीत पुरोहित, कल्लू राजा, विनोद कुशवाहा, हल्लू, धंतू आशुतोष रिछारिया, महिपाल सिंह आदि का सराहनीय सहयोग रहा।
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