{"_id":"672bc7c6927abf91ab0a2024","slug":"ram-katha-teaches-ways-to-live-at-home-bhavadev-shastri-lalitpur-news-c-131-1-ltp1001-123527-2024-11-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"घर में रहने के तरीके सिखाती है राम कथा : भवदेव शास्त्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घर में रहने के तरीके सिखाती है राम कथा : भवदेव शास्त्री
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
महरौनी। कथा व्यास आचार्य भवदेव शास्त्री ने कहा कि श्रीराम कथा हमारे मन के संशय को मिटाने वाली है। हमें घर में कैसे रहना चाहिए, घर स्वर्ग कैसे बने, पति-पत्नी का आपसी व्यवहार कैसा हो, यह हमें रामायण से सीखने को मिलता है। वह मंगलवार रात श्रीराम कथा सद्भावना मंच से कथा का वर्णन कर रहे थे।
आर्य समाज के तत्वावधान में महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती एवं आर्य समाज के 150वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा में आचार्य ने राम विवाह के प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि विवाह संस्कार धार्मिक कार्यक्रम है, जिसे हम लोगों ने भुला दिया है।
अब विवाह में दूसरे खर्चे हम ज्यादा करते हैं और वैवाहिक संस्कार पर ध्यान नहीं देते। जब वर और वधू का विवाह होता है, उस समय पंडित जी जो मंत्र बोलते हैं, वह हमारे जीवन के लिए बड़े उपयोगी हैं। विवाह संस्कार में हम प्रतिज्ञा करते हैं कि पति-पत्नी कभी भी छिपकर कोई कार्य नहीं करेंगे, एक दूसरे का सम्मान करेंगे, एक दूसरे से पूछ कर काम करेंगे, एक दूसरे के माता-पिता का सम्मान करेंगे आदि।
विज्ञापन
आचार्य ने कहा कि श्रीराम ने अपनी वीरता और शौर्य से धनुष तोड़कर सीता जी का वरण किया। तुम उठो सिया शृंगार करो अब धनुष राम ने तोड़ा है...भजन पर सभी भक्त भाव विभोर हो गए। कथा में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कृष्णा सिंह, रितेश बड़ोनिया, मुनि पुरुषोत्तम नारायण दुबे, भानू प्रताप सिंह राजा भैया, हर प्रसाद प्रजापति, सुरेश प्रजापति, रामकुमार सेन आदि मौजूद रहे। संचालन शिक्षक लखन लाल आर्य एवं आभार उप प्रधान हर प्रसाद प्रजापति ने व्यक्त किया।
विज्ञापन
महरौनी। कथा व्यास आचार्य भवदेव शास्त्री ने कहा कि श्रीराम कथा हमारे मन के संशय को मिटाने वाली है। हमें घर में कैसे रहना चाहिए, घर स्वर्ग कैसे बने, पति-पत्नी का आपसी व्यवहार कैसा हो, यह हमें रामायण से सीखने को मिलता है। वह मंगलवार रात श्रीराम कथा सद्भावना मंच से कथा का वर्णन कर रहे थे।
आर्य समाज के तत्वावधान में महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती एवं आर्य समाज के 150वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा में आचार्य ने राम विवाह के प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि विवाह संस्कार धार्मिक कार्यक्रम है, जिसे हम लोगों ने भुला दिया है।
विज्ञापन
अब विवाह में दूसरे खर्चे हम ज्यादा करते हैं और वैवाहिक संस्कार पर ध्यान नहीं देते। जब वर और वधू का विवाह होता है, उस समय पंडित जी जो मंत्र बोलते हैं, वह हमारे जीवन के लिए बड़े उपयोगी हैं। विवाह संस्कार में हम प्रतिज्ञा करते हैं कि पति-पत्नी कभी भी छिपकर कोई कार्य नहीं करेंगे, एक दूसरे का सम्मान करेंगे, एक दूसरे से पूछ कर काम करेंगे, एक दूसरे के माता-पिता का सम्मान करेंगे आदि।
विज्ञापन
आचार्य ने कहा कि श्रीराम ने अपनी वीरता और शौर्य से धनुष तोड़कर सीता जी का वरण किया। तुम उठो सिया शृंगार करो अब धनुष राम ने तोड़ा है...भजन पर सभी भक्त भाव विभोर हो गए। कथा में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कृष्णा सिंह, रितेश बड़ोनिया, मुनि पुरुषोत्तम नारायण दुबे, भानू प्रताप सिंह राजा भैया, हर प्रसाद प्रजापति, सुरेश प्रजापति, रामकुमार सेन आदि मौजूद रहे। संचालन शिक्षक लखन लाल आर्य एवं आभार उप प्रधान हर प्रसाद प्रजापति ने व्यक्त किया।