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Lalitpur News: मां ने पाला, भारत मां को संभाल रहे
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। पाकिस्तान से तनाव के बीच कश्मीर के अखनूर बाॅर्डर पर ललितपुर का बेटा भी दुश्मनों से लोहा ले रहा है। लगभग इक्कीस वर्ष से वह आर्मी में रहकर देश के लिए सेवाएं दे रहा है। परिवारजन ने कहा कि वे चिंतित तो हैं, लेकिन उन्हें बेटे पर गर्व है कि वो देश के लिए लड़ रहा है। सिग्नल कोर
शहर के मोहल्ला नदीपुरा निवासी अजय कुशवाहा ने वर्ष 2004 में आर्मी ज्वाइन की थी। उन्होंने विदेशों में भी जाकर संचार सेवाओं में ट्रेनिंग ली है। लगभग छह माह पहले कोलकाता में नए जवानों को ट्रेनिंग देने भी गए थे। अब वह कश्मीर के अखनूर बॉर्डर पर तैनात हैं। वह फरवरी में 15 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। उन्होंने एमएससी के साथ ही एनसीसी भी की थी और पढ़ाई के दौरान से ही वह आर्मी में जाना चाहते थे।
अजय के पिता अधिवक्ता जगदीश कुशवाहा ने बताया कि उनका बेटा दुश्मनों को निश्चित रूप से धूल चटाएगा। वह कहते हैं कि बॉर्डर पर युद्ध की स्थिति होने पर उन्हें बेटे की चिंता तो सताती है, लेकिन बेटे पर फख्र भी है कि वह सीमा पर युद्ध के लिए तैयार खड़ा है। उनके पिता ने बताया कि अजय शुरू से ही फाैज में जाना चाहता था। अजय का छोटा भाई डॉक्टर है, जबकि एक भाई इंजीनियर है। अजय की एक बेटी है, जो पढ़ाई कर रही है।
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आपातकाल में पिता गए थे जेल : देश में आपातकाल के दौरान वर्ष 1975 में अजय कुशवाहा के पिता जगदीश कुशवाहा को जेल जाना पड़ा था और हाईकोर्ट के आदेश पर छोड़े गए थे। प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार बनने के बाद आपातकाल में जेल जाने वालों को लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिया गया था। इसके लिए उन्हें भी बीस हजार रुपये पेंशन मिल रही है।
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ललितपुर। पाकिस्तान से तनाव के बीच कश्मीर के अखनूर बाॅर्डर पर ललितपुर का बेटा भी दुश्मनों से लोहा ले रहा है। लगभग इक्कीस वर्ष से वह आर्मी में रहकर देश के लिए सेवाएं दे रहा है। परिवारजन ने कहा कि वे चिंतित तो हैं, लेकिन उन्हें बेटे पर गर्व है कि वो देश के लिए लड़ रहा है। सिग्नल कोर
शहर के मोहल्ला नदीपुरा निवासी अजय कुशवाहा ने वर्ष 2004 में आर्मी ज्वाइन की थी। उन्होंने विदेशों में भी जाकर संचार सेवाओं में ट्रेनिंग ली है। लगभग छह माह पहले कोलकाता में नए जवानों को ट्रेनिंग देने भी गए थे। अब वह कश्मीर के अखनूर बॉर्डर पर तैनात हैं। वह फरवरी में 15 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। उन्होंने एमएससी के साथ ही एनसीसी भी की थी और पढ़ाई के दौरान से ही वह आर्मी में जाना चाहते थे।
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अजय के पिता अधिवक्ता जगदीश कुशवाहा ने बताया कि उनका बेटा दुश्मनों को निश्चित रूप से धूल चटाएगा। वह कहते हैं कि बॉर्डर पर युद्ध की स्थिति होने पर उन्हें बेटे की चिंता तो सताती है, लेकिन बेटे पर फख्र भी है कि वह सीमा पर युद्ध के लिए तैयार खड़ा है। उनके पिता ने बताया कि अजय शुरू से ही फाैज में जाना चाहता था। अजय का छोटा भाई डॉक्टर है, जबकि एक भाई इंजीनियर है। अजय की एक बेटी है, जो पढ़ाई कर रही है।
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आपातकाल में पिता गए थे जेल : देश में आपातकाल के दौरान वर्ष 1975 में अजय कुशवाहा के पिता जगदीश कुशवाहा को जेल जाना पड़ा था और हाईकोर्ट के आदेश पर छोड़े गए थे। प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार बनने के बाद आपातकाल में जेल जाने वालों को लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिया गया था। इसके लिए उन्हें भी बीस हजार रुपये पेंशन मिल रही है।