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Lalitpur News: हॉकी छोड़ मुक्केबाजी में आए प्रियांशु ने राज्य चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण
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झांसी। आठ महीने पहले तक हॉकी खेलने वाले महाराजा बाल मंदिर नंदनपुरा के छात्र प्रियांशु यादव ने मुक्केबाजी में ऐसा हाथ आजमाया कि महज कुछ महीनों में राज्य चैंपियन बन गए। अंडर-14 वर्ग में खेल रहे प्रियांशु ने 70वीं राज्य स्तरीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया।
प्रियांशु ने करीब आठ महीने पहले हीरोज मैदान में बॉक्सिंग की शुरुआत की थी। इससे पहले वह हॉकी खेलते थे। उनके पिता सेना में सूबेदार रहे हैं और अब सेवानिवृत्त हैं। पिता और मामा की मुक्केबाजी में रुचि ने प्रियांशु को इस खेल की ओर खींचा। शुरुआत के कुछ ही समय बाद उन्होंने साई के ट्रायल में हिस्सा लिया और चयन जोधपुर स्थित साईं एसटीसी हॉस्टल के लिए हो गया। करीब छह महीने से वह वह नियमित प्रशिक्षण ले रहे हैं।
खेल के शुरुआती सफर में एक बार सहारनपुर में आयोजित प्रतियोगिता में प्रियांशु को हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने उन्हें रोकने के बजाय और मजबूत किया। इसके बाद उन्होंने अभ्यास की रफ्तार बढ़ाई और कोच पारस साहू के मार्गदर्शन में तकनीक व फिटनेस पर मेहनत की। लगातार अभ्यास का परिणाम रहा कि उनका चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ और उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
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प्रियांशु के लिए यह पदक महज एक जीत नहीं, बल्कि बड़े लक्ष्य की पहली सीढ़ी है। वह कहते हैं कि ओलंपिक में खेलना उनका सपना है। इसके साथ ही पिता की तरह सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने की इच्छा भी उनके मन में है। पढ़ाई और खेल के साथ वह अब जोधपुर में अपने प्रशिक्षण को और मजबूत करने में जुटे हैं।
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प्रियांशु ने करीब आठ महीने पहले हीरोज मैदान में बॉक्सिंग की शुरुआत की थी। इससे पहले वह हॉकी खेलते थे। उनके पिता सेना में सूबेदार रहे हैं और अब सेवानिवृत्त हैं। पिता और मामा की मुक्केबाजी में रुचि ने प्रियांशु को इस खेल की ओर खींचा। शुरुआत के कुछ ही समय बाद उन्होंने साई के ट्रायल में हिस्सा लिया और चयन जोधपुर स्थित साईं एसटीसी हॉस्टल के लिए हो गया। करीब छह महीने से वह वह नियमित प्रशिक्षण ले रहे हैं।
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खेल के शुरुआती सफर में एक बार सहारनपुर में आयोजित प्रतियोगिता में प्रियांशु को हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने उन्हें रोकने के बजाय और मजबूत किया। इसके बाद उन्होंने अभ्यास की रफ्तार बढ़ाई और कोच पारस साहू के मार्गदर्शन में तकनीक व फिटनेस पर मेहनत की। लगातार अभ्यास का परिणाम रहा कि उनका चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ और उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
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प्रियांशु के लिए यह पदक महज एक जीत नहीं, बल्कि बड़े लक्ष्य की पहली सीढ़ी है। वह कहते हैं कि ओलंपिक में खेलना उनका सपना है। इसके साथ ही पिता की तरह सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने की इच्छा भी उनके मन में है। पढ़ाई और खेल के साथ वह अब जोधपुर में अपने प्रशिक्षण को और मजबूत करने में जुटे हैं।