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Lalitpur News: प्रसूताओं को समय से पहले किया जा रहा डिस्चार्ज
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं को बेड की कमी से जूझना पड़ रहा है। यहां स्वीकृत 60 बेड के मुकाबले महज 35 बेड की व्यवस्था है। प्रसूताओं को निर्धारित समय से पहले ही डिस्चार्ज किया जा रहा है। इससे जच्चा व बच्चा के संक्रमित होने का खतरा बना हुआ है। यह स्थिति दो सप्ताह से है।
महिला अस्पताल में प्रसव के बाद प्रसूताओं को भर्ती करने के लिए दो प्रकार के वार्ड हैं। सर्जिकल वार्ड में सिजेरियन प्रसव वाली महिलाओं को व पीएनसी वार्ड में सामान्य प्रसव वाली महिलाओं को भर्ती किया जाता है। दोनों वार्डों में 56 प्रसूताओं को भर्ती करने की सुविधा है।
लेकिन, वर्तमान में पीएनसी वार्ड की मरम्मत के चलते समस्या बढ़ गई है। स्थिति यह है कि सर्जिकल वार्ड में ही 18 की जगह सात पलंग और बढ़ा कर सिजेरियन व सामान्य प्रसव वाली प्रसूताओं को भर्ती किया जा रहा है। इससे भीड़ बढ़ गई है।
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भीड़ बढ़ने से संक्रमण का खतरा
सर्जिकल वार्ड में प्रसूताओं को लिए सभी प्रकार की सुविधाएं की गई हैं। तीमारदारों को भी निश्चित संख्या में ही अंदर जाने की अनुमति दी जाती है। लेकिन, अब भीड़ बढ़ गई है, इससे संक्रमण से बचाव की व्यवस्थाएं भी धराशायी हो गई हैं। सिजेरियन प्रसव वाली प्रसूताएं को सात दिन की जगह चार से पांच दिन में डिस्चार्ज किया जा रहा है।
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ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं को बेड की कमी से जूझना पड़ रहा है। यहां स्वीकृत 60 बेड के मुकाबले महज 35 बेड की व्यवस्था है। प्रसूताओं को निर्धारित समय से पहले ही डिस्चार्ज किया जा रहा है। इससे जच्चा व बच्चा के संक्रमित होने का खतरा बना हुआ है। यह स्थिति दो सप्ताह से है।
महिला अस्पताल में प्रसव के बाद प्रसूताओं को भर्ती करने के लिए दो प्रकार के वार्ड हैं। सर्जिकल वार्ड में सिजेरियन प्रसव वाली महिलाओं को व पीएनसी वार्ड में सामान्य प्रसव वाली महिलाओं को भर्ती किया जाता है। दोनों वार्डों में 56 प्रसूताओं को भर्ती करने की सुविधा है।
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लेकिन, वर्तमान में पीएनसी वार्ड की मरम्मत के चलते समस्या बढ़ गई है। स्थिति यह है कि सर्जिकल वार्ड में ही 18 की जगह सात पलंग और बढ़ा कर सिजेरियन व सामान्य प्रसव वाली प्रसूताओं को भर्ती किया जा रहा है। इससे भीड़ बढ़ गई है।
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भीड़ बढ़ने से संक्रमण का खतरा
सर्जिकल वार्ड में प्रसूताओं को लिए सभी प्रकार की सुविधाएं की गई हैं। तीमारदारों को भी निश्चित संख्या में ही अंदर जाने की अनुमति दी जाती है। लेकिन, अब भीड़ बढ़ गई है, इससे संक्रमण से बचाव की व्यवस्थाएं भी धराशायी हो गई हैं। सिजेरियन प्रसव वाली प्रसूताएं को सात दिन की जगह चार से पांच दिन में डिस्चार्ज किया जा रहा है।