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Lalitpur News: मध्य प्रदेश के सागर-खुरई में पुलिस खंगालेगी अचल संपत्ति व अभिलेख

Sun, 18 Jan 2026 01:01 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jan 2026 01:01 AM IST
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Police to search immovable properties and records in Sagar-Khurai, Madhya Pradesh
फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट : एसआईटी टीम ने बढ़ाया जांच का दायरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। अमेरिका में रहने वाले बहनोई डॉ. राजीव गुप्ता की चिकित्सकीय डिग्री व पहचान का इस्तेमाल कर मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट की नौकरी करने वाले अभिनव सिंह के मामले की जांच एसआईटी ने तेज कर दी है। अब पुलिस की टीम मध्य प्रदेश के सागर, खुरई सहित अन्य जगह जाकर अभिनव सिंह की अचल संपत्ति को खंगालेगी। इसके साथ ही अभिलेख को भी तलाशा जाएगा।
मेडिकल कॉलेज में तीन साल तक फर्जी तरीके से नौकरी करने के आरोप में गिरफ्तार अभिनव सिंह की गहनता से जांच कर धोखाधड़ी की परतें खोलने में पुलिस जुटी हुई है। पुलिस की टीमों ने उसके शैक्षिक अभिलेख को कोलकाता, मथुरा, रूड़की, फर्रुखाबाद और अलीगढ़ में जाकर संग्रहित किया था। इसके साथ अभिनव सिंह द्वारा डॉ. राजीव गुप्ता के नाम से तैयार किए गए आधार कार्ड, पेनकार्ड, शस्त्र लाइसेंस, बैंक पासबुक, पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य अभिलेख संग्रहित कर जांच करने में जुटी हुई है।
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इस मामले की जांच के लिए सीओ सदर अजय कुमार के नेतृत्व में गठित एसआईटी टीम अब जांच का दायरा बढ़ाएगी। इसके लिए पुलिस की टीम ऐसे स्थानों पर भी जांच करने जाएगी, जहां वर्ष 1999 में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज होने के बाद सीबीआई से बचने के लिए अभिनव 2019 तक छिपकर रह रहा था। अब टीमें मध्य प्रदेश के जनपद सागर, खुरई, बीना सहित अन्य स्थानों पर जाएगी। यहां टीम अभिनव सिंह की अचल संपत्ति सहित अन्य अभिलेखों को खंगालेगी।
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खुरई में अभिनव सिंह के जमीन-जायदाद हैं। सागर, बीना में उसने डॉ. राजीव गुप्ता बनकर चिकित्सकीय कार्य किया था। पुलिस अधीक्षक मोहम्मद मुश्ताक ने बताया कि इस केस की जांच एसआईटी गहनता के साथ कर रही है। पुलिस की टीमें एमपी के सागर, खुरई सहित अन्य स्थानों पर जाकर जांच पड़ताल कर साक्ष्य संकलित करेगी।

ऐसे बना था अभिनव सिंह से डॉ. राजीव गुप्ता
अभिनव सिंह ने रुड़की आईआईटी से बीई कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की थी। तीन वर्ष तक तैयारी के बाद अभिनव सिंह का चयन कस्टम ऑफिसर के रूप में हुआ था। 1999 में उसके खिलाफ मुंबई में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज हुआ तो वह भाग गया था। सीबीआई से बचने के लिए वह 20 साल तक पहचान छिपाकर रहा। इस बीच उसने अमेरिका में रहने वाले बहनोई डॉ. राजीव गुप्ता की पहचान चुराई और उनके नाम से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर लिया। वर्ष 2019 में सीबीआई ने उसे मथुरा के मेडिकल कॉलेज में नौकरी करते समय गिरफ्तार कर मुंबई जेल भेजा था। 16 माह जेल में बिताने के बाद जुलाई 2020 में जेल से छूटा था।

वर्ष 2022 में ललितपुर मेडिकल कॉलेज में संविदा पर हृदय रोग विशेषज्ञ के पद के लिए डॉ. राजीव गुप्ता के नाम से आवेदन कर दिया और कार्डियालॉजिस्ट की नौकरी पा ली। तीन साल तक नौकरी करने के बाद अमेरिका से आई बहन ने डॉ. राजीव गुप्ता बनकर नौकरी कर रहे अभिनव सिंह की पूरी पोल खोल दी थी।
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