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Lalitpur News: कीटनाशकों के अवशेष नदी, तालाबों को कर रहे प्रदूषित
Sat, 12 Sep 2026 01:53 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Updated Sat, 12 Sep 2026 01:53 AM IST
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ललितपुर। कृषि विज्ञान केंद्र में एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी। इसका उद्देश्य रासायनिक पदार्थों का प्रयोग कम करना है।
नमामि गंगे के तत्वावधान में जिला गंगा समिति ने कृषि विभाग के सहयोग से यह कार्यशाला आयोजित की। विशेषज्ञों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अवशेष जल स्रोतों को प्रदूषित करते हैं। ये अवशेष वर्षा या सिंचाई के पानी के साथ बहकर नालों, तालाबों और नदियों तक पहुंचते हैं। इससे जल स्रोतों के प्रदूषण का खतरा बढ़ता है। प्राकृतिक खेती से रासायनिक पदार्थों का उपयोग कम होगा। यह मृदा स्वास्थ्य और जल स्रोतों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। किसानों से इन तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया गया।कार्यशाला में किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकें बताई गईं। इनमें जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत शामिल थे। आच्छादन और मिश्रित फसल प्रणाली के उपयोग पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। किसानों को सरकारी योजनाओं, उन्नत बीजों और खाद प्रबंधन के बारे में भी बताया गया। कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. मुकेश चंद,उप निदेशक कृषि अख्तर हुसैन, विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. दिनेश तिवारी ,डॉ. सरिता देवी ने किसानों को जानकारी दी। इस मौके पर डॉ. विकास मंडलोई, पुष्पेंद्र पुरोहित,अंकेश यादव आदि मौजूद रहे। जिला गंगा समिति के जिला परियोजना अधिकारी केतन दुबे ने कार्यशाला का संचालन किया।
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नमामि गंगे के तत्वावधान में जिला गंगा समिति ने कृषि विभाग के सहयोग से यह कार्यशाला आयोजित की। विशेषज्ञों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अवशेष जल स्रोतों को प्रदूषित करते हैं। ये अवशेष वर्षा या सिंचाई के पानी के साथ बहकर नालों, तालाबों और नदियों तक पहुंचते हैं। इससे जल स्रोतों के प्रदूषण का खतरा बढ़ता है। प्राकृतिक खेती से रासायनिक पदार्थों का उपयोग कम होगा। यह मृदा स्वास्थ्य और जल स्रोतों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। किसानों से इन तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया गया।कार्यशाला में किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकें बताई गईं। इनमें जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत शामिल थे। आच्छादन और मिश्रित फसल प्रणाली के उपयोग पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। किसानों को सरकारी योजनाओं, उन्नत बीजों और खाद प्रबंधन के बारे में भी बताया गया। कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. मुकेश चंद,उप निदेशक कृषि अख्तर हुसैन, विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. दिनेश तिवारी ,डॉ. सरिता देवी ने किसानों को जानकारी दी। इस मौके पर डॉ. विकास मंडलोई, पुष्पेंद्र पुरोहित,अंकेश यादव आदि मौजूद रहे। जिला गंगा समिति के जिला परियोजना अधिकारी केतन दुबे ने कार्यशाला का संचालन किया।
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