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Lalitpur News: शहजाद बांध की स्प्रिंकलर योजना का रास्ता साफ, टीम ने किया निरीक्षण
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। भारत सरकार में उपवन महानिरीक्षक डॉ प्राची गंगवार ने शहजाद बांध का निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि सिंचाई व विद्युत विभाग ने वन और पर्यावरण विभाग की अनापत्ति की कार्रवाई पूर्ण कर ली है, लेकिन इसे विभागीय साइट पर अपलोड नहीं किया गया है, जिससे अनुमति नहीं मिल पाई।
तालबेहट क्षेत्र में शहजाद बांध पर शासन ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजना का निर्माण 90 करोड़ की लागत से कराया था। इससे ग्राम पारौन, रजपुरा, बरौदाडांग की करीब 1014 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित किया जाना था। यहां पंप हाउस के साथ बिजली का सबस्टेशन बनाया गया है, इसके लिए कल्यानपुरा फीडर से बिजली की लाइन बिछाई जानी है। इस 39 किलोमीटर लंबी लाइन के दायरे में छह से सात किलोमीटर भूमि वन विभाग के क्षेत्र में आती है। वर्ष 2023 में विद्युत लाइन बिछाने के लिए खंभे लगाए गए थे, वन विभाग ने इन खंबों को हटा दिया था। इसके बाद सिंचाई विभाग ने वन विभाग में आवेदन किया था। लेकिन लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी वनविभाग ने एनओसी जारी नहीं की थी।
अमर उजाला ने नौ अप्रैल को पृष्ठ संख्या दो पर लटकी शहजाद स्प्रिंकलर परियोजना... खंभे लगाने की अनुमति नहीं, शीर्षक से खबर का प्रकाशन किया था। इसका संज्ञान लेकर जनपद स्तर के अधिकारियों ने शासन व भारत सरकार के अधिकारियों से पत्राचार कर वार्ता की। शुक्रवार को भारत सरकार से उपवन महानिरीक्षक भारत सरकार पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय एकीकृत डॉ प्राची गंगवार ने सिंचाई विभाग की पूरी पत्रावली व निर्धारित मानकों का अवलोकन किया। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को एनओसी की पूरी कार्रवाई के विषय में अवगत कराया। निरीक्षण के दौरान प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी गौतम सिंह, अधिशासी अभियंता विद्युत माध्यमिक कार्यखंड झांसी धर्मेंद्र कुमार, उपखंड अधिकारी सिंचाई विभाग संजय गौतम, राजेश कुमार मिश्रा, कुलदीप कंचन व आशीष आनंद मौजूद रहे।
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ललितपुर। भारत सरकार में उपवन महानिरीक्षक डॉ प्राची गंगवार ने शहजाद बांध का निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि सिंचाई व विद्युत विभाग ने वन और पर्यावरण विभाग की अनापत्ति की कार्रवाई पूर्ण कर ली है, लेकिन इसे विभागीय साइट पर अपलोड नहीं किया गया है, जिससे अनुमति नहीं मिल पाई।
तालबेहट क्षेत्र में शहजाद बांध पर शासन ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजना का निर्माण 90 करोड़ की लागत से कराया था। इससे ग्राम पारौन, रजपुरा, बरौदाडांग की करीब 1014 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित किया जाना था। यहां पंप हाउस के साथ बिजली का सबस्टेशन बनाया गया है, इसके लिए कल्यानपुरा फीडर से बिजली की लाइन बिछाई जानी है। इस 39 किलोमीटर लंबी लाइन के दायरे में छह से सात किलोमीटर भूमि वन विभाग के क्षेत्र में आती है। वर्ष 2023 में विद्युत लाइन बिछाने के लिए खंभे लगाए गए थे, वन विभाग ने इन खंबों को हटा दिया था। इसके बाद सिंचाई विभाग ने वन विभाग में आवेदन किया था। लेकिन लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी वनविभाग ने एनओसी जारी नहीं की थी।
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अमर उजाला ने नौ अप्रैल को पृष्ठ संख्या दो पर लटकी शहजाद स्प्रिंकलर परियोजना... खंभे लगाने की अनुमति नहीं, शीर्षक से खबर का प्रकाशन किया था। इसका संज्ञान लेकर जनपद स्तर के अधिकारियों ने शासन व भारत सरकार के अधिकारियों से पत्राचार कर वार्ता की। शुक्रवार को भारत सरकार से उपवन महानिरीक्षक भारत सरकार पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय एकीकृत डॉ प्राची गंगवार ने सिंचाई विभाग की पूरी पत्रावली व निर्धारित मानकों का अवलोकन किया। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को एनओसी की पूरी कार्रवाई के विषय में अवगत कराया। निरीक्षण के दौरान प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी गौतम सिंह, अधिशासी अभियंता विद्युत माध्यमिक कार्यखंड झांसी धर्मेंद्र कुमार, उपखंड अधिकारी सिंचाई विभाग संजय गौतम, राजेश कुमार मिश्रा, कुलदीप कंचन व आशीष आनंद मौजूद रहे।
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