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Lalitpur News: पेशगी की धनराशि समायोजित कर ईंट-गुम्मों की आपूर्ति करने का आदेश
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उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अदालत ने सुनाया निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। उपभोक्ता फोरम की अदालत ने समय सीमा बीतने के बाद भी ईंट-गुम्मों की आपूर्ति न करने पर व्यापारी को 45 दिन में पेशगी की धनराशि को समायोजित कर ईंट-गुम्मा देने के आदेश दिए हैं।
तालबेहट तहसील के ग्राम मथुराडांग निवासी मनोज कुमार ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अदालत में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उसे अपना मकान बनाने एवं अन्य निर्माण कार्यों के लिए ईंट-गुम्मों की आवश्यकता थी। इसलिए उसने तालबेहट के ग्राम खांदी निवासी साकूलाल पुत्र गोरेलाल कुशवाहा को 27 जनवरी 2018 को पांच हजार रुपये प्रति हजार गुम्मे के मूल्य पर एक लाख गुम्मे पांच वर्ष की अवधि में बनाकर देने के लिए कहा। इसके लिए उसी दिन पेशगी में तीन लाख रुपये नकद दिए। शेष धनराशि ईंटों की आपूर्ति करने के बाद देना तय हुआ था।
विपक्षी गुम्मों की आपूर्ति के लिए आश्वासन दे रहा था लेकिन बार-बार कहने के बाद भी गुम्मों की आपूर्ति नहीं कर रहा था। अदालत ने 45 दिन के अंदर पीड़ित को पेशगी में ली गई धनराशि तीन लाख रुपये को समायोजित कर एक लाख गुम्मे परिवादी को आपूर्ति करने का निर्देश दिया। यदि वह आपूर्ति करने में असफल रहा तो पेशगी की धनराशि पर सात फीसदी साधारण वार्षिक ब्याज देना होगा। मानसिक पीड़ा के लिए दस हजार रुपये भी अदा करना होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। उपभोक्ता फोरम की अदालत ने समय सीमा बीतने के बाद भी ईंट-गुम्मों की आपूर्ति न करने पर व्यापारी को 45 दिन में पेशगी की धनराशि को समायोजित कर ईंट-गुम्मा देने के आदेश दिए हैं।
तालबेहट तहसील के ग्राम मथुराडांग निवासी मनोज कुमार ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अदालत में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उसे अपना मकान बनाने एवं अन्य निर्माण कार्यों के लिए ईंट-गुम्मों की आवश्यकता थी। इसलिए उसने तालबेहट के ग्राम खांदी निवासी साकूलाल पुत्र गोरेलाल कुशवाहा को 27 जनवरी 2018 को पांच हजार रुपये प्रति हजार गुम्मे के मूल्य पर एक लाख गुम्मे पांच वर्ष की अवधि में बनाकर देने के लिए कहा। इसके लिए उसी दिन पेशगी में तीन लाख रुपये नकद दिए। शेष धनराशि ईंटों की आपूर्ति करने के बाद देना तय हुआ था।
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विपक्षी गुम्मों की आपूर्ति के लिए आश्वासन दे रहा था लेकिन बार-बार कहने के बाद भी गुम्मों की आपूर्ति नहीं कर रहा था। अदालत ने 45 दिन के अंदर पीड़ित को पेशगी में ली गई धनराशि तीन लाख रुपये को समायोजित कर एक लाख गुम्मे परिवादी को आपूर्ति करने का निर्देश दिया। यदि वह आपूर्ति करने में असफल रहा तो पेशगी की धनराशि पर सात फीसदी साधारण वार्षिक ब्याज देना होगा। मानसिक पीड़ा के लिए दस हजार रुपये भी अदा करना होगा।
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