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प्रभु चरणों में समर्पण ही जीवन का विश्राम: संत मोरारी बापू

Sun, 01 May 2022 12:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 01 May 2022 12:57 AM IST
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morari bapu
ललितपुर। प्रख्यात संत मोरारी बापू ने कहा कि रामायण सागर जैसा ग्रंथ है। इसमें वाल्मीकि रामायण अदभुत है। वहीं, गोस्वामी तुलसीदास ने सरल, सहज आम बोलचाल वाली भाषा में रामचरित मानस की रचना कर ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने का अवसर दिया। वह शनिवार को चौकाबाग में आयोजित श्री रामकथा के शुभारंभ पर बोल रहे थे।
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अंतर्राष्ट्रीय रामकथाकार मोरारी बापू ने जीवन का दर्शन बताते हुए कहा कि जीवन में परम विश्राम की स्थिति आ जाए तो यह जीवन सार्थक हो जाएगा। विश्राम का अर्थ है कि सबका हाथ छोडकर किसी एक का चरण पकडा जाए। यदि यह जीवन में आ जाए तो विश्राम स्वत: आ जाएगा। जैसे विकास का सू़त्र है कि किसी का पांव न पकडकर पिछडे, दलित, वंचित का हाथ पकडा जाए, सबके साथ जुटने से विकास संभव है।
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उन्होंने सतुआ बाबा के आग्रह को इस कथा के आयोजित होने का कारण बताते हुए कहा कि बाबा की जन्मस्थली में कोरोनाकाल के बाद भव्य कथा संपन्न हो रही है। उन्होंने कथा का मूल्य विषय मानस प्रथम सोपान बालकांड की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीरामचरित मानस के मंगलाचरण में सात श्लोक हैं, यह सात श्लोक सात समुद्र के समान हैं, अर्थात यह ग्रंथ सागर से भी गहरा है। संगीत के सात सुर होते हैं, यह सभी सुरों में गाया जा सकता है। कहने का तात्पर्य है कि सात का अंक बडा अदभुत है। ग्रंथ का मंगलाचरण सात की प्रमुख वंदना है। आप किसी से प्रेम करते हैं तो उसके आंसू दिखना चाहिए। गुरू आंसू देखता है जबकि दुनिया आंसू कहां देखती है, वह तो आंसू देती है। जो परम साधू होता है कि वह आंसू पोछता है। इससे पहले संत मोरारी बापू ग्राम मसौराकलां में सतुआ बाबा की जन्मस्थली पर पहुंचे और उनके परिजनों व ग्रामीणों से मिले। इस दौरान लोगों ने उनका आर्शीवाद प्राप्त किया। इस मौके पर महामंडलेश्वर संतोषदास सतुआ महाराज, गंगादास महाराज, रामलखनदास महाराज, सदर विधायक रामरतन कुशवाहा,मुख्य जजमान हर्षा गोहिल, अजय गोहिल, संजय गोहिल आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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शिव मंदिर में किया जलाभिषेक और गुरुद्धारा में माथा टेका
संत मोरारी बापू शनिवार सुबह नृसिंह मंदिर पहुंच जहां भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इसके बाद श्री तुवन मंदिर पहुंचे जहां तुवन सरकार के दर्शन किए। रामराजा मंदिर में उन्होंने श्री राम दरवार में जाकर आराधना की। जगदीश मंदिर के दर्शन करने के बाद गुरूद्वारा साहिब लक्ष्मीपुरा पहुंच कर माथा टेका व कथा की सफलता के लिए अरदास की। इस अवसर पर गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी ने बापू को सरोपा भेट कर सम्मान किया। इस अवसर पर मुख्य ग्रंथि ज्ञानी हरविंदर सिंह ,ज्ञानी परमजीत सिंह ,अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा, संरक्षक जितेंद्र सिंह सलूजा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा, मंत्री मनजीत सिंह, गुरबचन सिंह बिल्ले, वीरेंद्र सिंह बीके, परमजीत सिंह छतवाल ,सुरजीत सिंह सलूजा ,डॉ राजकुमार जैन ,धर्मेंद्र रुपेश सभासद ,ओपी रिछारिया ,मुकेश गुजराती, मैनेजर केदार सिंह पिंटू आदि उपस्थित रहे।

कथा स्थल पर शार्ट सर्किट से छूटी चिंगारी
चाकाबाग स्थित कथास्थल पर पांडाल मेें शार्टसर्किट से चिंगारी छूटी तो अग्निशमन अधिकारी मतलूब हुसैन ने टीम के साथ मौके पर जाकर तत्काल तार काटकर अलग कर दिया। इससे बड़ा हादसा टल गया। गनीमत तो यह रही कि उस समय कथा शुरू नहीं हुई थी।
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