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मिड-डे मील से पल्ला झाड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 May 2016 01:06 AM IST
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school , lalitpur news
- फोटो : demo
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ललितपुर। ग्रीष्मावकाश में मिड-डे मील परोसने की योजना शिक्षकों को रास नहीं आ रही है। शिक्षक संगठनों ने डीएम को मांग पत्र सौंपकर पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने योजना की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान अथवा आंगनबाड़ी केंद्र को देने की मांग की है।
सूखा के कारण ग्रीष्मावकाश में मिड-डे मील योजना को लागू किया गया है। योजना को पूर्व की भांति संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह बात शिक्षकों को रास नहीं आ रही है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेश लिटौरिया ने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम में शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। इसके बाद भी शिक्षकों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें सुनसान रहती हैं, ऐसे में शिक्षिकाओं के साथ कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। वहीं, उत्तर प्रदेशीय पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नीरज चतुर्वेदी का कहना है कि इस समय तेज गर्मी पड़ रही है, जिससे विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति पहले से कम दर्ज की जा रही थी।
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ऐसे में योजना का सफल संचालन मुश्किल है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष रविकांत ताम्रकार ने कहा कि वर्तमान में लू चल रही है, ऐसे में शिक्षक और शिक्षिकाओं के साथ कोई अनहोनी हो सकती है।
तीन संगठनों ने एक मत से योजना की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान अथवा आंगनबाड़ी के हवाले करने की मांग रखी है। इससे योजना के संचालन पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, प्रशासन ने इस पर कोई अभी निर्णय नहीं लिया है।
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सूखा के कारण ग्रीष्मावकाश में मिड-डे मील योजना को लागू किया गया है। योजना को पूर्व की भांति संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह बात शिक्षकों को रास नहीं आ रही है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेश लिटौरिया ने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम में शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। इसके बाद भी शिक्षकों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
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वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें सुनसान रहती हैं, ऐसे में शिक्षिकाओं के साथ कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। वहीं, उत्तर प्रदेशीय पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नीरज चतुर्वेदी का कहना है कि इस समय तेज गर्मी पड़ रही है, जिससे विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति पहले से कम दर्ज की जा रही थी।
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ऐसे में योजना का सफल संचालन मुश्किल है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष रविकांत ताम्रकार ने कहा कि वर्तमान में लू चल रही है, ऐसे में शिक्षक और शिक्षिकाओं के साथ कोई अनहोनी हो सकती है।
तीन संगठनों ने एक मत से योजना की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान अथवा आंगनबाड़ी के हवाले करने की मांग रखी है। इससे योजना के संचालन पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, प्रशासन ने इस पर कोई अभी निर्णय नहीं लिया है।