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मंडी से 46 जिंसों को आन लाइन हो सकेगी खरीद
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 15 Oct 2016 01:23 AM IST
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mandi news lalitpur
- फोटो : demo
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ललितपुर। जनपद की गल्ला मंडी अब हाईटेक होते ही प्रदेश की अन्य 65 मंडियों से जुड़ चुकी है। इसमें गेहूं के अलावा अब अन्य 45 प्रकार की जिंस को भी जोड़ दिया गया है। शीघ्र ही व्यापारियों व किसानों द्वारा राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़कर ऑनलाइन खरीद की जा सकेगी।
सितंबर के अंत तक दो पूरे देश में दो सौ मंडियों को ई-व्यवसाय से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन राज्यों द्वारा मंडी कारोबार को ऑनलाइन करने में विशेष रुचि दिखाने के चलते 10 राज्यों की 250 मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ा जा चुका है। जबकि प्रदेश में ई-व्यवसाय से जुड़ने वाली मंडियों की यह संख्या भी छह से बढ़कर 66 तक पहुंच गई है। जबकि बुंदेलखंड में ललितपुर, झांसी, कोंच, महोबा को जोड़ा गया है। गल्ला मंडी में आ रही जिंसों में अब तक मात्र गेहूं को ही राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ा गया था, लेकिन अब मंडियों की संख्या बढ़ जाने पर मंडी प्रशासन द्वारा मंडी में आने वाली हर प्रकार की जिंसों को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ा जा रहा है।
राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी नेम के अंतर्गत गेहूं, सरसों, उड़द, मूंग, धान, सेब, मिर्च, चना, मटर, मसूर, महुआ, सोयाबीन समेत 46 प्रकार की फसलों को ई-व्यवसाय से जोड़ा गया है। ऐसे में अब किसान व व्यापारियों द्वारा सीधे राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी नेम के माध्यम से जिंस की ऑनलाइन खरीद की जा सकेगी और उस जिंस को नेम से जुड़ने वाली मंडी में कहीं भी खरीदा या बेचा जा सकेगा। इससे किसान सीधे मंडी में बिचौलियों से बच सकेगा, और अपनी जिंस की सही कीमत हासिल कर सकेगा। राष्ट्रीय कृषि बाजार से व्यापारियों व किसानों को भी जोड़ा जा रहा है।
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इसमें अब तक चार दर्जन व्यापारियों व करीब सवा दो सौ किसानों को जोड़ा गया है, जिस पर फिलहाल लोकल स्तर पर ही खरीद प्रक्रिया अपनाई जा रही है। उक्त ऑनलाइन प्रक्रिया से जोड़ने के लिए अधिक से अधिक किसानों व व्यापारियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए किसानों व व्यापारियों से उनके खाते का ब्यौरा भी मांगा जा रहा है। लेकिन किसान व व्यापारी अब भी उक्त प्रक्रियाओं से हिचक रहा है। इसके चलते एनएफसीएल संस्था द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों व मंडियों में शिविर भी लगाएगी और किसानों व व्यापारियों को जागरूक करेगी।
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सितंबर के अंत तक दो पूरे देश में दो सौ मंडियों को ई-व्यवसाय से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन राज्यों द्वारा मंडी कारोबार को ऑनलाइन करने में विशेष रुचि दिखाने के चलते 10 राज्यों की 250 मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ा जा चुका है। जबकि प्रदेश में ई-व्यवसाय से जुड़ने वाली मंडियों की यह संख्या भी छह से बढ़कर 66 तक पहुंच गई है। जबकि बुंदेलखंड में ललितपुर, झांसी, कोंच, महोबा को जोड़ा गया है। गल्ला मंडी में आ रही जिंसों में अब तक मात्र गेहूं को ही राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ा गया था, लेकिन अब मंडियों की संख्या बढ़ जाने पर मंडी प्रशासन द्वारा मंडी में आने वाली हर प्रकार की जिंसों को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ा जा रहा है।
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राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी नेम के अंतर्गत गेहूं, सरसों, उड़द, मूंग, धान, सेब, मिर्च, चना, मटर, मसूर, महुआ, सोयाबीन समेत 46 प्रकार की फसलों को ई-व्यवसाय से जोड़ा गया है। ऐसे में अब किसान व व्यापारियों द्वारा सीधे राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी नेम के माध्यम से जिंस की ऑनलाइन खरीद की जा सकेगी और उस जिंस को नेम से जुड़ने वाली मंडी में कहीं भी खरीदा या बेचा जा सकेगा। इससे किसान सीधे मंडी में बिचौलियों से बच सकेगा, और अपनी जिंस की सही कीमत हासिल कर सकेगा। राष्ट्रीय कृषि बाजार से व्यापारियों व किसानों को भी जोड़ा जा रहा है।
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इसमें अब तक चार दर्जन व्यापारियों व करीब सवा दो सौ किसानों को जोड़ा गया है, जिस पर फिलहाल लोकल स्तर पर ही खरीद प्रक्रिया अपनाई जा रही है। उक्त ऑनलाइन प्रक्रिया से जोड़ने के लिए अधिक से अधिक किसानों व व्यापारियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए किसानों व व्यापारियों से उनके खाते का ब्यौरा भी मांगा जा रहा है। लेकिन किसान व व्यापारी अब भी उक्त प्रक्रियाओं से हिचक रहा है। इसके चलते एनएफसीएल संस्था द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों व मंडियों में शिविर भी लगाएगी और किसानों व व्यापारियों को जागरूक करेगी।