हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजे देवालय

अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 26 Jul 2016 01:06 AM IST
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ललितपुर। सावन के पहले सोमवार को जनपद के सभी शिवमंदिर व देवालय हर-हर महादेव और ओंकार मंत्रों से गूंज उठे। पाली के नीलकंठेश्वर मंदिर, तालबेहट के हजारिया महादेव मंदिर में जहां शिव दर्शनों के लिए श्रद्घालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, वहीं शहर के चंडीमंदिर, घंटाघर स्थित थानेश्वर मंदिर, नेहरुनगर में श्री सिंहवासिनी माता मंदिर समेत दर्जनों मंदिरों में पार्थिव शिवलिंग निर्माण से पूरा जनपद शिवमय हो गया है। कहते हैं कि शिवभक्त अपने शिव की भांग, धतूरा और शहद से पूजा करें तो उन्हें शक्ति और बेहतर स्वास्थ्य प्रदान होगा और उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्री सिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम पर सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण व श्री रुद्र महायज्ञ में सोमवार को श्रद्धालुओं ने 12 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। 
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श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए चंडी पीठाधीश्वर स्वामी चन्द्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि वैसे संपूर्ण सावन माह भगवान भोलेनाथ को समर्पित हैं। इस महीने हमारे 12 ज्योतिर्लिंगों की विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान की बड़ी प्राचीन एवं  पौराणिक परंपरा रही है। रुद्राभिषेक के साथ-साथ महामृत्युंजय का पाठ तथा काल सर्प दोष निवारण की विशेष पूजा का महत्वपूर्ण समय रहता है।
इस दौरान श्रद्धालुओं को लघुरुद्र, महारुद्र अथवा अतिरुद्र पाठ करके सोमवार को शिवजी का व्रत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोमवार के व्रत की पौराणिक मान्यता है। इस व्रत को माता पार्वती ने पति रूप में भगवान शिव को प्राप्त करने के सबसे पहले किया था। प्राचीन काल से इस व्रत को मनोवांछित पति की कामना पूर्ति के लिए कन्याओं के द्वारा रखा जाता है। भगवान शिव की आराधना व व्रत प्रेम, आपसी विश्वास, भाई-चारे और मेलजोल के साथ जीवन जीने का संदेश देता है। बताया कि सोलह सोमवार का व्रत सौभाग्यवती स्त्री अपने पति की लंबी आयु, संतान रक्षा के साथ-साथ अपने भाई की सुख-समृद्धि के लिए भी करती है। 
 
महाराज ने बताया कि पुरुष इस व्रत को संतान प्राप्ति, धन-धान्य और प्रतिष्ठा के लिए कर सकते हैं। सावन सोमवार का व्रत विद्यार्थियों के रखने से ज्ञान में वृद्धि होती है। वहीं, व्यक्तियों की कुंडली में चंद्र ग्रह की शांति के लिए सावन सोमवार के व्रत रखना चाहिए। निराशावाद व मानसिक सुखों में वृद्धि के लिए भी यह व्रत लाभकारी रहता है। इसके अलावा माता के स्वास्थ व मातृ सुख को प्राप्त करने के लिए भी इस व्रत को किया जाता है। इस मौके पर अध्यक्ष सरदार बीके सिंह, विष्णु अग्रवाल, लखनलाल रावत, विजय जैन कल्लू, वीरेंद्र पुरोहित, दीपक सोनी, अनूप मोदी, लखन यादव, अश्विनी पुरोहित, सतेंद्र सिसौदिया, राहुल शुक्ला, मनीष व विवेक लिटौरिया आदि उपस्थित रहें।
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