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होम आइसोलेशन की जगह मजदूर खेतों पर कर रहे काम

Thu, 02 Apr 2020 12:33 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 02 Apr 2020 12:33 AM IST
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lockdown violation, labour in field
ग्राम छपरट में बाहर से आए मजदूरों को प्राथमिक विद्यालय में रोका गया - फोटो : LALITPUR
सिलावन। विकासखंड महरौनी अंतर्गत अनेक गांवों में बड़ी संख्या में मजदूर घर लौट आए हैं। लेकिन, यह मजदूर होम आइसोलेशन की जगह खेतों पर काम कर रहे हैं। ग्राम पंचायत छपरट में 16 मजदूर बाहर से आए हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ चार मजदूर ही निगरानी में रह रहे हैं।
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ग्राम पंचायत सिलावन में लॉकडाउन के बाद 26 मजदूर गांव में लौटे हैं। ग्राम प्रधान प्रकाश नारायण त्रिपाठी ने बताया कि मजदूरों के आने की सूचना प्रशासन को दे दी गई। मजदूरों के ठहरने के लिए अलग स्थान बनाया गया था, किंतु वह खेतों में काम कर रहे हैं। इस तरह ग्राम पठा में ग्राम प्रधान अनीता उपाध्याय ने बताया कि 39 मजदूरों के आने की जानकारी प्रशासन को दे दी गई है। मजदूरों की जांच हो गई है। सभी मजदूर अपने-अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। मजदूरों को सामाजिक दूरियों के उपाए करने को कहा गया है। ग्राम प्रधान गुंदरापुर ग्यासीराम ने बताया कि उनके गांव में आठ मजदूर महानगरों से लौटे, जो अपने परिवार के साथ रहकर खेतों में काम कर रहे हैं। इसकी सूचना प्रशासन को दे दी गई है।
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ग्राम पंचायत सिंदवाहा में 100 से अधिक मजदूर महानगरों से वापस आए हैं और आने का सिलसिला जारी है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि करन सिंह बुंदेला ने बताया कि आने वाले सभी मजदूरों की जानकारी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को समय- समय पर दे रहे हैं। मजदूर अपने परिवार के साथ घरों में रह रहे हैं। ग्राम पंचायत अमौरा प्रधान जयहिंद यादव ने बताया कि उनके गांव में इंदौर से 50 मजदूर ट्रैक्टर-ट्राली से लौटे हैं, जिनकी कहीं पर भी जांच नहीं हुई है। इसकी जानकारी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को दे दी गई है, लेकिन इस ओर प्रशासन ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है। मजदूरों को गांव से बाहर ठहरने को कहा गया, लेकिन वह नहीं माने और खेतों में काम कर रहे हैं। मजदूरों में शामिल परिवार की एक सदस्य को तेज बुखार और खांसी की शिकायत की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दे चुके हैं। लेकिन, अभी तक जांच नहीं हुई है। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। यह मजदूर दिल्ली, अहमदाबाद, इंदौर समेत अन्य महानगरों से लौटकर गांव में आए हैं।
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इसी तरह ग्राम पंचायत में छपरट में 16 मजदूर बाहर से लौटे हैं, जिनके लिए विद्यालय में रुकने की व्यवस्था बनाई गई है। दोनों समय भोजन की व्यवस्था भी है। लेकिन, ग्रामीणों का कहना है कि मजदूर खाना खाकर अपने- अपने घरों में सोने के लिए चले जाते हैं। अन्य ग्रामीणों के साथ फसल की कटाई करते हैं। इससे ग्रामीणों में अपनी सुरक्षा को लेकर भय व्याप्त हैं। ऐसे ही ग्राम समोगर में 25 मजदूर आने की जानकारी ग्राम प्रधान हरगोविंद राय ने दी है। उनका कहना है कि मजदूरों को अलग ठहरने की व्यवस्था होने के बावजूद भी वह अपने घरों में रह रहे हैं। जबकि, प्रशासन ने 14 दिन अलग रहने के निर्देश दिए हैं। यही हाल ग्राम पंचायत जरया का है, यहां 11 मजदूर महानगरों से वापस आए हैं। पलायन करने वाले हर 10 में से तीन में संक्रमण होने की सरकार की आशंका के बीच ग्रामीण इलाकों में यही हालत रही तो कोरोना जैसी महामारी से लड़ाई बहुत कठिन हो सकती है।
ग्वालियर में मजदूरी करने वाला ग्राम जरया निवासी मजदूर संतोष लॉकडाउन के बाद हाल ही में परिवार सहित अपने गांव लौटे और खेतों में कटाई के काम में जुट गए है। उनका कहना है कि यदि 14 दिन के लिए बैठ जाएंगे तो पेट कैसे भरेंगे। वह खेतों में मजदूरी करने को मजबूर हैं।

जिन लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया गया है, उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। सभी को क्वारंटाइन कराया जाएगा। अभी कुछ लोग पैदल गांवों में पहुंच रहे हैं।
- अनिल कुमार मिश्र, अपर जिलाधिकारी
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