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लॉकडाउन का दूसरा चरण सुरक्षित पार, सवाल सेहत का है, आगे भी रहेंगे सतर्क
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ललितपुर। जनपद के चारों ओर सभी जिलों में कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले हैं। लॉकडाउन के द्वितीय चरण का अंतिम दिन शेष रह गया है, ललितपुर जिला यहां के निवासियों की जागरूकता और लाकडाउन के पालन के चलते पूरी तरह से सुरक्षित है। जबकि, बाहर से अब तक यहां पर 9,933 लोग आ चुके हैं, इनमें से 553 ऐसे लोग भी थे, जो दूसरे जिलों के थे, लेकिन जांच के बाद उन्हें बसों द्वारा भेज दिया गया। जिले के 9,380 लोगों को होम क्वारंटीन का समय पूरा होने के बाद घर जाने की अनुमति दी गई है। ऐसे में जिला अब तक पूरी तरह से सुरक्षित है।
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के खतरे ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इससे बचाव के लिए लॉकडाउन किया गया है। लॉकडाउन से करोड़ों मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया। कुछ दिनों तक लोगों ने लॉकडाउन के खुलने और संक्रमण पर नियंत्रण होने का इंतजार किया, लेकिन इसके बाद मजदूरों के सामने बेरोजगारी का संकट मंडराने लगा और बेकार बैठे मजदूरों ने अपने गृह जनपद व घरों की ओर पैदल अथवा साधनों से आना शुरू कर दिया है।
घर पहुंचने से पहले जिला प्रशासन ने उन्हें जनपद की सीमाओं पर रोककर उन्हें क्वारंटाइन में रखकर उनकी स्क्रीनिंग कराई। इसके बाद लक्षण नहीं पाए जाने पर छोड़ दिया गया और घर पर भी गांव के बाहर बने होम क्वारंटाइन में 14 दिन तक एकांतवास में रहना पड़ेगा। जिले की सीमाओं से सटे जनपदों में कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले हैं। लेकिन, लॉकडाउन को 40 दिन बीतने के बाद भी जनपद पूरी तरह से सुरक्षित है। जबकि, यहां पर अब तक बाहर से 9,933 लोग आ चुके हैं, इनमें 553 लोग जो अन्य जिलों के रहने वाले थे, जांच के बाद उन्हें उनके जनपद भेज दिया गया है। जिले के 9,380 लोगों को क्वारंटीन किया गया। इसके बाद उनके लक्षणों की खोज की गई। लक्षण नहीं पाए जाने पर गांव के ही क्वारंटीन सेंटर पर 14 दिनों के लिए एकांतवास में रख दिया गया। जिसके बाद जाने की अनुमति दी जा रही है।
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कोविड- 19 से बचाव के सभी नियमों का पालन किया जा रहा है। बाहर से आने वाले लोगों की जांच कराई जा रही है। इसके बाद उन्हें क्वारंटीन किया जा रहा है। अब तक जनपद में 9,933 लोग बाहर से आए हैं। इनमें 553 अन्य जिलों के लोगों को बसों से बैठाकर उनके गृह जनपद भिजवाया गया है।
- लवकुश मिश्रा
अपर जिलाधिकारी न्यायिक
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कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के खतरे ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इससे बचाव के लिए लॉकडाउन किया गया है। लॉकडाउन से करोड़ों मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया। कुछ दिनों तक लोगों ने लॉकडाउन के खुलने और संक्रमण पर नियंत्रण होने का इंतजार किया, लेकिन इसके बाद मजदूरों के सामने बेरोजगारी का संकट मंडराने लगा और बेकार बैठे मजदूरों ने अपने गृह जनपद व घरों की ओर पैदल अथवा साधनों से आना शुरू कर दिया है।
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घर पहुंचने से पहले जिला प्रशासन ने उन्हें जनपद की सीमाओं पर रोककर उन्हें क्वारंटाइन में रखकर उनकी स्क्रीनिंग कराई। इसके बाद लक्षण नहीं पाए जाने पर छोड़ दिया गया और घर पर भी गांव के बाहर बने होम क्वारंटाइन में 14 दिन तक एकांतवास में रहना पड़ेगा। जिले की सीमाओं से सटे जनपदों में कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले हैं। लेकिन, लॉकडाउन को 40 दिन बीतने के बाद भी जनपद पूरी तरह से सुरक्षित है। जबकि, यहां पर अब तक बाहर से 9,933 लोग आ चुके हैं, इनमें 553 लोग जो अन्य जिलों के रहने वाले थे, जांच के बाद उन्हें उनके जनपद भेज दिया गया है। जिले के 9,380 लोगों को क्वारंटीन किया गया। इसके बाद उनके लक्षणों की खोज की गई। लक्षण नहीं पाए जाने पर गांव के ही क्वारंटीन सेंटर पर 14 दिनों के लिए एकांतवास में रख दिया गया। जिसके बाद जाने की अनुमति दी जा रही है।
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कोविड- 19 से बचाव के सभी नियमों का पालन किया जा रहा है। बाहर से आने वाले लोगों की जांच कराई जा रही है। इसके बाद उन्हें क्वारंटीन किया जा रहा है। अब तक जनपद में 9,933 लोग बाहर से आए हैं। इनमें 553 अन्य जिलों के लोगों को बसों से बैठाकर उनके गृह जनपद भिजवाया गया है।
- लवकुश मिश्रा
अपर जिलाधिकारी न्यायिक