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कड़ेसराकलां में गहराया पेयजल संकट

Tue, 10 May 2016 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 10 May 2016 01:19 AM IST
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Kdesraklan the water crisis deepens
bundelkhand sankt, lalitpur news - फोटो : demo
तालबेहट  (ललितपुर)। ब्लाक तालबहेट के ग्राम कड़ेसराकलां में पानी का संकट दिन- प्रतिदिन विकराल रूप लेता जा रहा है। गांव के लोगों के लिए बनी पानी की टंकी उपयोग हीन साबित हो रही है। पेयजल संकट से जूझ रहे लोग तड़के उठकर पानी जुटाने में लग जाते है।
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गांव की आबादी साढ़े आठ हजार के आसपास है। पंद्रह मजरों में बसे इस गांव में पीने के पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है, इसमें सबसे खराब स्थिति मजरा कतरयाने की है, जहां पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। मजबूरन लोग प्यास बुझाने के लिए एक किमी दूर राजमार्ग के समीप लगे हैंडपंप से पानी ला रहे हैं। ग्रामीण सुबह चार बजे उठ कर पानी भरने में लग जाते हैं, क्योंकि यदि देर हो गई तो इन्हीं फिर तेज धूप में पानी के लिए पसीना बहाना पड़ता है।
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गांव के लोगों को पेयजल आपूर्ति के लिए वर्ष 1970 में पांच हजार लीटर क्षमता की पेयजल टंकी का निर्माण कराया गया था, इससे गांव के लगभग पैंसठ लोगों के घरों में संयोजन है। लेकिन, वर्तमान में मात्र एक दर्जन लोगों को बड़ी मुश्किल से पानी मिल पा रहा है।
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टंकी की काफी लंबे समय से साफ- सफाई नहीं हुई है, जिससे टंकी के चारों ओर गंदगी का अंबार लगा है। गांव के लोगों ने बताया कि सहरिया बस्ती में जब से पाइप लाइन डाली गई है, तब से आज तक वहां पानी की आपूर्ति नहीं की गई।

इस  गांव में काफी संख्या में पशुपालक हैं, जिससे यहां प्रत्येक परिवार में औसत से अधिक पानी की खपत हो रही है। पशुओं को पानी की व्यवस्था के  लिए गांव के लोग सुबह से अपने पशु लेकर दिन भर बेतवा नदी के किनारे चले जाते हैं।

स्कूलों में गहराया पेयजल संकट
गांव में 11 विद्यालय हैं, जिसमें से तीन पूर्व माध्यमिक एवं आठ प्राथमिक विद्यालय हैं। हनौता में बने प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय में क्रमश: 72 व 99 छात्र-छात्राएं हैं। वहीं, कुरमाई के प्राथमिक विद्यालय में 87 विद्यार्थी हैं। तीनों विद्यालयों में बच्चों को पीने के पानी की कोई  व्यवस्था नहीं है। विद्यालय में लगे हैंडपंप खराब हैं। चोर सौर ऊर्जा के प्लांट की प्लेटें चोर चुरा ले गए है, जिससे वह भी काम नहीं करता है।

इस कारण बच्चे अपने घर से पाने का पानी ला रहे हैं। विद्यालयों में पानी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों की उपस्थिति भी काफी कम है। वहीं, मिड-डे मील बनाने में भी रसोइयों को पानी जुटाने के लिए परेशानी से जूझना पड़ रहा है।


मजदूरों के पलायन पर रोक लगाने एवं उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए तालाब गहरीकरण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इस कार्य में लगभग सौ मजदूर लगे हैं, जिन्हें 174 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जा रही है। गांव के अधिकांश हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है। ऐसी स्थिति में कई मजरों में पेयजल आपूर्ति के लिए टैंकरों का लगाया जाना आवश्यक हो गया है, जल्द ही टैंकरों से आपूर्ति सुचारु की जाएगी।
- संगीता अगरिया
ग्राम प्रधान, कड़ेसरा कलां
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