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Lalitpur News: भक्तिभाव के साथ जवारों का विसर्जन
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में मां आदिशक्ति के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है, लोग घरों में जवारों की स्थापना करते हैं। अधिकांश लोग मनोकामना पूर्ण होने पर जवारों को अपने घरों में लगाते हैं। बुंदेलखंड में घराें में जवारे लगाना माता आराधना माना जाता है। घर का मुखिया नौ दिनों तक जवारों की सेवा करता है। नौवें दिन इनका विसर्जन किया जाता है। महिलाएं अपने सिर पर जवारे लेकर नंगे पैर तालाब तक माता के भजन गाते हुए जाती हैं।
बुधवार को विभिन्न मोहल्लों से लोग समूह में जवारे लेकर सुम्मेरा तालाब पहुंचे। इन खप्परों की विधिवत पूजा की गई। इसके बाद इनका विसर्जन किया गया। कई लोग मंदिरों में जवारे खप्पर अर्पित करते हैं।
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तालाब तक चलना पड़ता है उलटे पांव : नौ दिनों तक व्रत रखकर जो इन जवारों की सेवा करता है, वह विसर्जन के समय तालाब तक उलटे पांव जवारों की आरती उतारते हुए जाता है।
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जाखलौन में जवारों का हुआ विसर्जन
जाखलौन। धौर्रा में नौ दिन तक माता रानी की पूजा अर्चना करने के बाद नवमी तिथि को जवारों का विसर्जन किया गया। बालिकाएं व महिलाएं घट को सिर पर रखकर पैदल जाती हैं, जबकि पुरुष ढोलक मंजीरा के साथ माता रानी के भजन करते आगे-आगे चलते हैं।
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भवानी माता मंदिर पर जवारे किए विसर्जित
पाली। महिलाएं अपने सिर पर जवारों के खप्पर रखकर धार्मिक गीत गाते हुए श्री बड़ी भवानी माता मंदिर पहुंचीं, यहां पूजा अर्चना करने के बाद विसर्जन कर दिया।
परंपरागत तरीके से किया विसर्जन
जखौरा। सभी जवारे मोहल्ले में एकत्रित हुए और वहां पूजा अर्चना की गई। सभी ने खप्परों को बड़ी माता मंदिर के दरबार में अर्पित किया और बस स्टैंड स्थित मानसरोवर तालाब में विसर्जन किया। संवाद
शोभायात्रा निकाली
जखौरा। रामनवमी पर शोभायात्रा निकाली गई। नगर परिक्रमा के बाद वापस रघुनाथ मंदिर प्रांगण पहुंची, जहां कार्यक्रम का समापन किया गया। रमाशंकर चौबे, द्वारिका प्रसाद स्वामी, सीताराम सैन, मनोज सोनी, गौरव सैनी, नीरज जैन, राजा झा आदि मौजूद रहे। संवाद
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ललितपुर। चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में मां आदिशक्ति के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है, लोग घरों में जवारों की स्थापना करते हैं। अधिकांश लोग मनोकामना पूर्ण होने पर जवारों को अपने घरों में लगाते हैं। बुंदेलखंड में घराें में जवारे लगाना माता आराधना माना जाता है। घर का मुखिया नौ दिनों तक जवारों की सेवा करता है। नौवें दिन इनका विसर्जन किया जाता है। महिलाएं अपने सिर पर जवारे लेकर नंगे पैर तालाब तक माता के भजन गाते हुए जाती हैं।
बुधवार को विभिन्न मोहल्लों से लोग समूह में जवारे लेकर सुम्मेरा तालाब पहुंचे। इन खप्परों की विधिवत पूजा की गई। इसके बाद इनका विसर्जन किया गया। कई लोग मंदिरों में जवारे खप्पर अर्पित करते हैं।
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तालाब तक चलना पड़ता है उलटे पांव : नौ दिनों तक व्रत रखकर जो इन जवारों की सेवा करता है, वह विसर्जन के समय तालाब तक उलटे पांव जवारों की आरती उतारते हुए जाता है।
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जाखलौन में जवारों का हुआ विसर्जन
जाखलौन। धौर्रा में नौ दिन तक माता रानी की पूजा अर्चना करने के बाद नवमी तिथि को जवारों का विसर्जन किया गया। बालिकाएं व महिलाएं घट को सिर पर रखकर पैदल जाती हैं, जबकि पुरुष ढोलक मंजीरा के साथ माता रानी के भजन करते आगे-आगे चलते हैं।
भवानी माता मंदिर पर जवारे किए विसर्जित
पाली। महिलाएं अपने सिर पर जवारों के खप्पर रखकर धार्मिक गीत गाते हुए श्री बड़ी भवानी माता मंदिर पहुंचीं, यहां पूजा अर्चना करने के बाद विसर्जन कर दिया।
परंपरागत तरीके से किया विसर्जन
जखौरा। सभी जवारे मोहल्ले में एकत्रित हुए और वहां पूजा अर्चना की गई। सभी ने खप्परों को बड़ी माता मंदिर के दरबार में अर्पित किया और बस स्टैंड स्थित मानसरोवर तालाब में विसर्जन किया। संवाद
शोभायात्रा निकाली
जखौरा। रामनवमी पर शोभायात्रा निकाली गई। नगर परिक्रमा के बाद वापस रघुनाथ मंदिर प्रांगण पहुंची, जहां कार्यक्रम का समापन किया गया। रमाशंकर चौबे, द्वारिका प्रसाद स्वामी, सीताराम सैन, मनोज सोनी, गौरव सैनी, नीरज जैन, राजा झा आदि मौजूद रहे। संवाद