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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   Immersion in the city will be the first eco friendly

नगर में पहली बार होगा इको फ्रैंडली विसर्जन

Sat, 17 Oct 2015 12:15 AM IST
ललितपुर
ललितपुर Updated Sat, 17 Oct 2015 12:15 AM IST
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ललितपुर। शहर में पहली बार ईको फ्रेंडली तरीके से देवी प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। इसके लिए नेशनल हाइवे स्थित गोविंद सागर बांध की तलहटी में 25 हजार वर्ग फुट का गड्ढा खोदा जाएगा, जिसमें पानी भरा जाएगा। इसमें 22 अक्तूबर को विधि विधान के साथ देवी प्रतिमाओं का विसर्जन होगा। तैयारियों को लेकर पुलिस व नगर पालिका के अफसरों ने बांध का निरीक्षण किया। 

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नगर में दो सैकड़ा से अधिक देवी प्रतिमाएं विराजमान हैं। तेरह अक्तूबर से शुरू हुए नवरात्र महोत्सव में श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे हुए है। सुबह से मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना करने के साथ मंगल आरती में भाग ले रहे हैं। प्रात: पांच बजे से धार्मिक गीतों का शुभारंभ हो जाता है। वहीं, देवी प्रतिमा विसर्जन को लेकर प्रशासन व नगर पालिका ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।  

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बृहस्पतिवार को नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी के एन शर्मा और क्षेत्राधिकारी सदर ओमकार सिंह यादव के नेतृत्व में देवी प्रतिमा विसर्जन को लेकर नेशनल हाइवे स्थित गोविंद सागर बांध के किनारे का निरीक्षण किया गया। अफसरों ने नगर पालिका के अवर अभियंता विपिन कुमार को मूर्ति विसर्जन के लिए 25,000 वर्ग फुट क्षेत्र में गड्ढा खोदने को कहा। उन्होंने कहा कि गड्ढे की गहराई 10 फुट रखी जाएगी, जिसमें पांच फुट का पानी भरा जाएगा। इससे प्रतिमा विसर्जन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। उन्होंने गड्ढे में उतरने के लिए घाट बनाने के भी निर्देश दिए, जिससे प्रतिमा को आसानी से नीचे उतारा जा सके और विसर्जित किया जा सके।  

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अफसरों ने कहा कि नवरात्र महोत्सव बड़ा आयोजन है, अत: इसकी सभी तैयारियां पहले से कर ली जाएं। गड्ढे में मोटरों की सहायता से पानी भर लिया जाए। रात्रि में प्रतिमा विसर्जन करने को आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए प्रकाश की समुचित व्यवस्था की जाए। अधिशासी अधिकारी के एन शर्मा ने मुख्य खाद्य एवं सफाई निरीक्षक आर के लवानियां और दिनेश कुमार बिरौनियां को प्रतिमा रखे जाने वाले स्थानों, देवी मंदिरों के आसपास नियमित साफ- सफाई कराने के निर्देश दिए। साथ ही विसर्जन के दौरान चूना डलवाने को कहा है। निरीक्षण में रमाकांत तिवारी, चंद्र विनोद मिश्रा, सुधीर रावत सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। 




बड़े शहरों की तर्ज पर होगा विसर्जन

बारिश कम होने से गोविंद सागर बांध में पानी का लेबल बहुत कम है। पानी पत्थरों के बीच में पहुंच गया है, जहां पर पहुंचना आसान नहीं है। साथ ही रात्रि में यहां पर किसी प्रकार की अनहोनी घटना हो सकती है। इसको देखते हुए प्रशासन और नगर पालिका ने बांध में ज्यादा दूरी पर मूर्ति विसर्जन नहीं करने का निर्णय लिया है। गड्ढे में पर्याप्त पानी भरा जाएगा और घाट भी बनाए जाएंगे। नगर में बड़े शहरों की तर्ज पर यह आयोजन पहली बार होगा, जो पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर होगा और धार्मिक मान्यताओं का भी ध्यान रखा जाएगा। 



पानी की भी है समस्या

गोविंद सागर बांध में पानी कम होने से गड्ढा भरने में भी परेशानी होगी। करीब दो दिन पहले मोटरों को चलाना होगा, तब जाकर गड्ढे भरा जाएगा। हालांकि, नगर पालिका परिषद ने विसर्जन को लेकर जेसीबी मशीन की सहायता से गड्ढा खुदवाना शुरू कर दिया गया है।

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