{"_id":"68fbe12f5c441ae84b085474","slug":"if-the-vehicle-gives-less-mileage-then-file-a-case-in-the-consumer-court-lalitpur-news-c-11-jhs1019-665809-2025-10-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: गाड़ी कम दे माइलेज तो उपभोक्ता न्यायालय में दायर करें वाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: गाड़ी कम दे माइलेज तो उपभोक्ता न्यायालय में दायर करें वाद
विज्ञापन
झांसी। कई कंपनियां लुभावने वादे करती हैं, लेकिन उनके उत्पाद शर्तों पर खरा नहीं उतरते। इसी तरह कई ऑटोमोबाइल कंपनियां वाहनों के ज्यादा माइलेज देने का दावा करती हैं, लेकिन असल में ऐसा होता नहीं। वहीं, कुछ कंपनियां अपने उत्पाद 100 फीसदी शुद्ध होने का वादा करती हैं, लेकिन ये मानक पर खरा नहीं उतरतीं, ऐसे में उपभोक्ता अदालत में वाद दायर कर सकते हैं। हाल में उपभोक्ता न्यायालय में कई ऐसे मामले सामने आए हैं। एक मामले में दो से तीन दिन में फैसला आने वाला है।
उपभोक्ता न्यायालय के अधिवक्ता गणेश खरे ने बताया कि कई कंपनियां गाड़ियों के ज्यादा माइलेज देने का वादा करती हैं, लेकिन ग्राहक उनके किए गए वादे से संतुष्ट नहीं होते और कंपनी के चक्कर काटते रहते हैं। खासकर आजकल ईवी स्कूटी का चलन बढ़ा है। कंपनियां एक बार चार्ज करने पर 200 से 250 किलोमीटर चलने का वादा कर रही हैं, लेकिन वाहन 100 किलोमीटर से अधिक नहीं चल रहा। जो लोग जागरूक हैं, वह उपभोक्ता अदालत की शरण ले रहे हैं।
यह व्यवस्था सिर्फ बाइक और ईवी के लिए ही नहीं है। बल्कि, कई कंपनियां खानपान के पदार्थों को 100 प्रतिशत शुद्ध और प्राकृतिक बताकर अपने ब्रांड बाजार में उतारती हैं। यदि ग्राहक उससे असंतुष्ट है तो वह कंपनी के विरुद्ध वाद दायर कर सकता है। यदि न्यायालय को लगता है कि कंपनी उपभोक्ता से धोखाधड़ी कर रही है तो न्यायालय कंपनी को दंडित करने के साथ उपभोक्ता को हर्जाना दिलाने का आदेश दे सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
उपभोक्ता न्यायालय के अधिवक्ता गणेश खरे ने बताया कि कई कंपनियां गाड़ियों के ज्यादा माइलेज देने का वादा करती हैं, लेकिन ग्राहक उनके किए गए वादे से संतुष्ट नहीं होते और कंपनी के चक्कर काटते रहते हैं। खासकर आजकल ईवी स्कूटी का चलन बढ़ा है। कंपनियां एक बार चार्ज करने पर 200 से 250 किलोमीटर चलने का वादा कर रही हैं, लेकिन वाहन 100 किलोमीटर से अधिक नहीं चल रहा। जो लोग जागरूक हैं, वह उपभोक्ता अदालत की शरण ले रहे हैं।
विज्ञापन
यह व्यवस्था सिर्फ बाइक और ईवी के लिए ही नहीं है। बल्कि, कई कंपनियां खानपान के पदार्थों को 100 प्रतिशत शुद्ध और प्राकृतिक बताकर अपने ब्रांड बाजार में उतारती हैं। यदि ग्राहक उससे असंतुष्ट है तो वह कंपनी के विरुद्ध वाद दायर कर सकता है। यदि न्यायालय को लगता है कि कंपनी उपभोक्ता से धोखाधड़ी कर रही है तो न्यायालय कंपनी को दंडित करने के साथ उपभोक्ता को हर्जाना दिलाने का आदेश दे सकती है।
विज्ञापन