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98 दिनों से नहीं मिला सका जिले में मरीजों को होम्योपैथी उपचार
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ललितपुर। जिले में 98 दिनों से होम्योपैथिक अस्पतालों में मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। यहां पर चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। जो तैनात हैं, उन्हें मेडिकल क्वारंटीन सेंटरों पर लगा दिया गया है। इससे अस्पतालों में मरीजों को इलाज देने के लिए चिकित्सकों की कमी के चलते उपचार नहीं मिल पा रहा है।
जनपद में होम्योपैथिक उपचार की सुविधा के लिए 24 अस्पताल संचालित हैं, लेकिन चिकित्सकों की कमी के चलते उपचार की सेवाएं मुहैया कराने के लिए अस्पताल खरे नहीं उतर पा रहे हैं। अस्पतालों में चिकित्सकों की भारी कमी बनी है। स्थिति यह है कि अस्पतालों को संचालित करने के लिए 25 चिकित्सकों की आवश्यकता है, जिसके सापेक्ष मात्र छह चिकित्सक ही तैनात हैं। इतना ही नहीं अस्पतालों में फार्मासिस्टों की भी कमी बनी हुई है। यही नहीं, दस अस्पतालों में ताले पड़े हैं। अस्पतालों को संचालित करने के लिए अटैचमेंट सेवा संजीवनी बनी हुई है, इससे एक फार्मासिस्ट दो से तीन अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं। फार्मासिस्ट कहीं दो दिन तो कहीं तीन दिन एक अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं।
देश में फैली वैश्विक बीमारी कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए 25 मार्च को लॉकडाउन किया गया, इसके तीन दिन पहले ही अस्पतालों में भीड़ को रोकने के लिए शासन ने ओपीडी सेवा बंद कर दी गईं। केवल इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखा गया है। तब से होम्योपैथी से उपचार मिलना जिले में बंद है और अस्पतालों में ताले पड़ गए हैं। वहीं, होम्योपैथी के सभी चिकित्सकों को मेडिकल क्वारंटीन सेंटर में लगाया गया। फार्मासिस्ट भी क्वारंटीन व कोविड- 19 ड्यूटी में लगाए गए हैं। इससे मरीजों को 98 दिन से होम्योपैथी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। जबकि अस्पतालों में प्रतिमाह लगभग सात से आठ हजार मरीज होम्योपैथी उपचार लेते है। कई मरीज तो उपचार ही नहीं करा रहे हैं। वहीं कइयों को क्षेत्रीय क्लीनिकों का मजबूर होकर सहारा लेना पड़ रहा है।
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योगा वेलनेस सेंटर भी बंद
रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए काढ़ा पीने के लिए जागरुक किया जा रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में योग को अधिक महत्व दिया जा रहा है, लेकिन जिला मुख्यालय पर स्थित योगा वेलनेस सेंटर भी बंद है। इससे लोगों को योग की जानकारी नहीं हो पा रही है। हालांकि, योग को जागरुक करने के लिए योग प्रशिक्षक द्वारा कंपनी बाग में योग करा कर जागरुक किया जा रहा है।
होम्योपैथी में चिकित्सकों और स्टाफ की भारी कमी है। अधिकांश चिकित्सकों व स्टाफ को कोविड ड्यूटी में लगाया गया है। जिसके चलते अस्पताल बंद चल रहे हैं। - डॉ. नीरज चतुर्वेदी, जिला होम्योपैथी अधिकारी
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जनपद में होम्योपैथिक उपचार की सुविधा के लिए 24 अस्पताल संचालित हैं, लेकिन चिकित्सकों की कमी के चलते उपचार की सेवाएं मुहैया कराने के लिए अस्पताल खरे नहीं उतर पा रहे हैं। अस्पतालों में चिकित्सकों की भारी कमी बनी है। स्थिति यह है कि अस्पतालों को संचालित करने के लिए 25 चिकित्सकों की आवश्यकता है, जिसके सापेक्ष मात्र छह चिकित्सक ही तैनात हैं। इतना ही नहीं अस्पतालों में फार्मासिस्टों की भी कमी बनी हुई है। यही नहीं, दस अस्पतालों में ताले पड़े हैं। अस्पतालों को संचालित करने के लिए अटैचमेंट सेवा संजीवनी बनी हुई है, इससे एक फार्मासिस्ट दो से तीन अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं। फार्मासिस्ट कहीं दो दिन तो कहीं तीन दिन एक अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं।
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देश में फैली वैश्विक बीमारी कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए 25 मार्च को लॉकडाउन किया गया, इसके तीन दिन पहले ही अस्पतालों में भीड़ को रोकने के लिए शासन ने ओपीडी सेवा बंद कर दी गईं। केवल इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखा गया है। तब से होम्योपैथी से उपचार मिलना जिले में बंद है और अस्पतालों में ताले पड़ गए हैं। वहीं, होम्योपैथी के सभी चिकित्सकों को मेडिकल क्वारंटीन सेंटर में लगाया गया। फार्मासिस्ट भी क्वारंटीन व कोविड- 19 ड्यूटी में लगाए गए हैं। इससे मरीजों को 98 दिन से होम्योपैथी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। जबकि अस्पतालों में प्रतिमाह लगभग सात से आठ हजार मरीज होम्योपैथी उपचार लेते है। कई मरीज तो उपचार ही नहीं करा रहे हैं। वहीं कइयों को क्षेत्रीय क्लीनिकों का मजबूर होकर सहारा लेना पड़ रहा है।
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योगा वेलनेस सेंटर भी बंद
रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए काढ़ा पीने के लिए जागरुक किया जा रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में योग को अधिक महत्व दिया जा रहा है, लेकिन जिला मुख्यालय पर स्थित योगा वेलनेस सेंटर भी बंद है। इससे लोगों को योग की जानकारी नहीं हो पा रही है। हालांकि, योग को जागरुक करने के लिए योग प्रशिक्षक द्वारा कंपनी बाग में योग करा कर जागरुक किया जा रहा है।
होम्योपैथी में चिकित्सकों और स्टाफ की भारी कमी है। अधिकांश चिकित्सकों व स्टाफ को कोविड ड्यूटी में लगाया गया है। जिसके चलते अस्पताल बंद चल रहे हैं। - डॉ. नीरज चतुर्वेदी, जिला होम्योपैथी अधिकारी