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विश्व रिकार्ड के लिए हो रही मशक्कत
ब्यूरो
Updated Mon, 09 Nov 2015 01:14 AM IST
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ललितपुर। पौधरोपण कार्य को गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराने के लिए जिले की गौना वन रेंज में पौधे रोपने का कार्य रविवार को भी जारी रहा। देर शाम तक पौधरोपण का कार्य चलता रहा। वहीं, विभागीय अफसरों को जमीन में पानी की नमी नहीं होने के कारण मुश्किल नजर आ रही है, उनको पौधरोपण के साथ-साथ सिंचाई का कार्य भी कराना पड़ रहा है।
जिले में 1.21 लाख पौधे रोपे जाने हैं। लेकिन, इस बार काफी कम पानी बरसा है, जिससे जमीन में नमी नहीं है। जमीन की ऊपर की परत सूखी है, जबकि अंदर की तरफ मामूली सी नमी है। लेकिन, इस नमी का लाभ आठ फुट के पौधों को नहीं मिल पा रहा है, जिससे वन कर्मियों को पौधरोपण के साथ-साथ सिंचाई का भी कार्य करना पड़ रहा है। इसका असर पौधरोपण पर पड़ रहा है।
रविवार को देर शाम तक चीमना वन क्षेत्र में पौधरोपण का कार्य चलता रहा। डीएफओ वीके जैन का कहना है कि जब एक पौधे को दूसरे स्थान पर लाया जाता है, तो पौधे मुरझाने लगते हैं। यह पौध अन्य जिलों से लाई गई है। इस कारण पौधों को तत्काल पानी की जरूरत पड़ रही है। जमीन में नमी की भी कमी है, इन हालात में टैंकर से पौधों की सिंचाई कराई जा रही है। इससे वन कर्मियों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर श्रमिकों की कमी पड़ रही है। एक श्रमिक पौधरोपण का कार्य कर रहा है तो दूसरे को सिंचाई में लगाया गया है। इस तरह से पौधरोपण के कार्य पर असर पड़ रहा है।
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अफसरों के चेहरों पर दिख रहा तनाव
सूखी जमीन में पौधरोपण कर तो दिया गया है, लेकिन उनके सामने पौधरोपण को सुरक्षित बचाने की मुश्किलें अभी से दिखाई देने लगी हैं। उनका मानना है कि वर्तमान मौसम पौधरोपण के अनुकूल नहीं है। इससे पौधरोपण सवालों के घेरे में आता दिख रहा है।
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जिले में 1.21 लाख पौधे रोपे जाने हैं। लेकिन, इस बार काफी कम पानी बरसा है, जिससे जमीन में नमी नहीं है। जमीन की ऊपर की परत सूखी है, जबकि अंदर की तरफ मामूली सी नमी है। लेकिन, इस नमी का लाभ आठ फुट के पौधों को नहीं मिल पा रहा है, जिससे वन कर्मियों को पौधरोपण के साथ-साथ सिंचाई का भी कार्य करना पड़ रहा है। इसका असर पौधरोपण पर पड़ रहा है।
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रविवार को देर शाम तक चीमना वन क्षेत्र में पौधरोपण का कार्य चलता रहा। डीएफओ वीके जैन का कहना है कि जब एक पौधे को दूसरे स्थान पर लाया जाता है, तो पौधे मुरझाने लगते हैं। यह पौध अन्य जिलों से लाई गई है। इस कारण पौधों को तत्काल पानी की जरूरत पड़ रही है। जमीन में नमी की भी कमी है, इन हालात में टैंकर से पौधों की सिंचाई कराई जा रही है। इससे वन कर्मियों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर श्रमिकों की कमी पड़ रही है। एक श्रमिक पौधरोपण का कार्य कर रहा है तो दूसरे को सिंचाई में लगाया गया है। इस तरह से पौधरोपण के कार्य पर असर पड़ रहा है।
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अफसरों के चेहरों पर दिख रहा तनाव
सूखी जमीन में पौधरोपण कर तो दिया गया है, लेकिन उनके सामने पौधरोपण को सुरक्षित बचाने की मुश्किलें अभी से दिखाई देने लगी हैं। उनका मानना है कि वर्तमान मौसम पौधरोपण के अनुकूल नहीं है। इससे पौधरोपण सवालों के घेरे में आता दिख रहा है।