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हरियाली के लिए ‘जायका’ को मंजूरी
lalitpur
Updated Mon, 10 Jul 2017 12:55 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
ललितपुर। जलवायु परिवर्तन और कार्बन डाई आक्साइड के बढ़ते स्तर से निपटने के लिए जायका परियोजना के तहत क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म (सीडीएम) योजना को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत वन विभाग उन जगहों पर पेड़ लगाएगा जहां पहले और आज भी पेड़ पनप नहीं सके हैं। प्रदेश के दस जिलों में बीस साल के लिए यह योजना लागू की गई है। योजना को संयुक्त राष्ट्र संघ की भी अनुमति मिलने से जापान सरकार 20 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद करेगी।
कारखानों की चिमनियों एवं वाहनों से कार्बन डाई आक्साइड का बड़े पैमाने पर उत्सर्जन हो रहा है, जिससे ग्रीन हाउस गैसें प्रभावित हो रही हैं। वहीं, तापमान में बढ़ोत्तरी से ग्लेशियर भी पिघल रहे हैं। इसे ध्यान में रखकर विकसित देशों ने जलवायु परिवर्तन समझौते के तहत क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म (सीडीएम ) परियोजना लागू करने के लिए विकासशील देशों से हाथ मिलाया है। भारत ने जापान सरकार के सहयोग से चलाई जा रही जायका परियोजना के अंतर्गत सीडीएम को मंजूरी दे दी है। इसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी स्वीकृति प्रदान कर दी है। योजनांतर्गत उन जगहों पर पौधे रोपित किए जाएंगे जहां पच्चीस वर्ष पहले व आज भी जंगल नहीं है। ऐसे स्थलों को वन विभाग चिह्नित करेगा। पेड़ों के बड़े होने पर एक जांच दल इनकी शाखाओं की मोटाई मापेगा। इससे पता चलेगा कि पेड़ वातावरण में कितनी ऑक्सीजन घोल रहे हैं और कितनी कार्बनडाई आक्साइड सोख रहे हैं। हर पांच साल में इस कार्य की समीक्षा की जाएगी। योजना को बीस साल के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है। वन विभाग ने जिले में 416.09 हेक्टेयर क्षेत्रफल को पौधे रोपने के लिए चयनित कर लिया है। जर्मनी की टीम इस क्षेत्रफल का पहले ही सर्वे कर चुकी है।
सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय निदेशक वीके जैन ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब प्रदेश को बीस करोड़ रुपये दिए जाएंगे। यूपी के दस जिलों ललितपुर को भी शामिल किया गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ की वेबसाइट पर इसे देखा जा सकता है। एसडीओ आरके त्रिपाठी का कहना है कि जीपीएस के जरिए 305 सैंपल प्लॉट तैयार किए जा चुके हैं, जिनकी चौहद्दी भी बना ली गई है। इससे कि पेड़ों की कार्बन डाई आक्साइड जांचने में दिक्कत न हो।
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ऐसे तय होगी कार्बन क्रेडिट
पेड़ पौधों का भोजन पानी के अलावा कार्बन डाई आक्साइड भी होता है। पेड़ हवा में पाई जाने वाली कार्बन डाई आक्साइड को फोटोसिंथेसिस के जरिए ग्रहण करते हैं। इससे पेड़ का आकार बढ़ता है। इसी आकार की माप-तोल की जाएगी। इसके एवज में विकसित देश विकासशील देशों को धनराशि देंगे।
रेंजों में चयनित समितियां
योजनांतर्गत पहले से गठित चौदह संयुक्त वन प्रबंध समितियों को चयनित किया गया है जो पुराने वृक्षारोपण एवं प्राकृतिक वृक्षों की सुरक्षा करेगी।
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रेंज का नाम समिति का नाम चयनित क्षेत्रफल
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तालबेहट करेगा 53.72
तालबेहट कंधारीकला 17.6
तालबेहट पिपरई 6.79
तालबेहट तिंद्रा 22.71
तालबेहट विजयपुरा 11.86
तालबेहट कडेसरा कला 37.83
तालबेहट टेटा 9.02
ललितपुर धौजरी 42.6
महरौनी कुसमाड़ 8.47
बार बिल्ला 83.78
बार पाह 36.39
बार गंगचारी 24.17
बार दैलवारा 49.38
मड़ावरा हंसरी 11.77
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कारखानों की चिमनियों एवं वाहनों से कार्बन डाई आक्साइड का बड़े पैमाने पर उत्सर्जन हो रहा है, जिससे ग्रीन हाउस गैसें प्रभावित हो रही हैं। वहीं, तापमान में बढ़ोत्तरी से ग्लेशियर भी पिघल रहे हैं। इसे ध्यान में रखकर विकसित देशों ने जलवायु परिवर्तन समझौते के तहत क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म (सीडीएम ) परियोजना लागू करने के लिए विकासशील देशों से हाथ मिलाया है। भारत ने जापान सरकार के सहयोग से चलाई जा रही जायका परियोजना के अंतर्गत सीडीएम को मंजूरी दे दी है। इसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी स्वीकृति प्रदान कर दी है। योजनांतर्गत उन जगहों पर पौधे रोपित किए जाएंगे जहां पच्चीस वर्ष पहले व आज भी जंगल नहीं है। ऐसे स्थलों को वन विभाग चिह्नित करेगा। पेड़ों के बड़े होने पर एक जांच दल इनकी शाखाओं की मोटाई मापेगा। इससे पता चलेगा कि पेड़ वातावरण में कितनी ऑक्सीजन घोल रहे हैं और कितनी कार्बनडाई आक्साइड सोख रहे हैं। हर पांच साल में इस कार्य की समीक्षा की जाएगी। योजना को बीस साल के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है। वन विभाग ने जिले में 416.09 हेक्टेयर क्षेत्रफल को पौधे रोपने के लिए चयनित कर लिया है। जर्मनी की टीम इस क्षेत्रफल का पहले ही सर्वे कर चुकी है।
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सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय निदेशक वीके जैन ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब प्रदेश को बीस करोड़ रुपये दिए जाएंगे। यूपी के दस जिलों ललितपुर को भी शामिल किया गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ की वेबसाइट पर इसे देखा जा सकता है। एसडीओ आरके त्रिपाठी का कहना है कि जीपीएस के जरिए 305 सैंपल प्लॉट तैयार किए जा चुके हैं, जिनकी चौहद्दी भी बना ली गई है। इससे कि पेड़ों की कार्बन डाई आक्साइड जांचने में दिक्कत न हो।
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ऐसे तय होगी कार्बन क्रेडिट
पेड़ पौधों का भोजन पानी के अलावा कार्बन डाई आक्साइड भी होता है। पेड़ हवा में पाई जाने वाली कार्बन डाई आक्साइड को फोटोसिंथेसिस के जरिए ग्रहण करते हैं। इससे पेड़ का आकार बढ़ता है। इसी आकार की माप-तोल की जाएगी। इसके एवज में विकसित देश विकासशील देशों को धनराशि देंगे।
रेंजों में चयनित समितियां
योजनांतर्गत पहले से गठित चौदह संयुक्त वन प्रबंध समितियों को चयनित किया गया है जो पुराने वृक्षारोपण एवं प्राकृतिक वृक्षों की सुरक्षा करेगी।
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रेंज का नाम समिति का नाम चयनित क्षेत्रफल
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तालबेहट करेगा 53.72
तालबेहट कंधारीकला 17.6
तालबेहट पिपरई 6.79
तालबेहट तिंद्रा 22.71
तालबेहट विजयपुरा 11.86
तालबेहट कडेसरा कला 37.83
तालबेहट टेटा 9.02
ललितपुर धौजरी 42.6
महरौनी कुसमाड़ 8.47
बार बिल्ला 83.78
बार पाह 36.39
बार गंगचारी 24.17
बार दैलवारा 49.38
मड़ावरा हंसरी 11.77
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