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Lalitpur News: बांग्लादेश की थाली तक पहुंच रहा बुंदेलखंड का अनाज
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नीरज वर्मा
झांसी। बांग्लादेश के साथ व्यापारिक गतिविधियां सामान्य होने के बाद इस साल अप्रैल से झांसी रेल मंडल के जरिये खाद्यान्न का निर्यात फिर शुरू हो गया है। बुंदेलखंड से गेहूं, चावल और दालों के साथ सरसों व सोयाबीन की खली (डीओसी) भी बांग्लादेश भेजी जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से 30 सितंबर तक मंडल से बांग्लादेश के लिए करीब 1.43 लाख टन माल भेजा गया। इस दौरान खाद्यान्न के पांच और डीओसी के 50 रैक रवाना किए गए।
रेलवे के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश के साथ व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने से रेल मार्ग से माल भेजने का सिलसिला बढ़ा है। खाद्यान्न की खेप में गेहूं, चावल और दालें शामिल हैं। बता दें कि खाद्यान्न के प्रत्येक रैक से रेलवे को करीब 70 लाख रुपये की आमदनी होती है।
पशुओं को ताकत दे रही बुंदेलखंड की खली
बांग्लादेश को गेहूं-चावल के साथ सरसों और सोयाबीन की खली (डीओसी) भी भेजी जा रही है। तेल निकालने के बाद बचने वाली इस खली का इस्तेमाल मुख्य रूप से पशु आहार तैयार करने में होता है। प्रोटीन से भरपूर होने के कारण यह पशुओं के पोषण में उपयोगी है। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में सांक स्टेशन से डीओसी के 50 रैक बांग्लादेश भेजे गए हैं। तीन साल पहले भी यहां से माल का रैक बांग्लादेश रवाना किया गया था।
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झांसी और सांक से रवाना हो रहीं मालगाड़ियां
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश के लिए खाद्यान्न की खेप झांसी से, जबकि डीओसी की ढुलाई मंडल के सांक स्टेशन से की जा रही है। यहां से मालगाड़ियां सीमा पर स्थित रोहनपुर और दर्शना स्टेशनों तक पहुंचती हैं। इसके बाद माल बांग्लादेश भेजा जाता है। एक रैक में करीब 2,600 टन माल लादने की क्षमता है। अप्रैल से सितंबर तक कुल 55 रैक भेजे गए।
दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने से झांसी रेल मंडल से मालगाड़ियों के जरिये निर्यात में वृद्धि हुई है। मंडल से माल सीमा पर स्थित स्टेशनों तक पहुंचाया जाता है, जहां से बांग्लादेश में उसकी आपूर्ति होती है। - नीरज भटनागर, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, रेलवे
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लौह अयस्क और डोलोमाइट की ढुलाई से 37 करोड़ की आमदनी
झांसी रेल मंडल में लौह अयस्क और डोलोमाइट की ढुलाई भी शुरू हुई है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, बरुआसागर से लौह अयस्क की ढुलाई के जरिये अब तक 15 करोड़ रुपये की आय हुई है। वहीं, छतरपुर से डोलोमाइट के परिवहन से रेलवे को 22 करोड़ रुपये मिले हैं। इस तरह दोनों खनिजों की ढुलाई से मंडल को कुल 37 करोड़ रुपये की आय हुई है।
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झांसी। बांग्लादेश के साथ व्यापारिक गतिविधियां सामान्य होने के बाद इस साल अप्रैल से झांसी रेल मंडल के जरिये खाद्यान्न का निर्यात फिर शुरू हो गया है। बुंदेलखंड से गेहूं, चावल और दालों के साथ सरसों व सोयाबीन की खली (डीओसी) भी बांग्लादेश भेजी जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से 30 सितंबर तक मंडल से बांग्लादेश के लिए करीब 1.43 लाख टन माल भेजा गया। इस दौरान खाद्यान्न के पांच और डीओसी के 50 रैक रवाना किए गए।
रेलवे के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश के साथ व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने से रेल मार्ग से माल भेजने का सिलसिला बढ़ा है। खाद्यान्न की खेप में गेहूं, चावल और दालें शामिल हैं। बता दें कि खाद्यान्न के प्रत्येक रैक से रेलवे को करीब 70 लाख रुपये की आमदनी होती है।
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पशुओं को ताकत दे रही बुंदेलखंड की खली
बांग्लादेश को गेहूं-चावल के साथ सरसों और सोयाबीन की खली (डीओसी) भी भेजी जा रही है। तेल निकालने के बाद बचने वाली इस खली का इस्तेमाल मुख्य रूप से पशु आहार तैयार करने में होता है। प्रोटीन से भरपूर होने के कारण यह पशुओं के पोषण में उपयोगी है। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में सांक स्टेशन से डीओसी के 50 रैक बांग्लादेश भेजे गए हैं। तीन साल पहले भी यहां से माल का रैक बांग्लादेश रवाना किया गया था।
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झांसी और सांक से रवाना हो रहीं मालगाड़ियां
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश के लिए खाद्यान्न की खेप झांसी से, जबकि डीओसी की ढुलाई मंडल के सांक स्टेशन से की जा रही है। यहां से मालगाड़ियां सीमा पर स्थित रोहनपुर और दर्शना स्टेशनों तक पहुंचती हैं। इसके बाद माल बांग्लादेश भेजा जाता है। एक रैक में करीब 2,600 टन माल लादने की क्षमता है। अप्रैल से सितंबर तक कुल 55 रैक भेजे गए।
दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने से झांसी रेल मंडल से मालगाड़ियों के जरिये निर्यात में वृद्धि हुई है। मंडल से माल सीमा पर स्थित स्टेशनों तक पहुंचाया जाता है, जहां से बांग्लादेश में उसकी आपूर्ति होती है। - नीरज भटनागर, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, रेलवे
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लौह अयस्क और डोलोमाइट की ढुलाई से 37 करोड़ की आमदनी
झांसी रेल मंडल में लौह अयस्क और डोलोमाइट की ढुलाई भी शुरू हुई है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, बरुआसागर से लौह अयस्क की ढुलाई के जरिये अब तक 15 करोड़ रुपये की आय हुई है। वहीं, छतरपुर से डोलोमाइट के परिवहन से रेलवे को 22 करोड़ रुपये मिले हैं। इस तरह दोनों खनिजों की ढुलाई से मंडल को कुल 37 करोड़ रुपये की आय हुई है।