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गोविंद सागर जाएं, तो जरा संभलकर
lalitpur
Updated Mon, 22 Aug 2016 02:01 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। वर्तमान समय में शहरवासियों के पास बरसात के मौसम का आनंद उठाने के लिए गोविंद सागर बांध के अलावा कोई विकल्प नहीं हैं। लेकिन यहां जाना भी किसी परेशानी से कम नहीं है। कारण वहां जाने वाला मार्ग खस्ताहाल हो चुका है और बांध परिसर में अव्यवस्थाएं हावी हैं। वहां जान जोखिम में डालकर कुछ युवा करतब दिखा रहे हैं। ऐसे में वहां अप्रिय वारदात का भी अंदेशा है।
गोविंद सागर बांध सिंचाई विभाग की राजघाट निर्माण खंड इकाई के अधीन है। बांध के रखरखाव व सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राजघाट निर्माण खंड के अधिकारियों की है। लेकिन विभाग की उदासीनता के कारण बांध दिन व दिन बदहाली की ओर बढ़ता जा रहा है। बांध के दोनों छोर से गेट की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है। पक्की सड़क पूरी तरह से उखड़ चुकी है जिस पर चलना जोखिम से कम नहीं है।
सुरक्षा के नहीं हैं कोई इंतजाम
बांध पर सुरक्षा के नाम पर कोई इंतजाम नहीं हैं। बांध पर बने सलूज के दोनों ओर सुरक्षा के लिए लगे लोहे के पाइपों को अराजकतत्वों द्वारा वर्षों पहले निकाल लिया गया है। राजघाट निर्माण खंड विभाग के अधिकारियों ने पाइप लगवाने के बजाय इसके मुख्य द्वार को ही बंद कर दिया है, लेकिन बच्चे और युवा बंद पड़े गेट व दीवारों को फांदकर अंदर चले जाते हैं। इस समय बांध में पानी लबालब भरा हुआ है। बांध में स्वीमिंग का मजा लेने के लिए युवक पानी में करीब बीस-तीस फुट की ऊंचाई से छलांग लगा रहे हैं। पूर्व की तरह यहां पर वर्तमान में भी कोई अप्रिय घटना घटित हो सकती है, लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर तैराकी करने वाले युवाओं को रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
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रविवार को भी गोविंद सागर बांध पर दर्जनों युवक तेज लहरों के बीच काफी ऊंचाई से कूदकर तैराकी करते हुए दिखे। इसी तरह का नजारा बांध के गेटों के पास देखने को मिला। रविवार को बांध के गेट तो नहीं खुले थे, लेकिन गेट के किनारों से तेज रफ्तार में पानी निकल रहा था। इस दौरान कई युवक अपनी फोटो निकलवाने के लिए पानी के बीच पथरीले व काई लगे स्थानों पर बहते हुए पानी के बीच चले गए। देखते ही देखते कई लोग पानी में गिरे, लेकिन संभलकर उठ गए और फिर अपनी फोटो निकलवाने लगे।
गौरतलब है कि इसी स्थान से सटा हुआ गार्ड रूम बना हुआ है, जहां पर बांध की सुरक्षा के लिए विभागीय कर्मी तैनात रहते हैं। किसी ने भी इन युवकों को ऐसा करने से एक बार भी नहीं रोका। वहीं एक युवती भी अपने साथ चार वर्ष के एक बच्चे को लेकर पानी के बीच फोटो के लिए चली गई। किसी सुरक्षा कर्मी या अन्य युवक तो दूर की बात, परिजनों ने भी युवती को ऐसा करने से नहीं रोका, जब तक युवती व बच्चा वापस नहीं आ गए उसके लापरवाह परिजन भी अपनी मस्ती व बातों में लगे रहे।
असुविधाओं की है भरमार
गोविंद सागर बांध की तलहटी में लाखों रुपए की लागत से बना पार्क भी सुरक्षा व रखरखाव के अभाव में अपना अस्तित्व खो चुका है। बांध को बने हुए करीब 70 वर्ष होने वाले हैं, लेकिन अब तक विभाग यहां पर प्रकाश की व्यवस्था नहीं कर पाया है। सड़क किनारे वर्षों से खड़े स्ट्रीट लाइट के पोल बल्ब व ट्यूबलाइट की बाट जोह रहे हैं।
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गोविंद सागर बांध सिंचाई विभाग की राजघाट निर्माण खंड इकाई के अधीन है। बांध के रखरखाव व सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राजघाट निर्माण खंड के अधिकारियों की है। लेकिन विभाग की उदासीनता के कारण बांध दिन व दिन बदहाली की ओर बढ़ता जा रहा है। बांध के दोनों छोर से गेट की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है। पक्की सड़क पूरी तरह से उखड़ चुकी है जिस पर चलना जोखिम से कम नहीं है।
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सुरक्षा के नहीं हैं कोई इंतजाम
बांध पर सुरक्षा के नाम पर कोई इंतजाम नहीं हैं। बांध पर बने सलूज के दोनों ओर सुरक्षा के लिए लगे लोहे के पाइपों को अराजकतत्वों द्वारा वर्षों पहले निकाल लिया गया है। राजघाट निर्माण खंड विभाग के अधिकारियों ने पाइप लगवाने के बजाय इसके मुख्य द्वार को ही बंद कर दिया है, लेकिन बच्चे और युवा बंद पड़े गेट व दीवारों को फांदकर अंदर चले जाते हैं। इस समय बांध में पानी लबालब भरा हुआ है। बांध में स्वीमिंग का मजा लेने के लिए युवक पानी में करीब बीस-तीस फुट की ऊंचाई से छलांग लगा रहे हैं। पूर्व की तरह यहां पर वर्तमान में भी कोई अप्रिय घटना घटित हो सकती है, लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर तैराकी करने वाले युवाओं को रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
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रविवार को भी गोविंद सागर बांध पर दर्जनों युवक तेज लहरों के बीच काफी ऊंचाई से कूदकर तैराकी करते हुए दिखे। इसी तरह का नजारा बांध के गेटों के पास देखने को मिला। रविवार को बांध के गेट तो नहीं खुले थे, लेकिन गेट के किनारों से तेज रफ्तार में पानी निकल रहा था। इस दौरान कई युवक अपनी फोटो निकलवाने के लिए पानी के बीच पथरीले व काई लगे स्थानों पर बहते हुए पानी के बीच चले गए। देखते ही देखते कई लोग पानी में गिरे, लेकिन संभलकर उठ गए और फिर अपनी फोटो निकलवाने लगे।
गौरतलब है कि इसी स्थान से सटा हुआ गार्ड रूम बना हुआ है, जहां पर बांध की सुरक्षा के लिए विभागीय कर्मी तैनात रहते हैं। किसी ने भी इन युवकों को ऐसा करने से एक बार भी नहीं रोका। वहीं एक युवती भी अपने साथ चार वर्ष के एक बच्चे को लेकर पानी के बीच फोटो के लिए चली गई। किसी सुरक्षा कर्मी या अन्य युवक तो दूर की बात, परिजनों ने भी युवती को ऐसा करने से नहीं रोका, जब तक युवती व बच्चा वापस नहीं आ गए उसके लापरवाह परिजन भी अपनी मस्ती व बातों में लगे रहे।
असुविधाओं की है भरमार
गोविंद सागर बांध की तलहटी में लाखों रुपए की लागत से बना पार्क भी सुरक्षा व रखरखाव के अभाव में अपना अस्तित्व खो चुका है। बांध को बने हुए करीब 70 वर्ष होने वाले हैं, लेकिन अब तक विभाग यहां पर प्रकाश की व्यवस्था नहीं कर पाया है। सड़क किनारे वर्षों से खड़े स्ट्रीट लाइट के पोल बल्ब व ट्यूबलाइट की बाट जोह रहे हैं।